सबसे बड़े संकट में घिर गया किम जोंग उन, जानिए क्यों दाने-दाने को मोहताज हुआ उत्तर कोरिया?
प्योंगयांग, 16 जून: उत्तर कोरिया का नेता किम जोंग उन पहली बार बहुत बड़ी मुसीबत में घिरा नजर आ रहा है। दरअसल, सनकी तानाशाह का यह देश इसबार अप्रत्याशित खाद्य संकट झेल रहा है और कोरोना वायरस महामारी के चलते उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतरी हुई नजर आ रही है। वहां सत्ताधारी पार्टी की सेंट्रल कमिटी की बैठक हुई है, जिसमें यही दोनों मुद्दे मुख्य रूप से चर्चा में शामिल किए गए हैं। दक्षिण कोरिया के थिंक टैंक का मानना है कि जो हालात बन गए हैं, किम उन के देश में स्थिति भयावह होते देर नहीं लगेगी।

दाने-दाने को मोहताज हुआ उत्तर कोरिया
कोरोना वायरस महामारी और भारी तूफान के चलते उत्तर कोरिया के सामने खाने के लाले पड़ने लगे हैं। खाद्य संकट से उबरने के लिए किम जोंग उन ने बुधवार को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से उपाय खोजने का आह्वान किया है। उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के अखबार रोडोंग सिन्मुन के हवाले से कहा गया है कि एक दिन पहले किम पार्टी की सेंट्रल कमिटी की पूर्ण बैठक में शामिल हुआ है। एनएचके वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक किम ने कहा है, 'लोगों के पास खाने की चीजों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि पिछले साल तूफान की वजह से देश में कृषि क्षेत्र में अनाज का अनुमानित उत्पादन तबाह हो गया।' किम ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से जो हालात बने हुए हैं, उसका मतलब है कि आपातकाल की ऐसी स्थिति लंबी चलेगी,जिसके चलते लोगों को खाद्य पदार्थों, कपड़ों और घरों के लिए जूझना पड़ेगा। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते सीमाएं सील हैं, जिससे इसके सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी चीन के साथ भी व्यापार ठप पड़ चुका है और वहां की अर्थव्यस्था और धाराशाही हो चुकी है।

'उत्तर कोरिया में 10 लाख टन कम पड़ेंगे अनाज'
हालांकि, उत्तर कोरिया पर नजर रखने वालों को अभी तक वहां बड़े पैमाने पर भुखमरी या बहुत बड़ी अस्थिरता के सीधे संकेत तो नहीं मिले हैं, लेकिन कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि खाद्य संकट के चलते हालात विस्फोटक होते देर नहीं लगेगी और इससे लोगों में बहुत भारी दहशत की स्थिति पैदा हो सकती है। दक्षिण कोरिया की सरकाक के थिंक टैंक कोरिया डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ने पिछले महीने कहा था कि उत्तर कोरिया को इस साल 10 लाख टन खाद्य पदार्थों की किल्लत झेलनी पड़ सकती है और अगर ऐसा हुआ तो वहां कोहराम मच सकता है।

गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर भी टेंशन में है तानाशाह
हालांकि, उत्तर कोरियाई अखबार की ओर से कहा गया है कि किम ने निर्देश दिए हैं कि वायरस के खिलाफ कदम जारी रखत हुए देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भी कदम उठाए जाएं। सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के अखबार रोडोंग सिन्मुन ने ये भी कहा है कि एक दिन पहले जिस बैठक में किम पहुंचा था, उसमें मौजूदा वैश्विक हालातों पर भी चर्चा की गई और पार्टी को मिले निर्देशों पर भी चर्चा हुई। इससे पहले शनिवार को रोडोंग सिन्मुन ने कहा था कि 'बैठक में भाग लेने वालों के बीच नेशनल डिफेंस के लेकर महत्वपूर्ण टास्क पर भी चर्चा की गई, जिसका फोकस कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास की हालातों में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ-साथ हमारी क्रांति के आंतरिक और बाहरी माहौल पर है।'

किम जोंग उन ने मिलिट्री को किया 'हाई अलर्ट'
लेकिन, इतने गंभीर खाद्य संकट के बावजूद सनकी तानाशाह ने मिलिट्री से कहा है कि वह देश की रक्षा के मिशन पर जुट जाने के लिए 'हाई अलर्ट' पर रहे। जानकारी के मुताबिक पर्यवेक्षक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी अपने परमाणु कार्यक्रमों और मिसाइल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के साथ ही अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर भी कोई नीति पेश करती है? उत्तर कोरिया ने अबतक दो साल से रुके पड़े परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने की सहयोगियों की मांग को नजरअंदाज ही किया है, जो कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में शुरू हुआ था।












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