Major Abhilasha Barak: कौन हैं हरियाणा की बेटी मेजर अभिलाषा बराक? वॉर जोन में गाड़ा झंडा, UN से मिला अवॉर्ड

Major Abhilasha Barak: भारत के लिए गर्व की खबर सामने आई है। भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक (Major Abhilasha Barak) को यूनाइटेड नेशंस (UN) ने "मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर" (Military Gender Advocate of the Year) अवॉर्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें लेबनान में तैनाती के दौरान महिलाओं और लड़कियों के लिए किए गए विशेष कार्यों के लिए दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मेजर अभिलाषा की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि यूनाइटेड नेशंस शांति अभियानों में भारत के लंबे और महत्वपूर्ण योगदान की भी पहचान है।

कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?

मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं। उन्होंने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और वर्तमान में लेबनान में यूनाइटेड नेशंस के शांति मिशन के तहत तैनात हैं। अभिलाषा बराक मूल रूप से हरियाणा के रोहतक की रहने वाली हैं। उनके पिता भारतीय सेना में कर्नल रह चुके हैं और अब रिटायर्ड हैं। सेना के माहौल में पली-बढ़ीं अभिलाषा का जन्म तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित आर्मी हॉस्पिटल में हुआ था। उनकी उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि उन्होंने ऐसे क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, जहां लंबे समय तक पुरुषों का दबदबा रहा है। आज वे भारतीय सेना में महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं।

Major Abhilasha Barak

कॉरपोरेट नौकरी छोड़ सेना में चुना करियर

यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग फोर्स के मुताबिक, यह पुरस्कार हर साल दुनिया भर के शांति मिशनों में काम कर रहे अधिकारियों में से सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार को दिया जाता है। मेजर अभिलाषा बराक ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ समय तक कॉरपोरेट सेक्टर में भी काम किया। हालांकि बाद में उन्होंने सेना में शामिल होकर देश सेवा का रास्ता चुना। आज उनका नाम उन महिलाओं में गिना जाता है जिन्होंने पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर नई पहचान बनाई है।

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लेबनान में क्या जिम्मेदारी संभाल रही हैं?

मेजर अभिलाषा बराक इस समय यूनाइटेड नेशंस अंतरिम बल लेबनान (UNIFIL) में Engagement Team Commander और Gender Focal Point के तौर पर काम कर रही हैं। उनकी भूमिका सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। वे स्थानीय महिलाओं और लड़कियों से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझती हैं, उन्हें सहायता दिलाने में मदद करती हैं और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करती हैं। यूनाइटेड नेशंस ने उनके इन्हीं प्रयासों को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मेजर अभिलाषा बराक को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी उत्कृष्ट सेवा का प्रमाण है। साथ ही यह यूनाइटेड नेशंस शांति अभियानों में भारत की निरंतर और प्रभावशाली भूमिका को भी दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेजर अभिलाषा की सफलता देश के लाखों युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो देश और मानवता की सेवा का सपना देखती हैं।

कैसे चुना जाता है यह अवॉर्ड?

यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक, हर साल यह पुरस्कार दुनिया भर में चल रहे सभी UN शांति अभियानों के अधिकारियों में से किसी एक को दिया जाता है। इसके लिए विभिन्न मिशनों के फोर्स कमांडर और मिशन प्रमुख उम्मीदवारों का नाम भेजते हैं। इसके बाद उनके काम, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक योगदान का मूल्यांकन किया जाता है और फिर विजेता का चयन किया जाता है। यानी यह सम्मान हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए वैश्विक स्तर पर कई उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।

UN शांति मिशनों में भारत की मजबूत भूमिका

भारत लंबे समय से यूनाइटेड नेशंस के शांति अभियानों में अहम भूमिका निभाता रहा है। भारतीय सेना और पुलिस के हजारों जवान सालों से दुनिया के अलग-अलग संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के मिशन में हिस्सा लेते रहे हैं। भारत आज भी UN शांति अभियानों में सबसे ज्यादा सैनिक और पुलिसकर्मी भेजने वाले देशों में शामिल है। यही वजह है कि भारतीय अधिकारियों की उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दिया जाता है।

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लेबनान मिशन में कितने भारतीय जवान हैं?

फरवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, UNIFIL में कुल 7,538 शांति सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक 48 अलग-अलग देशों से आते हैं। इनमें भारत के 642 सैनिक और अधिकारी शामिल हैं। यह संख्या इटली के 784, इंडोनेशिया के 756 और स्पेन के 660 सैनिकों के बाद चौथी सबसे बड़ी है। यह आंकड़ा दिखाता है कि लेबनान में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण और प्रभावशाली है।

क्यों खास है यह उपलब्धि?

मेजर अभिलाषा बराक की सफलता सिर्फ एक पुरस्कार जीतने की कहानी नहीं है। यह भारतीय महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, सेना में उनके योगदान और वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत पहचान का प्रतीक भी है। एक इंजीनियरिंग छात्रा से कॉरपोरेट प्रोफेशनल, फिर भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट और अब यूनाइटेड नेशंस के प्रतिष्ठित सम्मान तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। यही वजह है कि मेजर अभिलाषा बराक आज लाखों भारतीय युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

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