Krakatoa Volcano: 150 साल पहले जब Island ने उगली आग, हिल गई दुनिया, 48000 KM दूर तक गूंज
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धरती पर पिछले कुछ शदियों के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनका इतिहास देख एक बार तो यकीन करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन तथ्य और साइंटिफिक रिसर्च से मिले तथ्यों को इग्नोर करके सच को नरअंदाज कर पाना सभी के लिए मुश्किल हो जाता है। आज से 150 साल पहले हुई एक ऐसी घटना है, जो धरती पर मौत का दरिया बनकर सामने आई। ये वो आपदा थी जिसमें 48000 लोगों को मौत हो गई।

क्राकाटोआ ज्वालामुखी
सदियों में आने वाली त्रासदी एक बड़ी छाप छोड़ जाती है। अक्सर इस तरह की घटनाओं के बाद ब्रह्मांड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। क्राकाटोआ ज्वालामुखी के विस्फोट ऐसी ही एक घटना है, जो धरती के सबसे बड़ी आपदा मानी जाती है। इतना विशाल ज्वालामुखी विस्फोट अब तक नहीं देखा गया।

27 अगस्त, 1883 की घटना
ये वो तारीख है, जिसे दुनिया आने वाली कई सदियों तक नहीं भुला पाएगी। क्राकाटोआ ज्वालामुखी के विस्फोट ने इतिहास में सबसे तेज आवाज और बड़ी तबाही के लिए जानी जाती है। यह ज्वालामुखीय द्वीप जावा और सुमात्रा के इंडोनेशियाई द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में उस वक्त हुआ जब सदियों से निष्क्रिय पड़ा ज्वालामुखी एक्टिव हो गया और 27 अगस्त, 1883 को एक पॉवरफुल विस्फोट हुआ।

ज्वालामुखी की 48000 KM तक गूंज
क्राकाटोआ ज्वालामुखी जब फटा तो इसकी आवाज इतनी तेज थी कि काभी दूर तक भूकंप जैसे झटके आए। ज्वालामुखी फटने की गूंज कई हजार किलोमीटर तक सुनाई दी। एक अनुमान के मुताबिक क्राकाटोआ वॉल्केनो फटने का आवाज ऑस्ट्रेलिया, हिंद महासागर से अफ्रीका के तट तक सुनाई दी। अनुमान के मुताबिक 310 डेसिबल से अधिक की आवाज रिकॉर्ड की गई। ये ज्वालामुखी विस्फोट द्वीप के नीचे मैग्मा कक्ष में दबाव के निर्माण के कारण हुआ था।

सूनामी ने मचाई तबाही
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद सुनामी लहरों ने दक्षिण अफ्रीका के तटीय इलाकों को अपने आगोश में ले लिया। इस तबाही में 36,000 मौतें हुईं। क्राकाटोआ से निकलने वाली ज्वालामुखीय राख और गैसों के कारण वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन हुआ। जिसके कारण दुनिया भर में तापमान में भारी गिरावट आई और आसमान में अंधेरा छा गया।

टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट
पिछले साल सबसे तेज ध्वनि टोंगा में साल 2022 में हुए ज्वालामुखी विस्फोट में सुनी गई। ये एक बड़ी प्राकृतिक आपदा थी, जिसमें लगभग 3,850 मील दूर अलास्का में विस्फोट की ध्वनि सुनी गई। विस्फोट के बाद 700 मील प्रति घंटे की रफ्तार और 280 मील की ऊंचाई तक लहरे देखी गईं। जो कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षा से भी ऊपर थीं।
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