लीबिया में बांध टूटने के बाद समुद्र में डूबा शहर, हजारों लोगों की मौत, तबाही का अंदाजा लगाना भी असंभव
Libya flood disaster: लीबिया में बाढ़ के बाद बांध टूटने के बाद तबाही मच गई है और स्थानीय अधिकारियों ने मंगलवार को कहा है, मूसलाधार बारिश के कारण तटीय शहर डर्ना के पास दो बांध टूटने से 5,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। अधिकारियों ने कहा है, कि बाढ़ और बांध टूटने की वजह से शहर का ज्यादा हिस्सा नष्ट हो गया और पूरा इलाका समुद्र में समा गया है।
लीबिया, जो पहले से ही गृहयुद्ध से बर्बादी की दहलीज पर खड़ा है, वहां पर आई इस भीषण बाढ़ ने भयानक बर्बादी फैला दी है और ये देश, किसी प्राकृतिक आपदा के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था।

उत्तर अफ़्रीकी देश लीबिया, जो युद्ध से बिखर गया था, वो डेयनियल नामक तूफ़ान के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, और भूमध्य सागर में बहकर इसके तट पूरी तरह से तबाह हो गये हैं। देश को दो प्रतिद्वंद्वी सरकारों द्वारा प्रशासित किया जाता है, जिससे बचाव और सहायता प्रयास जटिल हो गये हैं। विशाल तेल संसाधन होने के बावजूद, एक दशक से ज्यादा की राजनीतिक अराजकता ने देश को तबाह कर दिया है और देश में बुनियादी ढांचे नहीं हैं।
सबसे दिक्कत ये है, कि लीबिया में मदद पहुंचाना भी काफी मुश्किल है, क्योंकि इसके एयरपोर्ट भी तबाह हो चुके हैं और वहां विमानों का उतरना संभव नहीं है।
लीबिया में बाढ़ से भीषण तबाही
लीबियाई टेलीविजन स्टेशन अल-मसर के मुताबिक, पूर्वी लीबिया की देखरेख करने वाली सरकार के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारेक अल-खर्राज़ ने कहा है, कि अकेले डर्ना शहर में, कम से कम 5,200 लोग मारे गए है। लेकिन बाढ़ का पानी शाहहाट, अल-बायदा और मार्ज सहित अन्य पूर्वी बस्तियों में भी भरा हुआ है और कम से कम 20,000 लोग विस्थापित हो गए हैं।
तारेक अल-खर्राज़ के हवाले से टेलीविजन स्टेशन अल-मसर ने कहा है, कि "हजारों लोग लापता हैं और आने वाले दिनों में मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। बाढ़ के कारण शव सड़कों पर बिखर गए हैं, जबकि इमारतें ढह गईं हैं, वाहन डूब गए हैं और सड़कें अवरुद्ध हो गईं हैं, जिससे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना रूक गया है।"
तुर्की में रहने वाले डेरना मूल निवासी 28 वर्षीय जवाहर अली ने कहा, कि "हम अभी भी इसकी भयावहता को समझ नहीं सकते हैं, लीबिया के जो लोग तुर्की में रह रहे हैं, वो अपने परिवार की समाचार लेने के लिए रातों रात जगे हुए हैं, क्योंकि कोई कम्युनिकेशन नहीं है।" जवाहर अली ने कहा, कि "जो आपदा हम अनुभव कर रहे हैं वह भयानक है।"
विश्लेषकों ने कहा है, कि देश की समस्याएं- राजनीतिक विभाजन, आर्थिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, पर्यावरणीय गिरावट और जीर्ण-शीर्ण बुनियादी ढांचा, किसी भी प्राकृतिक आपदा का मुकालबा नहीं कर सकते हैं और इसीलिए, शहर के दक्षिण में बांध ढह गए और इतनी तबाही मची है।
आपको बता दें, कि उत्तर अफ्रीका के एक अन्य देश मोरक्को में भी आए भूकंप में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं।

इस तबाही के लिए कौन है जिम्मेदार?
लेकिन लीबिया के नीति अनुसंधान केंद्र, सादिक इंस्टीट्यूट के निदेशक अनस एल गोमाती ने कहा, कि डेनियन तूफान का अंदाजा कई दिन या कई घंटे पहले लगाया जा सकता है।
एल गोमती ने कहा, कि पिछले हफ्ते ग्रीस, तुर्की और बुल्गारिया में तूफान ने विनाशकारी प्रभाव दिखाए हैं, जिसमें दर्जनों लोग मारे गये हैं। लीबियाई अधिकारियों के पास बांधों की निगरानी करने, निवासियों को चेतावनी देने या उन्हें खाली कराने की कोई गंभीर योजना नहीं थी।
उन्होंने कहा, कि "हम कहते हैं, कि ये कुदरत का किया धरा है, लेकिन मैं कहता हूं, कि ये इंसानों की करतूत है- यह लीबिया के राजनीतिक अभिजात वर्ग की अक्षमता है।" उन्होंने कहा, कि "ऐसे कोई शब्द नहीं हैं, जो उन लोगों की पीड़ा के स्तर का वर्णन कर सकें जो उन्हें सहन करना पड़ता है।"
क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक ताकत, लीबियाई राष्ट्रीय सेना के प्रवक्ता अहमद अल-मोस्मारी ने सोमवार को एक टेलीविजन संवाददाता सम्मेलन में कहा, बांधों ने लगभग 100,000 लोगों की आबादी वाले शहर डर्ना में पानी भर दिया है।
अल-मोस्मारी ने इस बाढ़ को "पूरी तरह से अप्रत्याशित" बताते हुए कहा, कि "यह पहली बार है, जब हम इस प्रकार के मौसम के संपर्क में आए हैं।" उन्होंने कहा, कि हालात के कारण बचाव और सहायता अभियान चलाना मुश्किल हो रहा है, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की सभी सड़कें या तो बह गई हैं, या लगभग कट गई हैं।
उन्होंने कहा, डर्ना से भागे नागरिकों ने शहर छोड़ दिया, "मानो उनका जन्म आज ही हुआ हो, उनके पास कुछ भी नहीं है।"

जो हिस्सा समुद्र में डूबा है, उसे समझिए
लीबिया में दो सरकारें हैं। एक तो राजधानी त्रिपोली से चलने वाली सरकार, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हासिल है, और दूसरी सरकार पूर्वी लीबिया से चलती है, जिसमें बाढ़ प्रभावित शहर डर्ना है, जहां पर लीबिया नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हेक्टर सरकार चलाते हैं, जो लंबे समय से मिलिशिया नेता हैं।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की वरिष्ठ लीबिया विश्लेषक क्लाउडिया गज़िनी ने कहा, कि "पिछले 10 वर्षों से लीबिया एक युद्ध से दूसरे युद्ध, एक राजनीतिक संकट से दूसरे राजनीतिक संकट से गुजर रहा है, लिहाजा लीबिया में विकास के सारे काम ठप पड़े हुए हैं।"
दूसरी तरफ, देश विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और भयंकर तूफानों के प्रति काफी संवेदनशील है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण भूमध्यसागरीय जल का विस्तार हो रहा है और इससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, तटरेखाएं नष्ट हो रही हैं और बाढ़ में योगदान हो रहा है, लीबिया के निचले तटीय क्षेत्र विशेष रूप से खतरे में हैं।
2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान विद्रोह में उखाड़ फेंकने से पहले, लीबिया ने मुअम्मर गद्दाफी के अधीन 42 वर्षों तक निरंकुश शासन को सहन किया।
लेकिन, इसके अगले दशक में, देश गृहयुद्ध से टूट चुका है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई विदेशी खिलाड़ी शामिल हो गए। एक समय पर, तुर्की ने त्रिपोली में एक अस्थायी सरकार का समर्थन किया था, जबकि रूस, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने लीबिया के पूर्व जनरल हिफ़्टर का समर्थन किया था।
आज, देश त्रिपोली में स्थित पश्चिमी प्रशासन द्वारा शासित है, जिसका नेतृत्व प्रधान मंत्री अब्दुल हामिद मोहम्मद दबीबाह करते हैं, जिन्हे ओसामा हमद के नेतृत्व में एक पूर्वी-आधारित अथॉरिटी का समर्थन है। वहीं, लीबिया के अलग अलग हिस्सों में दर्जनों सशस्त्र समूह प्रभावशाली बने हुए हैं, यह बात त्रिपोली में पिछले महीने हुई घातक झड़पों से और भी मजबूत हुई है।
अफ़्रीकी महाद्वीप पर सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार होने के बावजूद, ये देश पूरी तरह से तबाह और बर्बाद हो चुका है।
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