Marwan Barghouti: वो फिलीस्तीनी नेता जिससे डरता है इजरायल, 23 सालों से कैद में, फिर क्यों अचानक चर्चा में?
Marwan Barghouti: 25 जनवरी 2012 को यरूशलम की एक अदालत में पेशी के दौरान फतह के वरिष्ठ नेता मारवान बरगौती ने मीडिया के सामने हाथों से विक्टरी का साइन बनाकर दिखाया था। यह तस्वीर आज भी उनकी अटूट लोकप्रियता का प्रतीक है। गाजा और वेस्ट बैंक के इलाकों में इस फोटो की कई पेंटिंग्स दीवारों पर दिख जाएंगी। जो बताता है कि बारगौती अब भी फिलिस्तीनियों के बीच सबसे लोकप्रिय और संभावित भविष्य के नेताओं की दौड़ में कहां हैं।
सीजफायर डील में बरगौती का नाम नहीं
वर्तमान में इज़रायल द्वारा हमास के साथ हुए नए गाज़ा सीजफायर समझौते के तहत जिन कैदियों को रिहा करने की योजना है, उनमें बरगौती शामिल नहीं हैं। इज़रायल ने अन्य प्रमुख कैदियों को भी रिहा करने से इनकार कर दिया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जारी की गई लगभग 250 कैदियों की सूची अंतिम थी या नहीं।

हमास बरगौती की रिहाई पर अड़ा
हमास के वरिष्ठ अधिकारी मौसा अबू मरज़ौक ने अल जज़ीरा से कहा कि संगठन बरगौती और अन्य प्रमुख हस्तियों की रिहाई पर जोर दे रहा है और इस पर मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है।इज़रायल बरगौती को एक आतंकवादी नेता मानता है। 2004 में इज़रायल में हुए हमलों के सिलसिले में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें कई आजीवन कारावास की सज़ा मिली थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी।
फिलीस्तीनियों के नेल्सन मंडेला बरगौती
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इज़रायल बरगौती से इसलिए भी डरता है क्योंकि वे दो-राज्य समाधान के समर्थक होते हुए भी सशस्त्र प्रतिरोध का समर्थन करते हैं। वे फिलिस्तीनियों के लिए एक एकजुटता का प्रतीक बन सकते हैं। कई फिलिस्तीनी बरगौती को अपना 'नेल्सन मंडेला' मानते हैं।
सीज फायर और कैदियों की रिहाई
गाजा में सीजफायर और इज़रायली सेना की वापसी के बाद, हमास सोमवार तक लगभग 20 जीवित इज़रायली बंधकों को रिहा करेगा, जबकि इज़रायल लगभग 250 फिलिस्तीनियों को मुक्त करेगा। इसके अलावा, पिछले दो सालों में गाज़ा से पकड़े गए लगभग 1,700 लोगों को भी बिना किसी आरोप के हिरासत में रखा गया है।
कैदी- आतंकवादी या फ्रीडम फाइटर?
इज़रायली जनता इन कैदियों को आतंकवादी मानती है, जबकि कई फिलिस्तीनी उन्हें राजनीतिक कैदी या स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं जो दशकों के सैन्य कब्जे के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।अधिकांश रिहा कैदी हमास और फतह गुट से हैं, जिन्हें 2000 के दशक में गिरफ्तार किया गया था। इनमें से कई को गोलीबारी या बम धमाकों में शामिल पाया गया था। सूची के अनुसार, आधे से अधिक कैदियों को बाहर भेजा जाएगा।
दूसरा इंतिफादा और इजरायलियों की मौत
2000 के दशक में शुरू हुआ दूसरा इंतिफादा सालों की असफल शांति वार्ताओं के बाद भड़का फिलिस्तीनी विद्रोह था। इस विद्रोह में सैकड़ों इज़रायली मारे गए और इज़रायली सेना ने हजारों फिलिस्तीनियों को मौत के घाट उतारा।
16 से 64 साल तक के कैदी
सबसे पुराने कैदी समीर अबू ना'मा (64 वर्ष) हैं, जिन्हें 1986 में गिरफ्तार किया गया था। वहीं सबसे युवा मोहम्मद अबू क़ातिश हैं, जिन्हें 16 वर्ष की आयु में चाकू मारने के प्रयास के आरोप में कैद किया गया था।
हमास की बरगौती पर लगातार मांग
हमास ने बार-बार इज़रायल से बरगौती की रिहाई की मांग की है। लेकिन इज़रायल इस पर अड़ा रहा है, खासकर 2011 की उस घटना के बाद जब उसने हमास नेता याह्या सिनवार को रिहा किया था - जो बाद में 7 अक्टूबर, 2023 के हमले का मास्टर माइंड बनकर सामने आया।
बरगौती: अब्बास के संभावित उत्तराधिकारी
66 साल के मारवान बरगौती को व्यापक रूप से राष्ट्रपति महमूद अब्बास के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। सर्वे लगातार दिखाते हैं कि वे सबसे लोकप्रिय फिलिस्तीनी नेता हैं। 1959 में वेस्ट बैंक के कोबार गांव में जन्मे बरगौती ने बीर ज़ीट विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान इज़रायली कब्जे के खिलाफ छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया। वे पहले इंतिफादा (विद्रोह की लड़ाई) (1987) में एक आयोजक के रूप में उभरे और बाद में वेस्ट बैंक लौटे।
दूसरे इंतिफादा में गिरफ्तार
दूसरे इंतिफादा के दौरान, इज़रायल ने उन पर अल-अक्सा शहीद ब्रिगेड से जुड़ा होने का आरोप लगाया। बरगौती ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि फिलिस्तीनियों को वापस लड़ने का अधिकार है।
'मैं आतंकवादी नहीं हूं, पर शांतिवादी भी नहीं'
2002 में द वाशिंगटन पोस्ट में बरगौती ने लिखा, "मैं आतंकवादी नहीं हूं, लेकिन मैं शांतिवादी भी नहीं हूं।" जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया गया और इज़रायली अदालत ने पांच आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। 2021 में उन्होंने संसदीय चुनावों के लिए सूची दर्ज की जो बाद में रद्द कर दी गई। उन्होंने जेल में 1,500 से अधिक कैदियों के साथ 40 दिन की भूख हड़ताल का नेतृत्व भी किया था।
बरगौती पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
फिलीस्तीन पर गहन अध्ययन करने वाले एक्सपर्ट मोइन रब्बानी के अनुसार, बरगौती फिलिस्तीनी विभाजनों के बीच पुल बनाने में सक्षम हैं और उन्हें एक विश्वसनीय राष्ट्रीय नेता माना जाता है।रब्बानी का कहना है कि इज़रायल बरगौती की लोकप्रियता से डरता है क्योंकि उसकी नीति फिलिस्तीनियों को विभाजित रखना है। वहीं अब्बास खुद भी उनकी रिहाई से असहज हैं।
बची रही साफ छवि
तेल अवीव विश्वविद्यालय के उप-रेक्टर एयाल ज़िसर के अनुसार, बरगौती अब्बास की सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार से अछूते हैं। उनकी लोकप्रियता फिलिस्तीनी संस्थानों को मजबूत कर सकती है - जो इज़रायल की दक्षिणपंथी सरकार को मंजूर नहीं।
जेल में आखिरी बार देखा गया 'लोगों का नेता'
बरगौती को आखिरी बार अगस्त में देखा गया था जब इज़रायल के सुरक्षा मंत्री इटामार बेन-गवीर ने जेल में उनसे मुलाकात की और चेतावनी दी कि "जो देश के खिलाफ काम करेगा, उसे मिटा दिया जाएगा।"
क्या बाहर आएगा बरगौती?
मारवान बरगौती आज भी फिलिस्तीनियों के लिए आशा और संघर्ष का प्रतीक हैं। जेल की दीवारों के पीछे रहते हुए भी उनकी छवि एक एकजुट फिलिस्तीन और लोकतांत्रिक भविष्य की लड़ाई का चेहरा बनी हुई है। लेकिन अब उसके बाहर आने की आस कम ही बची है, फिर भी हमास की तरफ से उसकी रिहाई के लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है।
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