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चीन को रोकने के लिए अमेरिका-जापान में ऐतिहासिक समझौता, वॉशिंगटन से बीजिंग को भेजा गया सख्त संदेश

चीन की आक्रामकता के खिलाफ अमेरिका और जापान के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है। जापान और अमेरिका साथ मिलकर चीन को साउथ चायना सी और इस्ट चायना सी में रोकेंगे।

वॉशिंगटन, अप्रैल 17: चीन के खिलाफ जापान और अमेरिका में ऐतिहासिक समझौता किया गया है, जिसके तहत इस्ट चायना सी और साउथ चायना सी में जापान और अमेरिका एक साथ मिलकर चीन की चुनौतियों का जबाव देंगे। अमेरिका और जापान के बीच इस बात को लेकर भी सहमति बन गई है कि चीन अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है, लिहाजा दोनों देश एक साथ चीन का विरोध करेंगे। अभी जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने चीन के खिलाफ कई तीखे बयान दिए हैं और माना जा रहा है कि जापानी प्रधानमंत्री के बयान के बाद चीन का बौखलाना तय है।

चीन के खिलाफ अमेरिका-जापान

चीन के खिलाफ अमेरिका-जापान

जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने अमेरिका दौरे के दौरान कहा है कि जापान और अमेरिका साथ मिलकर चीन की आक्रामत नीति का विरोध करेगें। साउथ चायना सी और इस्ट चायना सी में भी दोनों देश एक साथ आएंगे। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात के बाद जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने चीन को लेकर काफी आक्रामक बयान दिए हैं। पिछले दो महीने के दौरान ये दूसरा मौका है जब जापान ने सीधे तौर पर चीन का नाम दुश्मन देश के तौर पर लिया है और चीन को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया है। जापानी प्रधानमंत्री ने अमेरिकन राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात हुई है लेकिन केन्द्र चीन ही था। (तस्वीर- व्हाइट हाउस में जापान के प्रधानमंत्री और अमेरिका की उपराष्ट्रपति)

चीन के खिलाफ ‘एक्शन प्लान’

चीन के खिलाफ ‘एक्शन प्लान’

अमेरिका दौरे पर आए जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि 'जापान और अमेरिका सहमत हुए हैं कि हम इस्ट चायना सी और साउथ चायना सी में अगर चीन स्थिति को बदलने की कोशिश करता है या फिर किसी क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो हम साथ उसका मुकाबला करेंगे लेकिन चीन को किसी भी हाल में वर्तमान परिस्थिति और वर्तमान व्यवस्था को बदलने नहीं देंगे'। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में ताइवान पर दबाव बनाने के लिए चीन की सेना लगातार ताइवान के स्वामित्व वाले समुन्द्री हिस्से में अपना एयपक्राफ्ट कैरियर भेज रहा है साथ ही चीन ने ताइवान पर हमले की भी चेतावनी दी है, जिसको लेकर अमेरिका और जापान ने चिंता जताई है। वहीं, इस्ट चायना सी में सेनकाउ आइलैंड को लेकर भी जापान चिंतित है, जो जापान का हिस्सा है लेकिन चीन उसपर अपना दावा करता है। पिछले महीने चीन ने अपना एयरक्राफ्ट सेनकाउ आइलैंड की तरफ भेजने की कोशिश भी की थी। इस आइलैंड पर वर्तमान में जापान का शासन है लेकिन चीन लगातार इसे हड़पने की कोशिश में लगा हुआ है।

चीन को जबाव

चीन को जबाव

अमेरिका दौरे पर गये जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने चीन को कई सख्त संदेश देने की कोशिश की है। खासकर अमेरिका ने जापान ने चीन को शांति का पैगाम पहुंचाने की कोशिश की है। अमेरिका और जापान के बीच ताइवान स्ट्रेट में शांति स्थापना करने के लिए भी चर्चा की गई है। दोनों देश इस बात को लेकर सहमत हुए हैं कि ताइवान स्ट्रेट में लगातार चीन अपनी मिलिट्री शक्ति में इजाफा कर रहा है, लिहाजा चीन को जबाव देने के लिए दोनों देशों को एकसाथ आना चाहिए। वहीं, जापानी एक्सपर्ट्स का मामना है कि ताइवान को लेकर जापान इससे पहले इतना आक्रामक कभी नहीं था। जापानी एक्सपर्ट माइकल ग्रीन, जो सेन्टर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज, वॉशिंगटन में पढ़ाते हैं, उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा है कि 'ताइवान को लेकर जापान इससे पहले इतना आक्रामक पहले कभी नहीं था। जापान और अमेरिका ने 1970 में चीन के साथ अपने डिप्लोमेटिक संबंध बहाल किए थे और ये पहला मौका है जब जापान ने ताइवान को लेकर सीधे तौर पर चीन को आक्रामक जबाव दिया है'

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