Khamenei Funeral: क्या होता है गुस्ल, कफन और जनाजा? अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार से समझें शिया परंपराएं
Khamenei Funeral Process: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए 4 जुलाई 2026 से आधिकारिक शोक समारोह शुरू होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा के शामिल होने की खबर है।
ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि शिया मुस्लिम परंपरा में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि गुस्ल, कफन, जनाजा और दफ्न की रस्मों का क्या मतलब होता है।

गुस्ल क्या होता है? अंतिम यात्रा की पहली रस्म
शिया इस्लाम में किसी भी मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार की शुरुआत गुस्ल से होती है। गुस्ल का मतलब है मृत शरीर को धार्मिक तरीके से साफ करना। इसे सम्मान और पवित्रता की रस्म माना जाता है। सबसे पहले बेर या कमल के पत्तों वाला पानी इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद कपूर मिले पानी से शरीर धोया जाता है और आखिर में साफ पानी से अंतिम बार गुस्ल कराया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार की जाती है।
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कफन क्यों पहनाया जाता है?
गुस्ल के बाद मृत शरीर को सफेद सूती कपड़े में लपेटा जाता है, जिसे कफन कहा जाता है। शिया परंपरा में आमतौर पर तीन कपड़ों का इस्तेमाल होता है। पहला शरीर के निचले हिस्से को ढकता है, दूसरा शरीर के बीच वाले हिस्से के लिए होता है और तीसरा सिर से पैर तक पूरे शरीर को ढक देता है। इसके अलावा सजदे में जमीन से लगने वाले सात हिस्सों पर कपूर लगाया जाता है। यह सम्मान और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
जनाजा क्या होता है और इसमें क्या किया जाता है?
कफन पहनाने के बाद पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाता है। इसके बाद जनाजे की नमाज अदा की जाती है, जिसे नमाज-ए-जनाजा कहा जाता है। यह सामान्य नमाज से अलग होती है। इसमें रुकू और सजदा नहीं किया जाता। लोग मृतक की आत्मा की शांति और अल्लाह से रहमत की दुआ करते हैं। कई बार बड़े धार्मिक नेताओं के जनाजे में हजारों या लाखों लोग शामिल होते हैं।
दफ्न की रस्म कैसे पूरी होती है?
जनाजे के बाद शव को कब्रिस्तान ले जाकर दफनाया जाता है। कब्र इस तरह बनाई जाती है कि मृतक का चेहरा मक्का की दिशा में रहे। शव को कब्र में रखने के बाद कफन की गांठ खोल दी जाती है। इसके बाद चेहरे को जमीन की ओर और मक्का की दिशा में रखा जाता है। यह शिया और सुन्नी, दोनों परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बाद कब्र को बंद करने की तैयारी शुरू होती है।
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Shia Islamic Funeral Rituals में तल्कीन की रस्म क्यों होती है?
कब्र को पूरी तरह बंद करने से पहले शिया धर्मगुरु तल्कीन पढ़ते हैं। इसमें मृतक को उसके ईमान, अल्लाह और शिया इमामों की याद दिलाई जाती है। माना जाता है कि यह रस्म मृतक के लिए दुआ और मार्गदर्शन का प्रतीक है। तल्कीन के बाद लकड़ी के तख्तों या पत्थरों से कब्र को बंद किया जाता है। आखिर में कब्र को मिट्टी से भर दिया जाता है और अंतिम दुआ की जाती है।
शिया परंपरा में सादगी और सम्मान सबसे अहम
शिया इस्लाम में अंतिम संस्कार का पूरा तरीका सादगी, सम्मान और धार्मिक नियमों पर आधारित होता है। इसमें दिखावा या भव्यता की बजाय मृतक को सम्मानपूर्वक विदाई देने पर जोर दिया जाता है। गुस्ल, कफन, जनाजा, दफ्न और तल्कीन जैसी सभी रस्मों का अपना धार्मिक महत्व है। Ayatollah Ali Khamene जैसे बड़े धार्मिक नेता के अंतिम संस्कार में भी यही परंपराएं अपनाई जाएंगी, हालांकि सुरक्षा और सरकारी प्रोटोकॉल के कारण आयोजन का स्वरूप अधिक बड़ा और विशेष होगा।












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