लंदन हाईकोर्ट ने कहा, UK संसद की मंजूरी के बिना ब्रेक्जिट पर फैसला नहीं हो सकता

लंदन हाईकोर्ट में ब्रेक्जिट मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री थेरेसा मे को अधिकार नहीं है कि लिस्बन समझौते के आर्टिकल 50 को जबरन लागू कर सकें।

लंदन। ब्रेक्जिट को लेकर लंदन हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम संसद की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जा सकता है। ब्रेक्जिट का मतलब ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने से है।

theresa may

ब्रेक्जिट पर लंदन हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

लंदन हाईकोर्ट में ब्रेक्जिट मामले पर सुनवाई के दौरान तीन वरिष्ठ जजों की पीठ ने कहा कि प्रधानमंत्री थेरेसा मे को अधिकार नहीं है कि यूरोपियन यूनियन के लिस्बन समझौते के आर्टिकल 50 को जबरन लागू कर सकें।

कोर्ट ने फैसले में कहा है कि सेक्रेट्री ऑफ स्टेट को ये ताकत नहीं है कि यूरोपियन यूनियन से यूनाइटेड किंगडम को अलग करने के लिए आर्टिकल 50 को बिना संसद की मंजूरी के सीधे लागू कर सकें।

फिलहाल सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है। हालांकि इस बारे में अभी तक सरकार की ओर से कोई ऐलान नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है मामला

लंदन हाईकोर्ट के फैसले का असर ब्रेक्जिट से जुड़े दोनों पक्षों पर पड़ रहा है। जो लोग ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन बनाए रखना चाहते हैं वो कोर्ट के फैसले से खुश हैं। वहीं यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन को अलग कराने वालों को इस फैसले से झटका लगा है।

बता दें कि ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से अलग करने को लेकर वोटिंग हुई थी जिसमें अलग होने को लेकर बहुमत मिला था।

हालांकि इस फैसले के बाद तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को इस्तीफा देना पड़ गया था। उसके बाद थेरेसा मे नई प्रधानमंत्री बनी थी।

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