महसा अमिनी: 22 साल की वो लड़की, जो हिजाब के खिलाफ आंदोलन में ईरान में पोस्टर गर्ल बन गई
ईरान से आने वाली कई वीडियो में देखा जा रहा है, कि सड़क पर महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं और प्रदर्शनकारी महिलाएं बिना हिजाब के सड़कों पर हैं, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को जद्दोजहद करते हुए देखा जा सकता है।
तेहरान, सितंबर 18: पुलिस हिरासत में 22 साल की युवती की मौत के बाद ईरान में बवाल मच गया है और हजारों महिलाओं ने इस्लामिक शासन के खिलाफ खड़ी हो गईं हैं और महसा अमिनी को इंसाफ दिलाने के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ईरान से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक महिलाओं का गुस्सा देखा जा रहा है, जिसने इस्लामिक सरकार को मुसीबत में डाल दिया है और सुरक्षा अधिकारियों को किसी भी विद्रोह का सख्ती से दमन करने के लिए कहा गया है।
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महसा अमिनी के लिए इंसाफ की जंग
आपको बता दें कि, ईरानी महिलाओं का ये गुस्सा उस वक्त फूटा है, जब हिजाब नहीं पहनने की वजह से 22 साल की युवती महसा अमिनी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और फिर पुलिस हिरासत में ही उसकी संदिग्ध मौत हो गई। परिवार का आरोप है, कि पुलिस ने उसे बुरी तरह से प्रताड़ित किया था, जिसकी वजह से वो गंभीर घायल हो गई थी और बाद में उसकी मौत हो गई। मृतका महसा अमिनी की मां ने सीधे तौर पर पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने आरोपों को नकार दिया है। महसा अमिनी को 13 सितंबर को राजधानी तेहरान में गिरफ्तार किया गया था और 16 सितंबर को उनकी मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही महसा अमिनी की हालत काफी खराब हो गई थी और फिर वो कोमा में चली गईं थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वो अपने परिवार के साथ तेहारान घुमने आईं थीं, जहां से उन्हें हिजाब नहीं पहनने की वजह से गिरफ्तार किया गया था।

महिलाओं का फूटा गुस्सा
22 साल की मृतका की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें एक तस्वीर में उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती दिखाया गया है और उनके दाहिने कान से खून बह रहा था। इसके बाद हेल्थ मैगजीन के संपादक महदियार सईदियन समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इशारा किया कि, कि उनके बेहोश होने की वजह ब्रेन स्ट्रोक नहीं बल्कि सिर में चोट है, क्योंकि इससे कभी भी कान से खून नहीं निकलता है। महसा अमिनी मूल रूप से कुर्दिस्तान प्रांत के सक़्ज़ेज़ की रहने वाली थी और गिरफ्तारी के बाद तेहरान की इस्लामिक धार्मिक पुलिस ने उनके भाई को खबर दी थी, कि महसा को इस्लामिक ड्रेस कोड, हिजाब कानून का उल्लंघन करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है और उसे जेल भेजा जा रहा है। लेकिन, बाद में फिर उसके भाई को पुलिस ने बताया कि, उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। महसा अमिनी की मौत की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, ईरान में महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है और हजारों की तादाद में महिलाएं सड़कों पर उतर आईं हैं।
सड़क पर उतरी महिलाएं
ईरान से आने वाली कई वीडियो में देखा जा रहा है, कि सड़क पर महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं और प्रदर्शनकारी महिलाएं बिना हिजाब के सड़कों पर हैं, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को जद्दोजहद करते हुए देखा जा सकता है। महिला पुलिसकर्मी को भी महिलाओं को काबू में करने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है। ईरानी सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक, देश के अलग अलग हिस्सों में महिलाएं सड़क पर महसा अमिनी को इंसाफ दिलाने की मांग कर रही हैं और महिलाएं बिना हिजाब के सड़कों पर उतरी हुई हैं। ईरानियन नेशनल डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी शासन, जो अब पूरी तरह से कट्टरपंथियों के कंट्रोल में है, उसने आर्थिक तबाही में फंसे ईरानी लोगों को दबाने के लिए और भी सख्त रूख अपनाया है, जबकि देश में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

16 हजार महिलाओं पर मुकदमा
ईरानियन नेशनल डेली की रिपोर्ट में कहा गया है, कि ईरान में हिजाब प्रवर्तन गश्ती दल ने अब तक 16 हजार से ज्यादा महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जो बिना हिजाब के सड़कों पर प्रदर्शन करने उतर गई हैं। अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है, कि धार्मिक पुलिस ने सैकड़ों महिलाओं को गिरफ्तार किया है और कई महिलाओं के साथ बेरहमी भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं सड़क पर डटी हुई हैं, जबकि सरकार और सैन्य अधिकारियों की तरफ से उन्हें बार बार चेतावनी दी जा रही है। ईरानी अखबार ने लिखा है कि, हाल के महीनों में, पुलिस की बर्बरता इतनी आम हो गई है, कि महिलाओं और किशोर लड़कियों की इस तरह की हिंसक गिरफ्तारी की खबरें सामान्य हो गईं हैं और पुलिस हिजाब प्रथा लागू करवाने के लिए काफी सख्ती से पेश आ रही है, जिसकी वजह से अकसर पुलिस और महिलाओं के बीच संघर्ष होते रहते हैं।
जॉर्ज फ्लॉयड से हो रही तुलना
ईरान में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी नोट किया है, कि जब संयुक्त राज्य अमेरिका में पुलिस की बर्बरता के परिणामस्वरूप जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या हुई थी, तो ईरान के नेता अली खामेनेई ने इसे एक "क्रूर" अपराध करार दिया था, जिससे "संयुक्त राज्य के अधिकारियों की वास्तविक प्रकृति" का पता चला था। लेकिन, "इस्लामिक गणराज्य को अपनी क्रूरता की सजा कभी नहीं मिली है। वे (कट्टरपंथी) अब कहां हैं, जिन्होंने जॉर्ज फ्लॉयड के लिए काली मोमबत्तियां जलाईं और हैशटैग 'मैं सांस नहीं ले सकता' जैसे शब्दों के साथ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे थे और वो लोग अब महिलाओं के हक में आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं।

सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज
ईरान के सोशल मीडिया पर लोग सरकार का लगातार विरोध कर रहे हैं और महिलाएं हिजाब के कैद से बाहर निकलने के लिए प्रखर आवाज उठा रही है। वहीं, कड़े हिजाब कानून बनाने की वजह से खामेनेई लगातार अपना समर्थन खोते जा रहे हैं। उन्होंने जुलाई में एक भाषण में कहा था, कि ईरानी महिलाओं के बीच हिजाब विरोधी आंदोलन पश्चिमी चाल से ज्यादा कुछ नहीं है। उनका भाषण 28 साल की ईरानी लेखिका की गिरफ्तारी के बाद आया था, जिन्हें बिना हिजाब के गिरफ्तार किया गया था, जिसकी निंदा पूरी दुनिया में की गई थी। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने हिरासत में रहने के दौरान नागरिकों और कार्यकर्ताओं की मौत की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें डॉक्टर और महिला अधिकार कार्यकर्ता ज़हरा बानी-यगौब भी शामिल हैं, जिनकी मौत ईरान की मोरल पुलिस की हिरासत में 2007 में हो गईं थी।
हिबाज के कैद से बाहर निकलने की छटपटाहट
ईरान में एक वक्त महिलाओं के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं था, लेकिन इस्लामिक क्रांति के बाद महिलाओं को शरिया कानून के तहत जीवन जीने के लिए मजबूर किया गया, जिसका विरोध ईरानी महिलाएं सालों से करती आ रही हैं और ये संघर्ष अब काफी तेज होता जा रहा है। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौत भी हो चुकी हैं और कितनी आम महिलाओं की जान गई है, इसका निश्चित आंकड़ा नहीं है। लेकिन, प्रमुख हस्तियों में पर्यावरणविद् कावूस सैयद-इमामी और ब्लॉगर सत्तार बेहेश्ती शामिल हैं, जिनकी मौत साल 2012 और 2018 में पुलिस की हिरासत में हो गई थी। हिंसा के भारी सबूतों के बावजूद ईरानी अधिकारियों ने जेल में रहते हुए इनकी मौत में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, ईरानी सोशल मीडिया पर पुलिस की हिरासत में मौत को लोगों ने अब चुटकले बनाने शुरू कर दिए हैं और सोशल मीडिया पर कहा जाता है, कि 'इस्लामिक रिपब्लिक में पीटने से कोई नहीं मरता, ईरान में सिर्फ स्ट्रोक से मौत होती है।'

महसा अमिनी बनी पोस्टर गर्ल
कई ईरानी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर महसा अमिनी के भयानक अंत के बारे में ट्वीट किया है, जिसमें राष्ट्रीय टीम के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी अली करीमी भी शामिल हैं, जिनके लगभग 10 मिलियन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स हैं। घटना के बारे में अमेरिकी अभिनेत्री और उपन्यासकार लिआ रेमिनी के ट्वीट के कारण, अमिनी के मामले और हिजाब पहनने वाली ईरानी महिलाओं के खिलाफ राज्य की हिंसा ने बहुत ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में सवाल ये है, कि हिजाब की कैद से बाहर निकलने के लिए छटपटाती ईरानी महिलाओं को काले लबादे से आखिरकार कब आजादी मिलेगी?












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