सूरज से फूटकर निकला पृथ्वी से 20 गुना बड़ा हिस्सा, करोड़ों मील की रफ्तार से निकला तूफान, कितना खतरनाक?
शोधकर्ता के मुताबिक सौर तूफान को लेकर हमारी जानकारी कम है और हमारे पास इससे संबंधित डेटा की कमी है, जिसक कारण ये कितना खतरनाक हो सकता है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।

Giant hole in Sun: पृथ्वी से 20 गुना बड़ा एक विशालकाय हिस्सा सूर्य में फूट गया है और वो काफी तेजी से हमारे प्लानेट की तरफ बढ़ रहा है। पिछले एक हफ्ते में ये दूसरा मौका है, जब सूरज के सतह पर विशालकाय छेद दिखाई दे रहा है। सूरज के फूटने की वजह से एक महाविशालकाय 'कोरोनल होल' का निर्माण हुआ है, और एक पृथ्वी से गई गुना बड़ा आग का गोला सूरज से निकला है, जो 1.8 मिलियन-मील-प्रति-घंटे की रफ्तार से हमारी तरफ बढ़ रहा है। आग का विशालकाय गोला, जिसे सौर हवा कहा जाता है, उसके बारे में आशंका है, कि वो शुक्रवार तक धरती को प्रभावित कर सकता है।
सूरज के फूटने का असर क्या होगा?
वैज्ञानिक यह देखने के लिए सूरज और सौर हवाओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, कि क्या सौर हवाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, सैटेलाइट्स और धरती पर मौजूद टेक्नोलॉजी को भी प्रभावित करेंगी। 23 मार्च को देखा गया पहला छेद, पृथ्वी के आकार का 30 गुना है, और इससे लगातार सौर हवा निकल रही है, जो दक्षिण में एरिजोना क्षेत्र में आश्चर्यजनक अरोराओं को ट्रिगर करता है। आपको बता दें, कि अरोरा सौर हवाओं की वजह से बनता है और अरोरा के दौरान आकाश में काफी चमकीली रोशनी दिखाई पड़ती है। वहीं, सूरज पर बना दूसरा छेद पृथ्वी के आकार का 20 गुना है, जिससे 1.8 मिलियन मील प्रति घंटे की रफ्तार से सौर हवा का उत्सर्जन हो रहा है। इन दोनों छिद्रों को नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी द्वारा कैप्चर किया गया है, जो सूर्य का अध्ययन करता है। नासा ने कहा है, कि 'कोरोनल होल चुंबकीय रूप से खुले क्षेत्र हैं, जो उच्च गति वाली सौर हवा का निर्माण स्रोत हैं।' नासा ने कहा, कि 'अत्यधिक पराबैंगनी प्रकाश के कई तरंग दैर्ध्य में देखे जाने पर वे काले दिखाई देते हैं और सौर वायु पृथ्वी पर उच्च अक्षांशों पर औरोरा उत्पन्न कर सकती है।' हालांकि, सूरज की ये तस्वीरें देखने पर खतरनाक लग सकती हैं, लेकिन पृथ्वी के लिए ये फिलहाल उतनी खतरनाक नहीं हैं।

पृथ्वी से टकराने की आशंका
वैज्ञानिकों का कहना है कि, पृथ्वी का वायुमंडल हम मनुष्यों को इन सोलर तूफानों के कणों से बचाता है। लेकिन वे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ इटरेक्ट कर सकते हैं और पृथ्वी की सतह पर मौजूद मजबूत विद्युत धाराओं को प्रेरित कर सकते हैं, जिसकी वजह से मानव निर्मित संरचनाओं जैसे उपग्रहों, पावर ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं और यहां तक कि हमारे इंटरनेट कनेक्शन को भी बाधित कर सकते हैं। कोरोनल छिद्र सूर्य में बनने वाला एक सामान्य विशेषता है, हालांकि वे अलग-अलग स्थानों पर दिखाई देते हैं। वे आम तौर पर अधिक सामान्य होते हैं जब सूर्य अपने 11 साल के चक्र में कम सक्रिय बिंदु पर होता है। आपको बता दें कि, सौर तूफान को लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निंया की वैज्ञानिक संगीता अब्दू ज्योति ने पिछले दिनों बताया था कि, आने वाल भविष्य में धरती को बड़े सौर तूफान का सामना करना पड़ सकता है। सौर तूफान का मतलब सूरज से निकलने वाला कोरोनल मास है, जो बेहद नुकसानदायक और प्रयलकारी साबित हो सकता है।
क्या होते हैं भू-चुंबकीय तूफान?
सूरज से निकलने वाले तूफान के ये कण जब पृथ्वी के चुंबकमंडल में गड़बड़ी पैदा करते हैं, तो इसे भू-चुंबकीय तूफान कहा जाता है। हालांकि, SWPC की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस तूफान का हमारी तकनीक पर प्रभाव नाममात्र का होगा। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने समझाया कि, ''पूर्ण प्रभाव का आकलन करना मुश्किल है। हम औरोरा देखने की उम्मीद कर रहे हैं। आयनोस्फीयर में धाराओं के इंजेक्शन की उम्मीद की जाती है, जो बदले में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में उतार-चढ़ाव को प्रेरित करेगा''। आपको बता दें कि, औरोरा एक तरह का बड़े सौर ऊर्जा की तरह प्रकाश पूंज होते हैं, जो आपने अकसर आसमान में देखा होगा। इसकी वजह से आपको काफी देर तक आसमान में अलग अलग प्रकाशपूंज दिखाई दे सकते हैं, और ये नजारा धरती से देखने पर दिवाली जैसा हो सकता है।

सैटेलाइट पर कितना पड़ेगा असर?
अक्टूबर 2021 में भी इसी तरह का तूफान उठा था और उस वक्त दिब्येंदु नंदी ने कहा था कि, इस वजह से सोलर नेटवर्क और वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली रिसीवर में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन "हम उम्मीद करते हैं कि कोरोनल मास इजेक्शन (सूर्य के कोरोना से चुंबकीय प्लाज्मा का निष्कासन) मध्यम गति से होगा, इसलिए ये संभावनाएं कम हैं।" प्रोफेसर नंदी आईआईएसईआर कोलकाता में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया का हिस्सा हैं, जिसने उस सौर चमक की भविष्यवाणी की थी। वो एक X1-क्लास सोलर फ्लेयर था, जो 28 अक्टूबर 2021 को सूरज में तूफान के बाद उत्पन्न हुआ था। आपको बता दें, कि सोलर फ्लेयर्स के लिए वर्गीकरण प्रणाली A, B, C, M और X अक्षरों का उपयोग करती है।

1989 में आया था सोलर तूफान
इस सोलर तूफान का पृथ्वी पर क्या असर होगा, इसका पता तो बाद में चलेगा, लेकिन इससे पहले 1989 में सूरज से निकला तूफान पृथ्वी से टकराया था, जिसका काफी असर कनाडा पर पड़ा था। उस वक्त कनाडा के क्यूबेक शहर में करीब 12 घंटे के लिए बिजली गायब हो गई थी और लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। वहीं, उससे पहले 1959 में अभी तक का सबसे बड़ा और शक्तिशाली तूफान जिओमैग्नेटिक पृथ्वी से टकराया था, जिसने अमेरिका के टेलीग्राफ नेटवर्क को पूरी तरह से तबाह कर दिया था और उन नेटवर्क में काम करने वाले कर्मचारियों ने बिजली का काफी तेज झटका महसूस किया था। वहीं, सोलर तूफान की वजह से नार्दर्न लाइट इतनी तेज हो गई थी कि रात के करीब 12 बजे दिन जितनी रोशनी हो गई थी। ये रोशनी इतनी ज्यादा थी, कि लोग उसमें अखबार तक पढ़ पा रहे थे।












Click it and Unblock the Notifications