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गाजा युद्ध का मुसलमानों ने ले लिया बदला, बाइडेन को मिशिगन में नहीं दिया वोट, राष्ट्रपति चुनाव हार जाएंगे?

2020 में हुए अमेरिका चुनाव में जो बाइडेन ने डोनाल्ड ट्रंप को बेहद करीबी अंतर से हराया था। तब ये माना गया कि मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, विस्कॉन्सिन जैसे महत्वपूर्ण स्विंग स्टेट्स में अमेरिकी-अरबी मुसलमानों की एकतरफा वोटिंग ने उन्हें ये जीत दिलाई है।

अब, चार साल बाद एक बार फिर से जो बाइडेन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला होने की संभावना दिखाई दे रही है तो सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस बार भी अमेरिकी-अरबी मुस्लिम जो बाइडेन के पक्ष में वोटिंग करेंगे?

American Muslims will increase Bidens problems

दरअसल इजराइल-हमास युद्ध पर राष्ट्रपति जो बाइडेन की प्रतिक्रिया ने उस राज्यों में गुस्सा पैदा कर दिया है जिन्होंने उन्हें 2020 में जीत दिलाने में मदद की थी। मिशिगन वो राज्य है जिसे 2016 में महज 10,000 वोटों के अंतर से डोनाल्ड ट्रंप ने जीता था। लेकिन चार साल बाद हुए चुनाव में इस सीट को डेढ़ लाख मतों के अंतर से बाइडेन ने जीत लिया।

गाजा पर अभूतपूर्व बमबारी के बाद मिशिगन जैसे राज्यों में अब अरब-अमेरिकी और मुस्लिम मतदाता ये दावा कर रहे हैं कि वे इस बार होने वाले चुनाव में मतदान से दूर रहेंगे। वे किसी भी कीमत पर बाइडेन को अपना समर्थन नहीं देंगे। यूं तो अरब-अमेरिकी मुसलमान अमेरिकी आबादी का बहुत छोटा सा हिस्सा हैं मगर मिशिगन जैसे राज्यों में उनकी आबादी बहुत मायने रखती है।

अरब और मुस्लिम समुदायों का कहना है कि उन्होंने जो बाइडेन प्रशासन से गाजा में हत्याओं को रोकने का आह्वान किया था, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इन मुस्लिम समुदाय की मांग है कि अमेरिका को इजराइल को दी जाने वाली सैन्य फंडिंग को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए।

जैसा कि पहले से अनुमान लगाया जा रहा था बाइडेन ने मिशिगन में भले ही जीत हासिल कर ली है मगर शुरुआती गणना से पता चलता है कि गाजा पर इजरायल के युद्ध के लिए उनके समर्थन की उन्हें कीमत चुकानी पड़ी है।

मिशिगन प्राइमरी चुनाव में बाइडेन को 80 फीसदी से अधिक मत भले ही मिले हैं मगर लगभग 14.5 फीसदी मत ऐसे भी हैं जिन्होंने किसी प्रत्याशी को अपना वोट नहीं दिया है। ये एक बड़ा आंकड़ा है।

अरब अमेरिकी संस्थान के अनुसार अमेरिका में लगभग 45 लाख मुस्लिम अमेरिकी रहते हैं, जो अमेरिका की आबादी का लगभग 1 फीसदी है। लेकिन मिशिगन, जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा और वर्जीनिया जैसे अमेरिकी राज्यों में इस समुदाय के लोगों की काफी आबादी है। इनमें से कम से कम तीन राज्य जॉर्जिया, मिशिगन और पेंसिल्वेनिया नवंबर के चुनाव में बैटलग्राउंड स्टेट बनने जा रहे हैं।

मिशिगन में जहां ट्रंप की पिछली बार महज डेढ़ लाख वोटों से हार हुई थी वहां पर लगभग 3 लाख लाख मुस्लिम रहते हैं। पिछली बार इस राज्य के लगभग सभी 5 फीसदी मुसलमानों का मत डेमोक्रेटिक पार्टी को मिला था। पिछली बार जॉर्जिया में जो बाइडेन को 12,000 से भी कम वोटों से जीत हासिल हुई थी। इस राज्य में 57,000 से अधिक अरब अमेरिकी रहते हैं।

स्विंग स्टेट गंवा रहे बाइडेन?

इस बार अगर ये मुस्लिम बाइडेन को अपना समर्थन नहीं देते हैं तो डेमोक्रेट्स आसानी से ये अहम स्विंग स्टेट्स गंवा देंगे। इसके संकेत मिलने भी लगे हैं। साल 2020 में अमेरिकी अरबों के बीच जो बाइडेन की अनुमोदन रेटिंग 59 फीसदी थी जो कि 2023 में गाजा युद्ध के बाद घटकर महज 17 फीसदी हो गई है।

लगभग 45 लाख अमेरिकी मुसलमान हैं। इनमें से लगभग 35 लाख मुस्लिम पाकिस्तानी और भारतीय मूल के हैं। ये सभी परंपरागत रूप से डेमोक्रेट्स को वोट देते हैं। हालांकि इनका भी बाइडेन पर से विश्वास उठ चुका है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक अमेरिका में सिर्फ 5 फीसदी मुस्लिम ही ऐसे हैं जिन्होंने बाइडेन को अगले चुनाव में वोट करने की बात कही है।

नो वोटिंग का क्या प्रभाव पड़ेगा?

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि, चाहे अमेरिकी मुस्लिम अपना वोट रोकें या ट्रम्प को दे दें... मुस्लिम और अरब-अमेरिकी वोटों से जो बाइडेन के अभियान में कोई बड़ी सेंध नहीं लगने वाली है क्योंकि वे कुल मतदान करने वाली आबादी का केवल 2 से 3 प्रतिशत हैं। यदि बाइडेन अमेरिकी-अरब मुसलमानों का दिल जीतने के लिए कोई कदम उठाते हैं तो वे एक बड़ी आबादी का समर्थन खो देंगे।

इस तरह के परिदृश्य से ट्रंप के निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी। ट्रंप तो पहले ही ये घोषणा कर चुके हैं कि वे कई मुस्लिम-बहुल देशों से अमेरिका की यात्रा पर विवादास्पद प्रतिबंध वापस लाएंगे।

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