NASA की ‘बिंदी’ वाली भारतीय बिटिया के जबरा फैन हुए जो बाइडेन, भारतीयों की शान में पढ़े कसीदे

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नासा की वैज्ञानिक डॉ. स्वाती मोहन से बात की और अमेरिका को आगे ले जाने के लिए भारतीय मूल के लोगों की जमकर तारीफ की।

वाशिंगटन: अमेरिका की स्पेस एंजेसी नासा में भारतीय वैज्ञानिकों का दबदबा माना जाता है और नासा में कई महत्वपूर्ण पदों पर भारतीय वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। 18 जनवरी को जब नासा ने मंगलग्रह पर कामयाबी के साथ पर्सिवरेंस रोवर मिशन की लैंडिंग कराई तो भारत की बेटी स्वाती मोहन ने कामयाबी का डंका पूरी दुनिया में बजा दिया। और अब भारत की बिटिया स्वाती मोहन की मुरीद खुद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन हो गये हैं। डॉ. स्वाती मोहन से अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद बात की और इस दौरान उन सभी भारतीय अमेरिकियों को थैंक्यू कहा जिन्होंने अमेरिका के विकास में अपना योगदान दिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और अपने स्पीच राइटर डॉ. विनय रेड्डी को भी धन्यवाद कहा।

स्वाती मोहन से बाइडेन ने की बात

स्वाती मोहन से बाइडेन ने की बात

अमेरिका के राष्ट्रपति ने नासा के कामयाब मिशन के बाद भारतीय मूल की वैज्ञानिक डॉ. स्वाती मोहन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बात की और नासा में दिए गये उनके योगदान को जमकर सराहा है। राष्ट्रपति कहा कि 'आपसे बात करना मेरे लिए गर्व की बात है'

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान नासा की मंगल मिशन टीम से बात करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डॉ. स्वाती मोहन ने से कहा कि 'अमेरिका को आगे बढ़ाने में भारतीय वैज्ञानिकों का बेहद अहम योगदान रहा है। भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमेरिका को नेक्स्ट लेवल पर ले जा रहे हैं। और आप लोगों से बात करना मेरे लिए गर्व की बात है। अमेरिका को आगे बढ़ाने में भारतीय वंशजों का बेहद अहम योगदान है। आप, अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, मेरे स्पीच रायटर विनय रेड्डी। मैं आप लोगों की तारीफ में क्या कहूं। बस इतना कह सकता हूं कि ...थैंक्यू। आप लोग अविश्वसनीय हैं।'

नासा टीम से बात करते हुए करीब 10 मिनट तक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारतीय मूल के लोगों की जमकर तारीफ की और अमेरिका की यात्रा में भारतीय लोगों के शामिल होने की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि 'आप लोगों ने कमाल कर दिया। मैं आप लोगों से क्या कहूं। आप लोगों ने अमेरिकन्स के अंदर फिर से आत्मविश्वास को ला लिया है। देश को आप लोगों पर हमेशा से विश्वास रहा है और आपने एक बार फिर इसे साबित किया है'। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नासा के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि 'आपने मंगल ग्रह पर रोवर को कामयाबी के साथ उतार दिया है तो हम कह सकते हैं कि हम कोरोना महामारी को भी हरा सकते हैं और ऐसा कोई चीज नहीं है जो अब अमेरिका नहीं कर सकता है'

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    नासा की शान डॉ. स्वाती मोहन

    नासा की शान डॉ. स्वाती मोहन

    203 दिन में 472 मिलियन किलोमीटर की यात्रा करने के बाद नासा का पर्सिवरेंस रोवर मंगल ग्रह (लाल ग्रह) पर पहुंचा। सात महीने पहले मार्स पर्सिवरेंस रोवर ने धरती से टेकऑफ किया था। पिछले सात महीनों से नासा के वैज्ञानिकों की टीम इसपर निगाहें बनाई हुई थीं। इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बनने वाले वैज्ञानिकों में, भारतीय-अमेरिकी डॉ. स्वाति मोहन भी शामिल थीं, जिनको लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने महत्वपूर्ण बातें कहीं है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने स्वाकी मोहन की नासा में दिए गये अहम योगदान को जमकर सराहा है। जब सारी दुनिया इस रोवर के ऐतिहासिक लैंडिग को देख रही थी उस दौरान कंट्रोल रूम में बिंदी लगाए स्वाति मोहन जीएन एंड सी सबसिस्टम और पूरी प्रोजेक्ट टीम को लीड कर रही थीं। स्वाती मोहन की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं । इस मिशन की सफलता में भारतीय-अमेरिकी डॉ स्वाति मोहन ने अहम भूमिका निभाई है।

    कौन हैं डॉ. स्वाती मोहन

    कौन हैं डॉ. स्वाती मोहन

    मिशन की सफलता पर स्वाति मोहन ने कहा था 'मंगल ग्रह पर हमारे रोवर के टचडाउन की पुष्टि हो गई है। अब ये वहां जीवन के संकेतों की तलाश शुरू करने के लिए तैयार है।" स्वाति मोहन नासा के विकास प्रक्रिया के दौरान प्रमुख सिस्टम इंजीनियर होने के अलावा टीम की देखभाल भी करती हैं और GN&C के लिए मिशन कंट्रोल स्टाफिंग का शेड्यूल भी करती हैं। नासा की वैज्ञानिक डॉ. स्वाति मोहन जब एक साल की थीं तो भारत से अमेरिका गई थीं। उन्होंने अपना अधिकांश बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में बिताया है।

    9 साल की उम्र में, पहली बार स्वाति मोहन ने जब 'स्टार ट्रेक' देखा तो वह ब्रह्मांड के नए क्षेत्रों के सुंदर चित्रणों से काफी हैरान थीं। उसी वक्त स्वाति को ब्रह्मांड की दुनिया में दिलचस्पी हो गई। उसने तब अपना मन बनाया कि वह ब्रह्मांड में नए और सुंदर स्थान ढूंढने का काम करेंगी। हालांकि स्वाति मोहन के उनके करियर विकल्पों में 16 वर्ष की उम्र तक बाल रोग विशेषज्ञ बनना भी शामिल था।

    स्वाति मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है। उसके बाद वह एयरोनॉटिक्स / एस्ट्रोनॉटिक्स में एमआईटी से एमएस और पीएचडी पूरी की। स्वाति मोहन पासाडेना सीए में नासा के जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला में शुरुआत से ही मार्स रोवर मिशन की मेंबर रही हैं। इसके अलावा भी स्वाति मोहन नासा के कई अहम मिशनों का हिस्सा रह चुकी हैं। भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक स्वाति मोहन ने नासा के कैसिनी (शनि के लिए एक मिशन) और GRAIL (चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उड़ाए जाने की एक जोड़ी) मिशन पर काम कर चुकी हैं।

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