Khamenei Funeral: खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे 2 दिग्गज नेता, PM मोदी नहीं जाएंगे

Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से कौन शामिल होगा, इस सवाल का जवाब अब सामने आ गया है। ईरान ने इस राजकीय कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया था, लेकिन उनका इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का पहले से तय विदेश दौरा होने की वजह से वह शामिल नहीं हो पाएंगे।

ऐसे में भारत सरकार ने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों नेता 4 जुलाई से शुरू होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

Khamenei funeral

पीएम मोदी की जगह ये दो नेता होंगे भारत के प्रतिनिधि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान की ओर से आधिकारिक निमंत्रण मिला था, लेकिन पहले से तय विदेश दौरे के कारण उनका जाना संभव नहीं हो सका। इसके बाद भारत सरकार ने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को प्रतिनिधि बनाया। दोनों नेता भारत सरकार की ओर से ईरान पहुंचकर अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसे भारत-ईरान रिश्तों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

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पांच दिनों तक चलेंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

ईरानी मीडिया के मुताबिक अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेंगे। 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसाला प्रार्थना हॉल में श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को तेहरान और धार्मिक शहर कोम में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। अलग-अलग देशों से आने वाले प्रतिनिधिमंडल इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे और खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

मशहद में होगा अंतिम संस्कार

9 जुलाई को अंतिम कार्यक्रम ईरान के पवित्र शहर मशहद में आयोजित किया जाएगा। यहीं अयातुल्लाह अली खामेनेई को शिया मुसलमानों के आठवें इमाम, इमाम रजा की दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। यह जगह दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। अंतिम दिन बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, विदेशी मेहमान और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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बिहार के राज्यपाल की मौजूदगी क्यों है खास?

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और फिलहाल बिहार के राज्यपाल हैं। रक्षा और रणनीतिक मामलों का उनका लंबा अनुभव रहा है। विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों नेताओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत इस कार्यक्रम को राजनयिक और कूटनीतिक स्तर पर गंभीरता से ले रहा है।

भारत-ईरान रिश्तों पर रहेगी दुनिया की नजर

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से राजनीतिक, व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं। ऐसे में खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की आधिकारिक मौजूदगी को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कार्यक्रम पर नजर रहेगी, क्योंकि कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि इसमें शामिल होने वाले हैं। भारत की ओर से भेजा गया प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के मजबूत रिश्तों का संदेश देगा।

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