मंगल ग्रह सदियों से है 'बंजर'! क्यों नहीं है इस 'रहस्यमयी' ग्रह पर जीवन? उठ गया रहस्य से बड़ा पर्दा

पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी पर ही जीवन है। हालांकि, एलियंस की खबरें अन्य ग्रहों पर जीवन होने की आशा को मजबूती प्रदान करता है। अगर एलियन के वजूद को एक परियों की कहानी, एक कल्पना मानकर नजरअंदाज भी करते हैं तो धरती से मिलता जुलता मंगल ग्रह पर कभी जीवन था या नहीं, अभी भी शोध का विषय बना हुआ है। लेकिन लग रहा है कि अब यहां भी उम्मीद खत्म होती दिख रही है। इसको लेकर एक रिसर्च में दावा किया गया है कि मंगल ग्रह पर जीवन था ही नहीं। अब हम यह अवश्य जानना चाहेंगे कि आखिर वह क्या वजह रही होगी जिसके कारण रहस्यमयी ग्रह मंगल पर जीवन समाप्त हो गया। कहते हैं कि पुरातन मंगल ग्रह पर कभी सूक्ष्मजीवन ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change on Mars) का ऐसा दौर ला दिया था जिससे लाल ग्रह पर जीवन ही समाप्त हो गया था।

मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर रहस्य से उठा पर्दा

मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर रहस्य से उठा पर्दा

रहस्यमयी मंगल ग्रह जिसे हम लाल ग्रह के नाम से भी जानते हैं, पर्सिवरेंस रोवर (Perseverance rover) इस ग्रह की सतहों से नमूने इकट्ठे कर रहा है। हाल ही में एक नई शोध से पता चला है कि प्राचीन काल में मंगल ग्रह की सतह पर ऐसा वातावरण रहा होगा, जिसने सूक्ष्य जीवों (Microbes) को पनपने में मदद की हो। नए शोध में पता चला है कि मंगल ग्रह पर प्राचीन माइक्रोबियल जीवन जलवायु परिवर्तन के माध्यम से लाल ग्रह के वातवरण को समाप्त कर सकता था, जो अंतत:इसके वातावरण को समाप्त करने का कारण बना।

मंगल पर जलवायु परिवर्तन की मार

मंगल पर जलवायु परिवर्तन की मार

नई शोध हैरान करने वाली है। हम जिस जलवायु परिवर्तन की बात आज पृथ्वी के लिए कर रहे हैं, उसी जलवायु परिवर्तन के चलते मंगल ग्रह पर जीवन असंभव हो गया था। माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मंगल ग्रह का जीवन प्रभावित हुआ था। इसी प्रभाव के वजह से मंगल पर आज तक जीवन संभव नहीं हो पाया है। एक नई रिसर्च के मुताबिक ग्रीन हाउस गैस इफेक्ट की वजह से यह असर हुआ है।

पहले जीवन पनप सकता था

पहले जीवन पनप सकता था

नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में 10 अक्टूबर को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार,करीब 3.7 से 4.1 अरब साल पहले मंगल के शुरुआती दिनों का वातावरण, जीवन के लिए अनुकूल था। हाइड्रोजन पर जीवित रहने वाले मीथेन का उत्सर्जन करने वाले सामान्य रोगाणु मंगल पर करीब 370 करोड़ साल पहले पनपे हो सकते हैं। ठीक इसी तरह के रोगाणु आज धरती पर मौजूद हैं। हालांकि ये मंगल ग्रह के लिए सही साबित नहीं हुआ और इसका प्रभाव उल्टा पड़ गया। शोध के मुताबिक मंगल के वातावरण की बात की जाए तो यहां ज्यादा मीथेन का उत्सर्जन हुआ होगा।

मंगल ग्रह सदियों से बंजर है

मंगल ग्रह सदियों से बंजर है

वहीं फ्रांसीसी वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्राचीन माइक्रोब्स ही मंगल पर हिमयुग लाने में सहायक बने होंगे। हम इसे जलवायु परिवर्तन के संकेत का पहला सबूत मान सकते हैं। शायद इसी वजह आज भी मंगल ग्रह सदियों से बंजर है और यहां जीवन का नामोनिशान नहीं है। जानकारी के अनुसार, आज मंगल ग्रह जहां पर काफी ठंड है , कभी परिस्थितियों की तुलना में काफी गर्म रहा होगा। शायद वहां पर उस वक्त हाइड्रोजन काफी मात्रा में थी। ऐसी स्थिति में रोगाणुओं को भरपूर भोजन की आपूर्ति हुई होगी। हालांकि, जलवायु परिवर्तन की वजह से मंगल ग्रह की स्थिति भी बदल गई। अब मंगल पर जीवन नहीं है। हालांकि, आगे भी इस विषय पर शोध जारी रहेंगे।

(Photo Credit : Twitter)

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