रूस की सेना से डिस्चार्ज किए गये कई भारतीय.. विदेश मंत्रालय की दखल के बाद रिहाई, जबरदस्ती लड़वाया जा रहा युद्ध
Russia-India News: भारत के विदेश मंत्रालय ने सोमवार (26 फरवरी) को कहा है, कि नई दिल्ली के लगातार हस्तक्षेप के बाद कई भारतीयों को रूसी सेना से छुट्टी दे दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया उन मीडिया रिपोर्टों के बीच आई हैं, जिनमें दावा किया गया था, कि रूसी सेना में भारतीयों को जबरदस्ती यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़वाया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि काम दिलाने के बहाने कई भारतीयों को रूस ले जाया गया, और फिर उन्हें जबरदस्ती युद्ध में धकेला गया है, जिसमें एक भारतीय की मौत भी हुई है। इन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद ही विदेश मंत्रालय हरकत में आ गया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय का आया बयान
भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह स्वीकार किया है, कि कई भारतीयों ने रूसी सेना में सेवा की है और वर्तमान में भी कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "एक एक केस को मॉस्को स्थिति भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों के ध्यान में लाया है और विदेश मंत्रालय के पास भी जो भी ऐसे मामले आए हैं, उनकी जानकारी नई दिल्ली स्थिति रूसी दूतावास को दी गई है। जिसका असर ये हुआ है, कि कई भारतीयों को पहले ही डिस्चार्ज कर दिया गया है।"
बयान में आगे कहा गया है, कि "हम रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ सभी प्रासंगिक मामलों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ प्रतिबद्ध हैं।"
इससे पहले, एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम जानते हैं कि कुछ भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना में सहायक नौकरियों के लिए साइन अप किया है। हम सभी भारतीय नागरिकों से उचित सावधानी बरतने और इस संघर्ष से दूर रहने का आग्रह करते हैं।"
क्या है रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का मामला?
आपको बता दें कि हाल ही में रूस में भारतीय नागरिकों संग ठगी के मामले सामने आए थे। रूस में काम की तलाश में गए लोगों को धोखे से यूक्रेन जंग में भेज दिया गया है। ऐसे लोगों के परिजनों के मुताबिक रूसी कंपनियों ने इन भारतीयों को हेल्पर के तौर पर काम करने के लिए नियुक्त किया था।
इसके बाद इन्हें रूस की प्राइवेट आर्मी कही जाने वाले वैगनर ग्रुप में भर्ती करवा दिया गया और यूक्रेन संग जंग में लड़के के लिए जंग के मैदान में भेज दिया गया। तेलंगाना के नारायणपेट जिले के रहने वाले 22 साल के मोहम्मद सूफियान और कर्नाटक के कालाबुरागी के रहने वाले तीन अन्य भारतीयों ने अपने घरवालों को मैसेज भेजा था। जिससे इस मामले का खुलासा हुआ।
सुफियान ने एक रूसी सैनिक के मोबाइल से अपने परिवार को एक वीडियो भेजा था जिसमें वह सेना की ड्रेस में दिखाई दे रहा था। उसने दावा किया कि वे धोखाधड़ी का शिकार हो गया है।
सूफियान ने कहा कि वह यूक्रेन बॉर्डर से 40 किलोमीटर दूर है। उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ जंग के मैदान में भेजा गया है। उन्हें धोखा दिया गया। सूफियान ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। सूफियान ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर भारत लौटना चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा माना जा रहा है कि 60 अन्य भारतीयों को भी झांसा देकर वैगनर आर्मी में शामिल किया गया है। महाराष्ट्र के एक आदमी ने इन लोगों से एक कॉन्ट्रैक्ट पेपर पर साइन करवाए थे। कॉन्ट्रैक्ट रूसी भाषा में लिखा था। साइन लेते समय इन लोगों से कहा गया कि वे रूस में हेल्पर की नौकरी से जुड़े पेपर पर साइन कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि मॉस्को में भारतीय दूतावास नियमित रूप से संबंधित रूसी अधिकारियों के साथ उनके "शीघ्र निर्वहन" के लिए इस मामले को उठाता रहा है।












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