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फ्रांस में एक किताब से भूचाल, घर में बच्चों के यौन उत्पीड़न पर छिड़ी बहस, मैक्रों बोले- लाएंगे कड़े कानून

Child Abuse In France: पेरिस। #metooinceste, मी टू इनसेस्टे यानि मेरे साथ भी दुराचार हुआ। ये हैशटैग पिछले कुछ दिनों से फ्रांस की सोशल मीडिया पर तेजी से छाया हुआ है। इसके जरिए बहुत सारे लोगों ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर रखी तो पूरा फ्रांस हिल उठा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी ट्वीट कर और वीडियो के जरिए लोगों को भरोसा दिलाने सामने आना पड़ा।

फ्रांस में बाल यौन उत्पीड़न पर आक्रोश

फ्रांस में बाल यौन उत्पीड़न पर आक्रोश

Incest का इस्तेमाल घर में किसी सदस्य के हाथों यौन उत्पीड़न के लिए होता है। पिछले सप्ताह फ्रांस में यह शब्द सोशल मीडिया की सनसनी बन गया जब देश भर में सैकड़ों लोगों ने अपने साथ बचपन में हुए यौन उत्पीड़न की घटना के बारे में खुलकर लिखना शुरू किया। बचपन में हुए यौन उत्पीड़न की कहानी कहने के लिए लोगों ने #metooinceste हैशटैग का इस्तेमाल किया।

इस सबकी शुरुआत हुई एक किताब से जिसमें फ्रांस के चर्चित राजनीतिक टिप्पणीकार और संविधान विशेषज्ञ के ऊपर अपने सौतेले बेटे का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मीटू इनसेस्टे हैशटैक के साथ लोगों ने अपनी कहानियों को लिखना शुरू किया।

सोशल मीडिया पर इन कहानियों के आने के बाद फ्रांस में लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे। इन सवालों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सामने आए और कहा कि फ्रांस बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर कानूनों को और सख्त करेगा।

मैक्रों बोले- 'हम आप पर भरोसा करते हैं'

मैक्रों बोले- 'हम आप पर भरोसा करते हैं'

शनिवार को मैक्रों ने ट्वीट कर कहा कि फ्रांस को बच्चों को यौन हिंसा से बेहतर तरीके से बचाने के लिए अपने कानूनों में सुधार की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने न्याय मंत्री से इस पर विधेयक बनाने के लिए एक कमेटी के साथ मिलकर सुझाव तैयार करने को कहा है। मैक्रों ने लिखा 'हम हमलावरों को नहीं छोड़ेंगे।'

पीड़ितों को भरोसा देते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा "आज शर्मिंदगी अपना पाला बदल रही है।" मैक्रों कह रहे थे कि अब पीड़ित नहीं अपराधी को शर्म करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने लोगों के खुलकर लिखने का स्वागत करते हुए कहा "लोग फ्रांस में हर जगह इस पर खुलकर बात कर रहे हैं।"

मैक्रों ने आगे कहा "हम यहां हैं। हम आपको सुन रहे हैं। हम आप पर भरोसा करते हैं। और आप फिर कभी अकेले नहीं रहेंगे।"

बच्चों के कोर्स में भी जोड़े जाने की तैयारी

बच्चों के कोर्स में भी जोड़े जाने की तैयारी

मैक्रों ने कहा कि हमने पहले ही उत्पीड़न के लिए शिकायत की सीमा को बढ़ाकर 30 साल कर दिया है। इसके साथ ही बच्चों के साथ काम करने वाले लोगों पर निगरानी भी कड़ी कर दी है लेकिन हमें इस बारे में और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

इसके साथ ही फ्रांस प्राइमरी और सेकंडरी स्कूलों में बच्चों को पारिवारिक उत्पीड़न के बारे में जानकारी देने के लिए उनके कोर्स में भी इसे जोड़े जाने की तैयारी की जा रही है जिससे बच्चों के साथ इसके अनुभवों को साझा किया जा सके। राष्ट्रपति मैक्रों ने इसके साथ ही पीड़ितों के लिए मनौवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही।

क्या था किताब में ?

क्या था किताब में ?

इस हैशटैग की शुरुआत एक किताब से हुई जिसमें फ्रांस के प्रोफेसर और संविधान विशेषज्ञ ओलिवर दुहामेल के ऊपर सौतेले बेटे के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। इस किताब को दुहामेल की सौतेली बेटी कैमिली काउचनल ने लिखा है जो कि पूर्व विदेश मंत्री और डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (MSF) नामक एनजीओ की स्थापना करने वाले बर्नार्ड काउचनर की बेटी हैं।

इस किताब के छपने के बाद हंगामा मच गया। किताब में छपी घटनाओं के चलते दुहामेल ने इस महीने की शुरुआत में ही फ्रांस की टॉप यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा "अपने ऊपर हो रहे व्यक्तिगत हमलों और जिस संस्थान में मैं काम कर रहा हूं उसे सुरक्षित रखने के लिए मैं अपना काम समाप्त कर रहा हूं।"

हालांकि 1980 की बताई जा रही इस घटना पर न तो दुहामेल और न ही उनके वकील ने अभी तक कोई बयान दिया है।

हर 5 से एक बच्ची उत्पीड़न का शिकार

हर 5 से एक बच्ची उत्पीड़न का शिकार

फ्रांस के उच्च शिक्षा मंत्री फ्रेडरिक विडाल ने जिम्मेदारियों और संभावित विफलताओं को निर्धारित करने के लिए राजनीति विज्ञान विभाग में जांच करने का आदेश दिया है।

बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न पूरी दुनिया में चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन के मुताबिक दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र की हर पांच से एक लड़की और हर 13 में से एक लड़का यौन उत्पीड़न का शिकार होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के साथ होने वाला यौन उत्पीड़न सबसे कम रिपोर्ट किया जाता है। कई बार बच्चे खुद भी इन बारे में झिझक के चलते कह नहीं पाते जबकि कुछ मामलों में परिजन जानने के बाद भी मामलों को छिपाने की कोशिश करते हैं। कई बार ये पाया गया है कि उत्पीड़न करने वाला परिवार या फिर निकट का संबंधी ही होता है।

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