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भारत सरकार का दावा अंग्रेजों ने न चोरी किया था और न ही जबरन लिया था कोहिनूर हीरा

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नई दिल्‍ली। सरकार की ओर से एक आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि 108 कैरेट के कोहिनूर हीरे को न तो अंग्रेजों ने जबरन लिया था और न ही चुराया गया था। आरटीआई के मुताबिक इसे महाराजा रणजीत सिंह के उत्‍तराधिकारियों की ओर से आज से 170 वर्ष पहले सरेंडर किया गया था। लाहौर के महाराजा की ओर से इंग्‍लैंड की महारानी को कोहिनूर हीरा दिया गया था। अप्रैल 2016 में सरकार की ओर से यह जवाब दिया गया था। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हाल ही में आरटीआई के जवाब में सरकार के पक्ष का खंडन किया है कि हीरा वास्तव में लाहौर के महाराजा द्वारा इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया को 'सरेंडर' कर दिया था।

क्‍या पूछा गया था आरटीआई में

क्‍या पूछा गया था आरटीआई में

आरटीआई के जवाब में, सरकार ने कहा था कि महाराजा रणजीत सिंह के रिश्तेदारों ने कोहिनूर को अंग्रेजों को एंग्लो-सिख युद्ध के खर्चों को कवर करने के लिए 'स्वैच्छिक मुआवजे' के रूप में दिया था। लुधियाना के एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने आरटीआई दायर कर जानकारी मांगी थी कि किस आधार पर कोहिनूर ब्रिटेन को ट्रांसफर किया गया। रोहित सभरवाल ने आरटीआई पूछताछ दायर की थी जिसमें सूचनाएं मांग रही थीं कि कोहिनूर को ब्रिटेन में स्थानांतरित कर दिया गया था। पीएमओ की ओर से ये आरटीआई एएसआई में स्थानांतरित कर दी, जहां से सरेंडर की शर्तों की पूरी जानकारी दी गई है। आरटीआई में पूछताछ पूछा गया कि क्या यह भारतीय अधिकारियों द्वारा ब्रिटेन के लिए उपहार था या यदिस्थानांतरण का कोई अन्य कारण था।

200 मिलियन डॉलर का है कोहिनूर हीरा

200 मिलियन डॉलर का है कोहिनूर हीरा

एएसआई ने 10 अक्‍टूबर को अपने जवाब में कहा है, 'रिकॉर्ड के अनुसार, 1849 में लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दुलीप सिंह के बीच लाहौर संधि आयोजित की गई, कोहिनूर हीरा को लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की रानी को सरेंडर कर दिया गया।' एएसआई की ओर से बताया गया है कि 200 मिलियन डॉलर से ज्‍यादा कीमत वाले कोहिनूर हीरे को महाराजा दुलीप सिंह की इच्छा पर अंग्रेजों को नहीं सौंपा गया था।

दो वर्ष क्‍या कहा था सरकार ने

दो वर्ष क्‍या कहा था सरकार ने

इसके अलावा, संधि के समय दुलीप सिंह नाबालिग थे। हालांकि दो वर्ष पहले सरकार की ओर से इससे अलग दावा किया गया था। उस समय सॉलिसिटर जनरल की ओर से कहा गया था कि संस्कृति मंत्रालय का मानना है कि, भारत को 'कोहिनूर' का दावा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे न तो चोरी किया गया था और न ही जबरन लिया गया। उन्होंने कहा था कि 'कोहिनूर' को महाराजा रणजीत सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था।

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English summary
Kohinoor diamond was "surrendered" by the Maharaja of Lahore to the Queen of England and "not handed over" to the British according to an RTI reply.
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