Kamala Harris:अच्छी इडली और चेन्नई में लॉन्ग वॉक को आज भी कितना मिस कर रही हैं? जानिए
नई दिल्ली- अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन की पार्टी से वाइस प्रेसिडेंट पद की उम्मीदवार घोषित होने के बाद कमला हैरिस पहली बार भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच पहुंचीं तो उन्हें भारत से जुड़ीं तमाम यादें ताजा हो गईं। यह कार्यक्रम 15 अगस्त के मौके पर 'साउथ एशियंस फॉर बाइडेन' के नाम से आयोजित किया गया था। इस दौरान कमला हैरिस ने भारत से जुड़ी उन तमाम बातों को साझा करने का प्रयास किया, जो अबतक उनके मुताबिक उन्हें याद है। यही नहीं उनके जीवन में महात्मा गांधी की शिक्षा का भी बहुत महत्त्व है।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच कार्यक्रम
अमेरिका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन और उनकी उपराष्ट्रपति प्रत्याशी कमला हैरिस के कैंपेन मैनेजरों को इल्म है कि अगर दक्षिण एशियाई मूल के वोटरों को लुभाना है तो भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अब नजरअंदाज करना नामुमकिन है। क्योंकि, अमेरिका के कई राज्यों में भारतीय-अमेरिकी अब बहुत बड़े वोट बैंक बनकर उभर चुके हैं। यही वजह है कि इन्होंने इस समुदाय के बीच अपने कैंपेन की शुरुआत के लिए स्वतंत्रता दिवस की तारीख मुकर्रर की थी। जाहिर है कि इस मौके पर कमला हैरिस ने भारत और भारतीय-अमेरकियों को 74वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा, 'भारत के लोग और पूरे अमेरिका के भारतीय-अमेरकियों को मैं इंडेपेंडेंस डे के मौके पर शुभकामनाएं देती हूं। 15 अगस्त, 1947 को पूरे भारत में पुरुष और महिलाएं भारत देश की स्वतंत्रता की घोषणा से खुशी से झूम उठे थे। 15 अगस्त, 2020 को मैं अमेरिका में दक्षिण एशियाई वंश की पहली उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में आपके सामने खड़ी हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'पिछले 74 साल में हमने देखा है कि न्याय के लिए संघर्ष में हमारे लोगों ने कितनी असाधारण प्रगति प्राप्त की है। हमें उम्मीद है कि आज इसे मनाने और बेहतर भविष्य के निर्माण में आप सब मेरा साथ देंगे।'

भारत से जुड़ी हुई यादें
इस मौके पर हैरिस ने यह बताने की कोशिश की है कि कैसे और किन वजहों से वह आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक इसके लिए उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां श्यामाला गोपालन हैं। उन्होंने कहा, 'जब मेरी मां श्यामाला ने कैलिफोर्निया में 19 साल की उम्र में हवाई जहाज से कदम बाहर रखा, तो वह अपने साथ बहुत सारा सामान लेकर नहीं आई थीं, लेकिन वह घर से कई बातें सीख कर आई थीं, उसमें वे बातें भी शामिल थीं जो उन्होंने अपने माता-पिता, मेरी नानी राजम और मेरे नाना पीवी गोपालन से सीखी थी। उन्होंने उन्हें सिखाया था कि जब भी दुनिया में अन्याय देखो, यह तुम्हारी जिम्मेदारी है कि उसके लिए कुछ करो, इसी से प्रभावित होकर मेरी मां ने सिविल राइट्स मूवमेट के दौरान ओकलैंड में सड़कों पर उतरकर नारे लगाए और मार्च किया।' इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी की शिक्षाओं को भी याद किया और बोलीं, 'एक ऐसा आंदोलन जिसमें डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेता शामिल थे, वे खुद महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से प्रभावित थे, उसी प्रदर्शन के दौरान मेरी मां, मेरे पिता से मिली थी'

चेन्नई की लॉन्ग वॉक और अच्छी इडली है याद
भारत से अपनी जड़ों को और मजबूत दिखाते हुए हैरिस बोलीं, बड़े होने पर मां मुझे और मेरी बहन माया को मद्रास लेकर जाया करती थीं, ताकि वो हमें अपनी जड़ें और हमारे वंशजों के बारे में पता रहे। उन्होंने बताया कि उनकी मां हमेशा से उनमें अच्छी इडली के लिए प्यार पैदा करना चाहती थीं। वो कहती हैं, "मद्रास में मैं अपने नाना जी के साथ लॉन्ग वॉक पर जाती थी, जो उस समय रिटायर हो चुके थे। सुबह की सैर करने जाते थे जहां मैं उनका हाथ पकड़कर चलती थी और वो मुझे उन नायकों के बारे में बताया करते थे, जिन्होने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के जन्म में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उनका मानना था कि अब हमें उन बातों को आगे बढ़ाना है जो हमारे हीरो छोड़ गए थे। वो सबक एक बहुत बड़ी वजह है जो मैं आज यहां पर हूं।'

भारतीय वोट भी हो चुके हैं अहम
दरअसल, अमेरिका में हालिया नस्लवादी घटनाओं के बाद चुनाव के लिए एक अलग तरह का माहौल पैदा हो रहा है। शायद डेमोक्रैट उस बदली परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठा लेना चाहते हैं। कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के पीछे भी यह मंशा बताई जा रही है। यही वजह है कि कार्यक्रम के शुरू में उपस्थित लोगों से कमला हैरिस का परिचय कराते हुए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने कहा, 'मेरी प्यारी साथी कमला हैरिस अमेरिका के इतिहास की पहली भारतीय-अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनेंगी। हम सभी जानते हैं कि ये स्मार्ट हैं, यह जांची-परखी हुई हैं, यह तैयार हैं, लेकिन एक और बात जो कमला को लेकर इतनी प्रेरणादायक हैं, वो हैं उनकी मां की अमेरिका की अप्रवासी होने की कहानी, जो कि भारत में शुरू हुई और उनके साहस की वजह से उनकी बेटियां आज इस मुकाम पर हैं। मुझे पता है कि आपको कितना गर्व हो रहा है। यह आपके परिवार के त्याग और साहस की भी कहानी है। आप हमारे समुदायों और देश के स्तंभ बन चुके हैं। '












Click it and Unblock the Notifications