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मनीष तिवारी ने खोली पोल, पाकिस्तान पर कांग्रेस का 'डबल गेम'? क्यों 'कमजोर' पड़े मनमोहन सिंह?

क्या 26/11 के तत्कालीन मनमोहन सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ उस तरह की कार्रवाई नहीं की, जिस तरह की कार्रवाई उसे करनी चाहिए थी। मनीष तिवारी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया है।

नई दिल्ली, नवंबर 23: क्या मनमोहन सिंह की सरकार में कांग्रेस ने पाकिस्तान को लेकर भारत देश के साथ 'डबल गेम' खेला है? क्या मुंबई हमला होने के बाद पाकिस्तान पर जिस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए थी, उस तरह की कार्रवाई कांग्रेस ने 'जान-बूझकर' नहीं की? ये तमाम सवाल असल में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी की लिखी किताब के बाद उठ रहे हैं। मनीष तिवारी ने अपनी किताब में कांग्रेस को पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिसके बाद ना सिर्फ बीजेपी आक्रामक है, बल्कि असल सवाल ये है, कि क्या कांग्रेस का देशप्रेम वोटबैंक की राजनीति के सामने छोटा पड़ गया?

पाकिस्तान के सामने मनमोहन सिंह 'कमजोर'

पाकिस्तान के सामने मनमोहन सिंह 'कमजोर'

मनमोहन सिंह की सरकार में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रह चुके मनीष तिवारी ने एक किताब लिखी है, दिसका नाम '10 फ्लैश पॉइंट: 20 ईयर्स - नेशनल सिक्योरिटी सिचुएशन देट इम्पैक्ट इंडिया' है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर मनीष तिवारी ने कई गभीर सवाल उठाए हैं। खासक 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए हमले को लेकर मनमोहन सिंह की सरकार पर गंभीर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गये है। मनीष तिवारी ने अपनी किताब में मुंबई हमले का जिक्र करते हुए लिखा है कि, ''मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी और वो एक ऐसा समय था, जब एक्शन लेना बिल्कुल जरूरी था।'' यानि मनीष तिवारी ने अपनी किताब में साफ तौर पर कबूल किया है, कि मुंबई हमले के बाद मनमोहन सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ जो कार्रवाई करनी चाहिए थी, वैसी कार्रवाई उन्होंने नहीं की।

कत्लेआम पर खामोशी क्यों?

कत्लेआम पर खामोशी क्यों?

पूर्व केन्द्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अपनी किताब में आगे लिखा है कि, ''एक देश (पाकिस्तान) बेगुनाह लोगों का कत्लेआम करता रहा है और उसे कोई पछतावा नहीं होता है, लेकिन उसकी इस हरकत के बाद भी हम संयम बरतते है, जो हमारी ताकत नहीं, बल्कि हमारी कमजोरी की निशानी है''। मनीष तिवारी ने मुंबई हमले की तुलना अमेरिका में 9 सितंबर 2001 के हमले से की है। आपको बता दें कि, अमेरिका ने हमले के बाद अफगानिस्तान में तहस नहस मचा दी और हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराया था। लेकिन, भारत सरकार ने मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान पर कोई कार्रवाई नहीं की। भारत सरकार की तरफ से कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कड़ी निंदा की गई, जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं, आखिर पाकिस्तान के आगे मनमोहन सरकार ने 'कमजोरी' का प्रदर्शन क्यों किया था?

देश रक्षा में कमजोर क्यों हो गई कांग्रेस?

मुंबई हमले का जिक्र करते हुए मनीष तिवारी ने मनमोहन सिंह की सरकार को कमजोर बताया है और इस किताब के आने के बाद कांग्रेस देश रक्षा के नाम पर बुरी तरह से घिरती नजर आ रही है। वहीं, भीषण आतंकी हमला करने के बाद भी पाकिस्तान पर एक ईंट तक नहीं फेंकने वाली कांग्रेस की तरफ से ऐसे संकेत मिल रहे हैं, कि वो मनीष तिवारी पर कार्रवाई कर सकती है। लेकिन, सवाल ये है कि, आखिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने से किसने रोका था? आखिर एक आतंकी देश के खिलाफ उस वक्त भी मनमोहन सरकार ने एक्शन क्यों नहीं लिया, जबकि वो सैकड़ोंव लोगों की जिंदगी बर्बाद कर चुका था?

कांग्रेस पर बरसी बीजेपी

कांग्रेस पर बरसी बीजेपी

मनीष तिवारी की किताब के बाद अब बीजेपी आक्रामक है और कांग्रेस से सवाल पूछ रही है। बीजेपी ने कांग्रेस से पूछा है कि, आखिर मुंबई हमले के बाद कांग्रेस ने कार्रवाई क्यों नहीं की? मुंबई हमले के बाद आखिर कांग्रेस को पाकिस्तान पर कार्रवाई करने से किसने रोका था? वहीं, बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मनीष तिवारी की किताब को आधार बनाते हुए कहा कि, ये कांग्रेस की विफलता का कबूलनामा है। बीजेपी की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि, 'कांग्रेस की सरकार निठल्ली थी और उसे देश की सुरक्षा की चिंता नहीं थी'। बीजेपी ने कहा कि, ''कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा को दांव पर लगा दिया था''। बीजेपी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मनीष तिवारी की किताब पर जवाब मांगा है और गौरव भाटिया ने सवाल पूछते हुए कहा है कि, आखिर भारतीय सेना को उस वक्त कार्रवाई करने के लिए छूट क्यों नहीं दी गई?

पाकिस्तानी आतंकियों ने किया था मुंबई हमला

पाकिस्तानी आतंकियों ने किया था मुंबई हमला

आपको बता दें कि, 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान के 10 आतंकियों ने समुद्री रास्ते से आकर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आतंकवादी हमला किया था। मुंबई में कई जगहों पर पाकिस्तानी आतंकियों ने गोलीबारी की थी और आतंकियों ने रेलवे स्टेशन, होटल, बार, रेस्टोरेंट, ताज होटल और ओबेरॉय होटल को निशाना बनाया था।र 2008 की रात 9 बजकर 43 मिनट पर आतंकियों ने हमला करना शुरू किया था और 29 नवंबर की सुबह 7 बजे पाकिस्तानी आतंकियों का खूनी खेल खत्म हुआ था। करीब 60 घंटे से ज्यादा वक्त तक मुंबई की सड़कों पर मौत का खेल चलता रहा और आतंकी हमले में 166 लोग मारे गये थे, जबकि 9 आतंकियों को मार गिराया गया। भारत ने एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा था, जिसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई। मुंबई हमले में मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी के 11 जवान शहीद हुए थे।

नहीं रही 1971 वाली कांग्रेस?

नहीं रही 1971 वाली कांग्रेस?

मनीष तिवारी की किताब के बाद हैरानी होती है और मन में सवाल उठते हैं कि, आखिर कांग्रेस वक्त के साथ कितनी बदल गई है, कि उसे देश की सुरक्षा से समझौता करने भी संकोच नहीं हुआ। जबकि, यही एक कांग्रेस 1965 की और 1971 की थी। 1965 की कांग्रेस में लाल बहादुर शास्त्री ने पाकिस्तान को सीधी लड़ाई में बुरी तरह से हराया था और भारतीय सेना लाहौर के पास पहुंच गई थी। वहीं, 1971 की लड़ाई में इंदिरा गांधी का लोहा पूरी दुनिया में माना था। 1971 की कांग्रेस का नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थी, जिन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और पाकिस्तान को ऐसा जख्म दिया, जिसे वो कभी भूल नहीं सकता, जबकि दूसरी कांग्रेस इंदिरा गांधी के पोते राहुल गांधी की है, जिसने इतने बड़े आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की निंदा कर अपना काम पूरा कर लिया। आखिर क्यों?

''कांग्रेस सरकार ने कार्रवाई करने से रोका''

मनीष तिवारी के आरोपों के बाद कांग्रेस घिरी हुई है। वहीं, इंडियन एयरफोर्स के तत्कालीन प्रमुख एसीएम फाली ने भी कहा था कि, मुंबई हमला के बाद इंडियन एयरफोर्स पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकाने पर सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहती थी और इंडियन एयरफोर्स ने इसके लिए तत्कालीन मनमोहन सरकार से इजाजत मांगी थी, लेकिन मनमोहन सरकार ने इंडियन एयरफोर्स को कार्रवाई करने की इजाजत नहीं दी थी। इंडिया टूडे से बात करते हुए एयरफोर्स के तत्कालीन प्रमुख ने इसके पीछे दो वजहों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि, पहली वजह, नेताओं की इच्छाशक्ति होती है और दूसरी वजह शायद हमारे पास अब खुफिया जानकारी ज्यादा मजबूत हो गई है, लिहाजा अब कार्रवाई करना आसान हो गया है।

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