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लॉकहीड मार्टिन Vs एयरबस Vs महिन्द्रा-एम्ब्रेयर.. इंडियन एयरफोर्स से अरबों डॉलर का एयरक्राफ्ट डील कौन जीतेगा?

Indian Aircraft Deal: इंडियन एयरफोर्स अपने बेड़े से पुराने हो चुके An-32s मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) को बदलना चाहती है और इसके लिए अरबों डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट जारी किया जाएगा, लिहाजा दुनिया की बड़ी बड़ी हथियार कंपनियों के बीच इस डील को जीतने के लिए रेस शुरू हो गई है।

इंडियन एयरफोर्स की इस डील को जीतने के लिए ब्राजीलियाई कंपनी एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी और भारतीय कंपनी महिंद्रा ने सी-390 मिलेनियम के निर्माण के लिए हाथ मिला लिया है, जिसका मकसद भारत में मल्टी-मिशन विमान तैयार करना है।

C-390 Millennium aircraft

वहीं, इस रेस में अमेरिका की सबसे बड़ी एयरोस्पेस फर्म लॉकहीड मार्टिन अपने सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस के साथ और यूरोपीय कंपनी एयरबस डिफेंस एंड स्पेस ने अपने ए-400 एम विमान को रेस में उतार दिया है। लॉकहीड मार्टिन तो इस रेस में इसलिए बढ़त मिल सकती है, क्योंकि उसका C-130J विमान, पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल है।

किसकी झोली में गिरेगी अरबों डॉलर की डील

इंडियन एयरफोर्स सामरिक एयरलिफ्टिंग के लिए 12 सुपर हरक्यूलिस ऑपरेट करता है।

वहीं, ब्राजीलियन कंपनी एम्ब्रेयर के विमानों का इस्तेमाल भी भारत करता है। एम्ब्रेयर ने भारत में वीवीआईपी विमान, एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान और कंट्रोल एयरक्राफ्ट की आपूर्ति की है।

जिसकी वजह से ब्राजीलियन कंपनी एम्ब्रेयर और अमेरिकन कंपनी लॉकहीड को यूरोपीय कंपनी एयरबस पर बढ़त मिलने की संभावना है, हालांकि ये सौदा अरबों डॉलर का होने वाला है, इसलीए ऐसी उम्मीद है, कि भारतीय वायुसेना भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के तहत 40 से 80 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है, मगर शर्त ये हो सकती है, कि इन विमानों का निर्माण भारत में किया जाए।

भारतीय वायुसेना किन विमानों की तलाश में है?

भारतीय वायुसेना 18 से 30 टन माल ढोने की क्षमता वाले नए परिवहन विमान की तलाश कर रही है।

मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) के लिए जो अनुरोध पत्र जारी किए गये हैं, उसके मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने विदेशी विक्रेताओं से 40, 60 और 80 विमानों के बैच के लिए विमान और संबंधित उपकरणों की लिस्ट सौंपने के लिए कहा है।C-130J के 20 टन और A-400 M के 37 टन की तुलना में C-390, 26 टन का पेलोड ले जा सकता है।

अपनी सूचना में भारतीय वायुसेना ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के दायरे के बारे में जानकारी देने को कहा है, ताकि विमानों के स्वदेशीकरण को बढ़ाने और भारत में डिज़ाइन, एकीकरण और विनिर्माण प्रक्रियाओं सहित एक समर्पित विनिर्माण लाइन स्थापित करने के तरीके का निर्माण किया जा सके।

मोदी सरकार की कोशिश भारत को विमानों के उपकरणों के विनिर्माण और रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) के लिए एक क्षेत्रीय या वैश्विक केंद्र बनाना है।

चीन के साथ लंबे समय तक चले गतिरोध ने सैन्य परिवहन विमानों की जरूरत को हाइलाइट किया है। 2020 में गलवान झड़प के बाद, भारत ने लगभग 90 टैंकों और 300 से ज्यादा पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों के साथ 68,000 से ज्यादा अतिरिक्त सैनिकों को लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए अपने परिवहन बेड़े को तैनात किया है।

रूसी An-32 को किया जाएगा रिप्लेस

भारतीय वायुसेना अपग्रेडेड An-32 को अपने बेड़े से अब रिप्लेस करना चाह रही है, जिसकी संख्या करीब 100 है। ये परिवहन विमान 2031-32 में 44 साल की सेवा पूरी कर लेंगे और इससे पहले तक इंडियन एयरफोर्स अपने बेड़े को दूसरे विमानों से बदल देने के मूड में है।

भारतीय वायुसेना ने शुरुआत में रूस के साथ एक संयुक्त विकासात्मक परियोजना के तहत एमटीए खरीदने की योजना बनाई थी। दोनों देशों ने 2012 में विमान के सह-विकास के लिए एक समझौता किया था।

इसके तहत भारत को 45 विमान खरीदने थे और रूस को लगभग 100 विमान खरीदे थे, लेकिन यह सौदा 2016 में फेल हो गया, क्योंकि दोनों देश विमान के इंजन और डिजाइन के बारे में एक समझौते पर पहुंचने में नाकाम रहे।

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