चीन के प्यार में अंधे हुए मुइज्जू! अब 43 भारतीयों को मालदीव से निकालने का किया फैसला, बताई ये वजह
मालदीव ने कथित तौर पर 43 भारतीयों को निर्वासित कर दिया है, माले-आधारित समाचार आउटलेट अधाधु ने मंगलवार को रिपोर्ट दी है कि ये सभी लोग वीजा उल्लंघन और नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों के आरोप में लिप्त पाए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव ने 12 देशों के कुल 186 नागरिकों को देश से निकालने का फैसला किया है। इसमें सबसे अधिक बांग्लादेश के 83 नागरिक हैं वहीं चीन का एक भी नागरिक इस लिस्ट में नहीं है।

बांग्लादेश और भारत के बाद मालदीव ने श्रीलंका के 25, नेपाल के 8 लोगों को निर्वासित किया है। इनके लिए देश छोड़ने की आखिरी तारीख क्या है, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। मालदीव के गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा था कि विदेशियों द्वारा रखे गए बैंक खातों में जमा की गई कमाई से देश में अवैध रूप से संचालित व्यवसायों को बंद करने के प्रयास चल रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने कहा कि वो देश में गैर-कानूनी तरह से चल रहे बिजनेस को बंद करने करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि वे इस दौरान उन बिजनेस को भी टारगेट करेंगे, जिनका मालिक कोई और है, लेकिन इन्हें कोई विदेश नागरिक ऑपरेट कर रहा है।
होमलैंड सुरक्षा मंत्री अली इहुसन ने कहा कि मंत्रालय विभिन्न नामों के तहत चल रहे अवैध व्यवसायों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए आर्थिक मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है। इहुसान ने कहा कि किसी दूसरे के नाम से बिजनेस रजिस्टर करवाने के बाद इन्हें विदेश नागिरक ऑपरेट करते हैं।
इसके बाद बिजनेस ने होने वाले मुनाफे को वे अपने ही अकाउंट में डलवाते हैं। अब हम ऐसे बिजनेस को बंद करके इनको चलाने वाले विदेशियों को उनके देश वापस भेज रहे हैं। यह फैसला मालदीव में दिसंबर 2021 में लाए गए एक कानून के तहत लिया गया है।
मालदीव ने पंजीकृत मालिक के बजाय किसी विदेशी द्वारा संचालित व्यवसायों को बंद करने के लिए दिसंबर 2021 में एक कानून बनाया। कानून ऐसे व्यवसायों के पंजीकरण को समाप्त करने की अनुमति देता है यदि रजिस्ट्रार को लगता है कि कोई व्यवसाय किसी विदेशी द्वारा मुनाफा कमाने के साथ संचालित किया जा रहा है।












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