बेकार गई पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों की शहादत, इमरान सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक से किया समझौता
इमरान खान सरकार ने कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से समझौता कर लिया है और उसे चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी गई है।
इस्लामाबाद, नवंबर 03: पाकिस्तान में दसियों पुलिसवालों की शहादत बेकार हो गई है, क्योंकि पाकिस्तान की सरकार ने प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक के ना सिर्फ सैकड़ों समर्थकों को जेल से रिहा कर कर दिया है, बल्कि टीएलएपी के साथ हुई नई डील के तहत इमरान खान ने टीएलपी को चुनाव लड़ने की भी इजाजत दे दी है। प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी के साथ इमरान सरकार ने समझौता कर लिया है, बावजूद इसके कि टीएलपी ने पाकिस्तान के कम से कम 7 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।

टीएलपी के आगे इमरान ने रगड़े नाक
टीएलपी के सैकड़ों समर्थकों को पाकिस्तानी जेल से रिहा कर दिया गया है और अब इमरान खान की अगुवाई वाली सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के साथ हिंसक झड़पों को समाप्त करने के लिए समझौते को अंजाम दे दिया है। पाकिस्तानी न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएलपी ने पाकिस्तान के कम से कम 7 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी और कई पुलिसकर्मियों को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान का एक इस्लामी मजहबी कट्टरपंथी संगठन है, जो अपने पार्टी प्रमुख साद रिजवी की रिहाई की मांग को लेकर महीनों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है, जिसे इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। इस संगठन की प्रमुख मांग फ्रांस के साथ सभी राजनीतिक संबंध खत्म करने और फ्रांसीसी सामानों का बहिष्कार करना है।

इमरान सरकार की नाक में दम
तहरीक-ए-लब्बैक वही समूह है, जिसने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा पैगंबर मोहम्मद को चित्रित करने वाले कार्टूनों को फिर से प्रकाशित करने के लिए एक चार्ली हैब्दो पत्रिका के अधिकार का बचाव करने के बाद फ्रांस विरोधी विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था। समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक, ''मंगलवार को पाकिस्तान की जेलो में बंद करीब 860 टीएलपी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया है, उन्हें सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की धाराओं में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान के पंजाब गृह विभाग ने एक बयान में कहा कि, उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन के अन्य बंदी जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज (एफआईआर) है, उन्हें अदालतों से जमानत लेनी होगी।

चारों तरफ से घिर गई थी राजधानी
पिछले हफ्ते हजारों टीएलपी समर्थकों ने पूर्वी शहर लाहौर से राजधानी इस्लामाबाद तक मार्च शुरू कर दिया था और प्रदर्शनकारी इस रास्तो को बंद करने से पहले लगभग एक तिहाई रास्ते पर कब्जा जमा चुके थे। हालांकि, वजीराबाद शहर के पार्कों में अभी भी तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन चल रहा है और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता रास्तों को जाम कर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, वे तब तक अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे जब तक कि पाकिस्तान सरकार उनके समझौते की 50 प्रतिशत शर्तों को पूरा नहीं करती।

तालिबान के हैं समर्थक
आपको बता दें कि, तहरीक-ए-लब्बैक विचारधारा के आधार पर तालिबान का समर्थन करता है और पाकिस्तान में भी उसी तरह का शासन लाना चाहता है, जैसा शासन तालिबान अफगानिस्तान में लाना चाहता है और सबसे हैरत की बात ये है कि, तहरीक-ए-लब्बैक को पाकिस्तान में अच्छा खासा समर्थन हासिल है और पिछले चुनाव में इस पार्टी को करीब 30 लाख से ज्यादा वोट मिले थे और इतनी संख्या किसी भी सरकार को घुटने पर लाने के लिए काफी होती है, खासकर अगर ये संख्या कट्टरपंथी विचारधारा के हों।

सरकार को धमकी
तहरीक-ए-लब्बैक के मुफ्ती मुनीब रहमान ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि, "अगर पार्टी के कार्यकर्ताओं या नेताओं की कोई और गिरफ्तारी होती है, तो सरकार के साथ समझौता रद्द कर दिया जाएगा।" मुनीब ने यह भी कहा कि, "अगर सरकार समझौते के संबंध में गंभीर नहीं दिखती है, तो उसे और अधिक सशक्त विरोध आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।" टीएलपी और पाकिस्तान सरकार के बीच सौदे के बारे में अभी तक ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। प्रतिबंधित संगठन के साथ बातचीत करने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर, संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मोहम्मद खान और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल थे।












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