ली केकियांग: चीन के दरकिनार प्रधानमंत्री अचानक सुर्खियों में क्यों आ गये? कम्युनिस्ट पार्टी का कुख्यात खेल!

सबसे आश्चर्यजनक बात ये है, कि हाल ही में ली केकयांग को चीन में कोविड कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पहले कोविड कंट्रोल की जिम्मेदारी सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में थी...

बीजिंग, जून 01: चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग की पिछले हफ्ते अचानक एंट्री होती है और वो चीन के एक लाख स्थानीय सरकारी अधिकारियों को सख्त आदेश देते हैं, कि चीन में शून्य कोविड की प्रतिबबद्धता के बीच लोगों की नाराजगी और गुस्से को शांत करने के लिए फौरन कार्रवाई शुरू करें और लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाना शुरू करें। इसके साथ ही चीन के प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई और कहा, कि जो स्थिति है, उसे नहीं संभाला गया, तो स्थिति आगे जाकर विकराल हो सकता है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि आखिर चीन के प्रधानमंत्री अचानक एक्टिव कैसे हो गये हैं? क्या चीन की राजनीति में कोई और खिचड़ी पक रही है?

चीन की अर्थव्यवस्था पर चिंता

चीन की अर्थव्यवस्था पर चिंता

स्टेट काउंसिल की कार्यकारी बैठक में वीडियो लिंक पर बोलते हुए चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने कहा कि, चीन की अर्थव्यवस्था 2020 में महामारी की शुरुआत से भी बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। चीन की राज्य समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने कहा कि, उस वक्त रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और खपत सभी गिर गए थे, फिर भी देश की अर्थव्यवस्था इतनी खराब नहीं हुई थी, जितनी अब हुई है। चीन के प्रधानमंत्री की यह एक असाधारण अपील थी, जो एक प्रशिक्षित अर्थशास्त्री हैं और जिन्होंने चीन में दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर रहने के बावजूद अपने दोनों कार्यकाल का ज्यादातर समय अपने दफ्तर में ही बिताया है।

बदलने वाली है चीन की राजनीतिक व्यवस्था?

बदलने वाली है चीन की राजनीतिक व्यवस्था?

चीन में हुई इस ऑनलाइन बैठक की तुलना कुछ लोगों ने 1962 के उस शिखर सम्मेलन से की, जहां कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों ने चीन की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए एक विनाशकारी अभियान ग्रेट लीप फॉरवर्ड की विफलता को स्वीकार किया था, जिसे चीन की मीडिया ने एक क्रूर अकाल के तौर पर प्रोजेक्ट किया था। जबकि, इस बार की बैठक देश के आर्थिक भविष्य के बारे में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर चिंताओं को उजागर कर रही है और प्रधानमंत्री ली केकियांग का फिर से सुर्खियों में आना, चीन की राजनीतिक व्यवस्था के भविष्य के बारे में भी चिंताओं का संकेत दे सकता है। एक समय, पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ के गुट से राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखे जाने वाले ली केकियांग को, राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग ने बिल्कुल किनारे कर दिया था। क्योंकि, वो शी जिनपिंग को बराबरी का टक्कर देने का माद्दा और हिम्मत दोनों रखते थे और अभी भी रखते हैं।

कोविड कंट्रोल की सौंपी गई जिम्मेदारी

कोविड कंट्रोल की सौंपी गई जिम्मेदारी

सबसे आश्चर्यजनक बात ये है, कि हाल ही में ली केकयांग को चीन में कोविड कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पहले कोविड कंट्रोल की जिम्मेदारी सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में थी, जिन्होंने देश में ज़ीरो कोविड पॉलिसी लागू किया था और एक केस मिलने पर भी पूरे शहर में अत्यंत सख्त लॉकडाउन लगा दिया जाता था, जिसकी पूरी दुनिया में आलोचना की गई, क्योंकि चीन में जो लॉकडाउन लगता था, उसमें सबसे पहले मानवाधिकार को कुचला जाता था। जबकि, ली केकियांग ने जिम्मेदारी संभालते ही सबसे पहले जनता की नाराजगी दूर करने के आदेश दिए और फिर शंघाई में आज से लॉकडाउन खत्म कर दिया गया। ज़ीर कोविड पॉलिसी ने शी जिनपिंग को राजनीतिक गर्म पानी में डाल दिया है।

शी जिनपिंग बनाम ली केकियांग

शी जिनपिंग बनाम ली केकियांग

ज़ीरो कोविड पॉलिसी ने इस साल के पांच महीने तक चीन के किसी ना किसी प्रांत को अत्यंत सख्त लॉकडाउन में रखा है, जिससे चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुऊ है और कई महत्वपूर्ण उद्योंगों का गला सख्त लॉकडाउन ने घोंट डाला। चीन का सबसे विकसिस आर्थिक शहर शंघाई पिछले दो महीने से लॉकडाउन में बंद था, जिसने चीन की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और इसकी जिम्मेदारी भी शी जिनपिंग पर ही गई है। इतना ही नहीं, राजधानी बीजिंग में भी लॉकडाउन लगाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन उसी वक्त ली केकियांग की एंट्री होती है और बीजिंग में लॉकडाउन टल जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, ली केकियांग का फिर से राजनीतिक मंच पर वापसी अर्थशास्त्र से परे अलग राजनीतिक खेल की तरफ संकेत दे सकता है।

कम्युनिस्ट पार्टी का कुख्यात खेल

कम्युनिस्ट पार्टी का कुख्यात खेल

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के ऊपरी नेता अपनी खतरनाक राजनीतिक खेल के लिए कुख्यात रहे हैं और इस वक्त चीन की राजनीति से जो सूक्ष्म संकेत मिलने शुरू हुए हैं, उससे यही जाहिर हो रहा है, कि शायद फिर से वो खिलाड़ी गेम में आने लगे हैं, जिन्हें शी जिनपिंग ने अब तक खामोश कर रखा था। चीन में किस नेता की हैसियत बढ़ रही है और किसकी घट रही है, इसे मापने के कई तरीके हैं और एक तरीका है, चीन का सरकारी अखबार। चायना मीडिया प्रोजेक्ट के को-डायरेक्टर भी इस तरफ ध्यान दिलाते हैं, कि सिर्फ मई महीने में चीन के सरकारी पीपुल्स डेली अखबार के पहले पन्ने पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग पांच बार अनुपस्थित रहे हैं और शी जिनपिंग की राजनीतिक हैसियत घट सकती है, ये सबसे बड़ा संकेत है। जबकि, ली केकियांग अचानक से पीपुल्स डेली के पहले पन्ने पर शी जिनपिंग के मुकाबले थोड़ा ज्यादा दिखाई देने लगे हैं और चीनी राज्य मीडिया ने ली केकियांग के आर्थिक शिखर सम्मेलन में दिये गये बयान को पहले पन्ने पर एक एक शब्दों के साथ छापा है, जिसने इस कुख्यात खेल को लेकर लगाए जा रहे अटकलों को और तेज कर दिया है।

शी जिनपिंग को लगेगी राजनीतिक लू?

शी जिनपिंग को लगेगी राजनीतिक लू?

डेली मेल की पिछले एक महीने के पहले पन्ने को देखने के बाद चायना मीडिया प्रोजेक्ट के को-डायरेक्टर डेविड बन्दुरस्की बताते हैं कि, 'इससे अटकलें लगाई गई हैं कि शायद शी जिनपिंग संकट में घिरने वाले हैं या घिर चुके हैं और शायद उन्हें पार्टी के भीतर तेज गर्म हवा का सामना करना पड़ रहा है और यह ली केकियांग के लिए एक अवसर हो सकता है, जिनके पास अर्थव्यवस्था के साथ कहां जाना है, इस बारे में बहुत अलग विचार हो सकते हैं।" अलजजीरा से बात करते हुए बंदुरस्की ने कहा कि, 20वीं नेशनल पार्टी कांग्रेस से पहले जून और जुलाई में पार्टी की आंतरिक सोच अधिक स्पष्ट हो सकती है, जहां शी जिनपिंग के तीसरे बार राष्ट्रपति बनने के नाम पर पार्टी के अंदर फैसला होना है। हालांकि, उनका मानना है कि, दुनिया में चूंकी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है, लिहाजा दुनिया को बहकाने के लिए आने वाले दिनों में हो सकता है, कि शी जिनपिंग की चीन की सरकारी मीडिया में काफी अच्छी अच्छी बातें लिखी जाएं और उन्होंने महान बताया जाए, लेकिन ये सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से एक अधिक अस्पष्ट संदेश पेश करने के लिए होगा।

कम्युनिस्ट पार्टी में आतंरिक संघर्ष

कम्युनिस्ट पार्टी में आतंरिक संघर्ष

वहीं, चाइना नीकन न्यूजलेटर के सह-संस्थापक एडम नी का मानना है कि, ली केकियांग का अचानक फिर से सुर्खियों में आने से पता चलता है कि चीन के नेतृत्व के कुछ गुट शी जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल और उनकी शून्य COVID नीति के प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। एडन नी ने अल जज़ीरा से कहा कि, 'पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर, लोग शी जिनपिंग के इर्द-गिर्द सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर चिंतित हैं।" वो बताते हैं कि, 'मुझे लगता है कि हम उस संदर्भ में ली की बढ़ती प्रमुखता को देख सकते हैं। मुझे लगता है कि ली केकियांग को किसी तरह से समर्थन देकर शी जिनपिंग के सत्ता के केंद्रीकरण और संभावित भविष्य की अपनी चिंता का संकेत देने की कोशिश करने वाले लोग ज्यादा हैं।" हालांकि, एडम ली यह भी कहते हैं, कि 'यह सोचना एक गलती होगी, कि ली अब शी जिनपिंग को संतुलित करने में सक्षम हैं, जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री की कीमत पर व्यक्तिगत शक्ति के निर्माण में अपने पहले दो कार्यकाल बिताए हैं।

क्या यह शी जिनपिंग की ही चाल है?

क्या यह शी जिनपिंग की ही चाल है?

एडम ली के कहा कि, 'मुझे लगता है कि शी जिनपिंग शायद अर्थशास्त्र को लेकर सामरिक वापसी कर रहे हैं और इसीलिए ली केकियांग को आगे कर रहे हैं, ताकि अगर अर्थव्यवस्था बिगड़ती है, तो जिनपिंग पर वहीं, केकियांग पर पूरी जिम्मेदारी आए और वो नपे और अगर चीजें सही हो जाती हैं, तो उसके लिए शी जिनपिंग की ही तारीफ होगी, कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी के हाथ में जिम्मेदारी सौंपने में देर नहीं की और उनके लिए देश सर्वोपरि है। एडम ली के मुताबिक, ली केकियांग, शी जिनपिंग के इस जाल में फंसकर हमेशा के लिए अपनी राजनीति को खत्म भी कर सकते हैं। फिर भी एडम ली को ज्यादा विश्वास इस बात पर है, कि ली केकियांग का फिर से सुर्खियों में आना उनके राजनीतिक करियर को और लंबी उम्र दे सकता है। विदेश नीति स्टार्टअप ट्रिवियम चाइना के एक पार्टनर ट्रे मैकआवर ने कहा कि, 'यह हमेशा से हमारी आधारभूत धारणा रही है कि ली केकियांग 20 वीं पार्टी कांग्रेस के बाद शक्तिशाली बने रहेंगे और संभवतः विधायिका के प्रमुख के रूप में।" उन्होंने कहा कि, 'मुझे लगता है कि शी जिनपिंग की हालिया आलोचना और अर्थव्यवस्था को संभालने से ली के हाथ मजबूत होते हैं और इस बात की अधिक संभावना होती है कि वह बने रहेंगे। हम वर्तमान में आकलन करते हैं कि उसके पास ऐसा करने की 67.2 प्रतिशत संभावना है।"

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