अंटार्कटिका में मिले ऐसे उल्कापिंड, जिनसे खुल सकता है पृथ्वी का ये रहस्य
वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका में एक दुर्लभ उल्कापिंड खोजा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे पृथ्वी के निर्माण के बारे में काफी अहम जानकारी जुटाई जा सकती है।

वैज्ञानिकों को हाल ही में एक बड़ी कामयाबी मिली है। उन्होंने अंटार्कटिका में एक बड़ा उल्कापिंड खोजा है, जिससे पृथ्वी के निर्माण का रहस्य खुल सकता है। यह उल्कापिंड कई हजार या लाखों वर्षों से अंटार्कटिका की बर्फ में दवा पड़ा था। इस मिशन में वैज्ञानिकों को सैटेलाइट और जीपीएस ने काफी मदद की है। 7.6 किलो ग्राम वजन वाले बड़े उल्कापिंड को देखकर वैज्ञानिक इतने उत्साहित थे कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन, उत्साह में भी उन्होंने उसे हाथ से छूने की गलती नहीं की और आगे की रिसर्च के लिए उसे सहेज कर तत्काल प्लास्टिक के बैग में डाल लिया। (पहली तीनों ही तस्वीरें- 7.6 किलो ग्राम वजनी उल्कापिंड और अंटार्कटिका के उस ब्लू आइसफिल्ड की हैं, जहां से यह खोजा गया है)

7.6 किलो ग्राम वजन वाले उल्कापिंड की खोज
वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका की गहराइयों में ऐसे उल्कापिंड पाए हैं, जिससे यह पता चल सकता है कि अरबों साल पहले पृथ्वी कैसे बनी थी। इनमें से एक उल्कापिंड 7.6 किलो ग्राम वजन का है। ये उल्कापिंड 11 दिसंबर, 2022 से 11 जनवरी, 2023 तक अंटार्टिका में टोही मिशन के लिए गई वैज्ञानिकों की टीम को मिले हैं। मिशन की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इस सर्वे का उद्देश्य बेल्जियम के प्रिंसेज एलिजाबेथ अंटार्कटिका स्टेशन के आसपास इकट्ठे उल्कापिंड के नए क्षेत्रों का पता लगाना था।

यहां पहले भी मिले उल्कापिंड, लेकिन इस बार खास है
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख स्थित ईटीएच के पृथ्वी विज्ञान विभाग की प्रोफेसर Maria Schoenbaechler ने इसके बारे में कहा, 'उल्कापिंड टूटे हुए तारों के रूप में अंतरिक्ष से गिरी हुई चट्टानें हैं। इससे पहले अंटार्कटिका में बेल्जियम स्टेशन के नजदीक नैनसेन ब्लू आइस फील्ड में 3 सफल बेल्जियम-जापानी मिशनों ने 600 से ज्यादा उल्कापिंड जमा किए थे। सैटेलाइट तस्वीरों और जीपीएस की मदद से टीम उल्कापिंडों को खोजने के लिए दिलचस्पी वाली क्षमतावान कई क्षेत्रों की तलाश में निकल पड़ी थी।'

अंटार्कटिका में इतना बड़ा उल्कापिंड दुर्लभ- वैज्ञानिक
उन्होंने आगे बताया कि 'सबसे बड़ी बात ये रही है कि जब टीम लौटी तो उसके साथ सामानों में एक बहुत सुंदर आश्चर्य था- 7.6 किलो ग्राम का उल्कापिंड! अंटार्कटिका में इतना बड़ा उल्कापिंड बहुत ही दुर्लभ है।' उनके मुताबिक 'शुरू में यह बहुत ही साधारण कॉन्ड्राइट जैसा लग रहा था। इस तरह के उल्कापिंड क्षुद्र ग्रहों के बेल्ट से आते हैं और अंटार्कटिका की ब्लू आइस में आकर गिर गए, खोजे जाने से पहले हजारों-हजार साल तक बर्फ में इंतजार करते रहे। यह पृथ्वी पर पाई जा सकने वाली सबसे पुराने पदार्थ से संबंधित है और धरती के निर्माण खंड के समान है।'

पृथ्वी की उत्पत्ति की मिल सकती है जानकारी
इस तरह के उल्कापिंड की खोज का मतलब माना जा रहा है कि अब वैज्ञानिक यह पता लगा सकते हैं कि पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ था। एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक ये उल्कापिंड नीली बर्फ में पाए गए। इन्हें किसी वैज्ञानिक ने हाथ नहीं लगाया और सीधे प्लास्टिक बैग में डाल लिया ताकि दूषित ना हो जाएं। मारिया ने आगे विस्तार से जानकारी दी कि उन्हें यह कैसे पता चला कि यह उल्कापिंड तो दुर्लभ है।
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पृथ्वी से है इस उल्कापिंड का नाता ?
इस मिशन में दुर्लभ उल्कापिंड की खोज के बारे में वैज्ञानिक का कहना है कि 'उल्कापिंडों को पहले उनको देखकर पहचान की गई थी- हमारे बड़े वाले उल्कापिंड में एक बहुत ही खास गहरा फ्यूजन क्रस्ट है, जो पृथ्वी पर चट्टान के गिरने के समय बनता है। इससे उल्का बनता है, जिसमें चट्टान की ऊपरी सतह aerodynamical घर्षण के चलते गर्म होकर पिघल जाती है। हमने इस चट्टान के चुंबकीय गुणों की जांच के लिए एक हाथ वाले टूल का भी उपयोग किया है।' (आखिरी तीनों ही तस्वीरें- प्रतीकात्मक) (इनपुट-एजेंसियां)












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