Oxford University में कौन सा माल फूंकती थीं नोबल विजेता मलाला? दोस्ती और प्रेम की थी तलाश
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने अपनी नई आत्मकथा में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि Oxford University में पढ़ाई के दौरान वहा गांजा पीती थीं। गांजा पीने के अनुभव ने 2012 के उस तालिबान हमले की यादें ताज़ा कर दीं, जिसमें उन्हें गोली मारी गई थी। यह जानकारी उनकी आने वाली आत्मकथा 'फाइंडिंग माय वे' (वीडेनफेल्ड एंड निकोलसन, 2025) के एक अंश में दी गई है, जिसे द गार्डियन ने 12 अक्टूबर को छापा है।
ऑक्सफोर्ड के दिनों की घटना का ज़िक्र
इस अंश का शीर्षक है - "एक बॉन्ग पीने से तालिबान द्वारा गोली मारे जाने का दर्द कैसे वापस आया।" इसमें मलाला ने ऑक्सफोर्ड के लेडी मार्गरेट हॉल में छात्र जीवन के दौरान घटी एक घटना के बारे में विस्तार से बताया है।

इकोनॉमिक्स असाइनमेंट से शुरू हुई कहानी
मलाला ने लिखा है कि यह घटना तब हुई जब वह अर्थशास्त्र के एक कठिन निबंध पर काम कर रही थीं। उन्हें सवाल दिया गया था: "कैसे परिस्थितियां बिगड़ जाने से आपकी आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ता है। और इसे कैसे ठीक कया जा सकता है ये बात भी समझ नहीं आती।"
'द शेक' पर पहली बार लिए कश
ब्रेक लेने के लिए वह देर शाम अपने कॉलेज के कमरे से निकलीं और एक छोटी जगह पर पहुंचीं, जिसे छात्र 'द शेक' कहा करते थे। वहां उन्होंने एक दोस्त को दो बिजनेस कोर्स के छात्रों के साथ बैठे पाया, जो एक कांच के बॉन्ग (गांजा पीने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कांच का वास्प) से धुआं उड़ा रहे थे।
मलाला लिखती हैं, "मुझे बुलबुलाने की आवाज सुनाई दी और वह धुएं के बादल में गायब हो गया। गंध ने मेरे सवाल का जवाब दे दिया।" उन्होंने पहचान लिया कि वह वस्तु गांजा पीने के लिए इस्तेमाल होने वाला बॉन्ग था। उन्होंने भी एक कश लिया- और इसके बाद उन्हें अचानक और परेशान करने वाला अनुभव हुआ।
धुएं ने जगा दी तालिबान हमले की यादें
मलाला के अनुसार, उस धुएं ने 2012 के तालिबान हमले की भयावह यादें जगा दीं। उस वक्त वह सिर्फ 15 साल की थीं, जब पाकिस्तान की स्वात घाटी में स्कूल से लौटते समय एक तालिबान बंदूकधारी ने उनके सिर में गोली मार दी थी। उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि वह लड़कियों की शिक्षा की खुलकर वकालत करती थीं।
हमले के बाद दुनिया ने जताई थी एकजुटता
इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई और दुनिया भर से उनके लिए समर्थन आया। इलाज के लिए उन्हें यूके (ब्रिटेन) ले जाया गया, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। द गार्डियन के मुताबिक, गांजा पीने के बाद आए फ्लैशबैक ने गोलीबारी की भयावह यादें दोबारा ताज़ा कर दीं।
फ्लैशबैक का असर और आघात का ज़िक्र
मलाला इस अनुभव के शारीरिक विवरण में नहीं गईं, लेकिन उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे भयावह और असहज पलों में से एक बताया। यह उनके भीतर छिपे आघात की "भयानक पुनरावृत्ति" थी।
दोस्ती, रोमांस और खुद की तलाश
मलाला की यह आत्मकथा दोस्ती, प्रेम, और खुद की तलाश की कहानी को भी बयान करती है। प्रकाशक के मुताबिक, किताब का मुख्य सवाल है- "जब आपकी पूरी दुनिया रातोंरात बदल जाए तो आप खुद को कैसे फिर से बनाते हैं?"
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