चुनाव जीतते ही चीन समर्थक मोहम्मद मुइजू का ऐलान, मालदीव से निकाले जाएंगे भारतीय सैनिक, जानिए क्या कहा?

Maldives-India-China: मालदीव में भारत समर्थित सरकार के पतन के साथ ही नये राष्ट्रपति बने मोहम्मद मुइजू चीन के पक्ष में बयानबाजी करने लगे हैं और चुनावी कैम्पेन को भारत के खिलाफ रखने वाले मोहम्मद मुइजू ने एक बार फिर से घोषणा की है, कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर निकाला जाएगा।

मोहम्मद मुइजू ने एक बार फिर से अपनी घोषणा को दोहराते हुए कहा है, कि अपने कार्यकाल की शुरूआत के पहले ही दिन से मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी और भारत के लिए हिंद महासागर में ये अच्छी खबर नहीं है। मोहम्मद मुइजू 17 नवंबर को अपने कार्यकाल की शुरूआत करने वाले हैं और तब तक भारत समर्थनक इब्राहिम मोहम्मद सोलिह देश के राष्ट्रपित रहेंगे, जो पिछले हफ्ते हुए चुनाव में हार चुके हैं।

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चीन की गोदी में खेलते मोहम्मद मुइजू

मालदीव के लोगों ने राष्ट्रपति चुनाव में "भारत-समर्थक" इब्राहिम सोलिह के खिलाफ देश का नेतृत्व करने के लिए "चीन समर्थक" नेता मोहम्मद मुइज्जू को चुना है।

चुनाव के नतीजे शनिवार को घोषित किए गए थे, जिसमें पीपुल्स नेशनल कांग्रेस-प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव (पीएनसी-पीपीएम) गठबंधन के मुइज्जू ने लगभग 54 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के सोलिह ने 46 प्रतिशत वोट हासिल किए, और उन्होंने शनिवार को चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली है।

मोहम्मद मुइजू की जीत काफी आश्चर्यजनक मानी जा रही है, क्योंकि वो अभी तक राजधानी माले के मेयर थे, लेकिन अब वह 17 नवंबर को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

भारत के लिए मालदीव कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि जब नरेन्द्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री चुने गये थे, तो उनका पहला विदेशी दौरा मालदीव का ही था। पीएम मोदी 8-9 जून को मालदीव की यात्रा पर गये थे।

ऐसा माना जा रहा है, कि 100 प्रतिशत मुस्लिम राष्ट्र मालदीव में शीर्ष पद के लिए मुइज़ू के चुनाव का भारत के साथ द्वीप राष्ट्र के संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

मुइज्जू चीन समर्थक खेमे का हिस्सा है और अब्दुल्ला यामीन प्रशासन (2013-2018) के दौरान आवास और बुनियादी ढांचे के मंत्री थे, जिसके तहत मालदीव ने निर्माण परियोजनाओं के लिए चीन से भारी उधार लिया था।

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मालदीव में तैनात हैं भारतीय सैनिक

आपको बता दें, कि मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति मोहम्मद सोलिह भारत समर्थक हैं और उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते किए गये हैं, जिनसे हिंद महासगर में भारत को रणनीति बनाने में काफी सफलता मिली है।

ऐसी रिपोर्ट है, कि मालदीव में इस वक्त करीब 1 हजार सैनिक हैं। हालांकि, मालदीव की सोलिह सरकार ने हमेशा कहा है, कि भारतीय सैनिक मालदीव में डॉकयॉर्ड का निर्माण करने के लिए हैं, ना कि किसी और वजह से। लेकिन, मालदीव की विपक्षी पार्टियों ने भारतीय सैनिकों की मौजूदगी के खिलाफ पिछले डेढ़ सालों से काफी कैम्पेन चलाया, जिसे चीन ने काफी हवा दी है।

पिछले डेढ़ सालों से मालदीव में विपक्ष ने 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया, जिसके खिलाफ सोलिह सरकार ने एक कानून भी पारित किया था, लेकिन चीन लगातार इस गुस्से को भड़काता रहा। विपक्ष जनता को भारत के खिलाफ भड़काने में कामयाब रहा।

मालदीव में चीन और भारत, दोनों के अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं और पिछले पांच सालों में भारत ने हिंद महासागर में स्थिति इस देश में भारी निवेश किया है, जबकि चीन मालदीव में बीआरआई प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन पिछले पांच सालों में बीआरआई प्रोजेक्ट करीब करीब ठप रहा, लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन समर्थिक सरकार की स्थापना के बाद अब भारतीय प्रोजेक्ट्स ठप पड़ सकते हैं और मालदीव में रणनीतिक प्वाइंट्स पर चीनी सैनिकों की तैनाती हो सकती है।

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