चीन के खिलाफ जापान ने बनाई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, क्यों नाराज हो गया दोस्त दक्षिण कोरिया?
जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर दक्षिण कोरिया ने आपत्ति जताई है। इन दोनों देशों को लेकर एक द्वीप को लेकर विवाद है। दोनों ही देश एक ही द्वीप पर दावा कर रहे हैं।

जापान ने एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति अपनाते हुए पड़ोसी देशों चीन और उत्तर कोरिया के खतरों के खिलाफ खुद को और अधिक समक्ष बनाने के वास्ते भारत सहित अन्य देशों के साथ अपना रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। हालांकि जापान की नई सुरक्षा रणनीति को लेकर उसका पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में नाराजगी है। दक्षिण कोरिया ने एक अभूतपूर्व सैन्य निर्माण के लिए टोक्यो की योजनाओं का जवाब देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में विवादित द्वीपों पर जापान के क्षेत्रीय दावे के खिलाफ एक मजबूत विरोध जारी किया है।

जापान पर नाराज हुआ दक्षिण कोरिया
जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर दक्षिण कोरिया ने आपत्ति जताई है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जापान के राष्ट्रीय रणनीति दस्तावेजों से क्षेत्रीय दावों को तत्काल हटाने की मांग करते हुए एक बयान में कहा कि जापान के ऐसे कदम से दोनों देशों के बीच 'भविष्य-उन्मुख संबंध' बनाने में बाधक साबित होंगे। द. कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे उम्मीद है कि जापान की नई सुरक्षा नीति का कार्यान्वयन पारदर्शी होगा और संविधान की भावना को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देगा। इसके साथ ही मंत्रालय ने विरोध दर्ज कराने के लिए सियोल में जापान के दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक को भी तलब किया है।

विवाद क्यों हुआ?
जापान ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में विवादित द्वीपों पर अपना दावा किया है। इन द्वीपों में जापान ने ताकेशिमा द्वीप का भी जिक्र किया है। ताकेशिमा द्वीप को दक्षिण कोरिया में डोक्डो द्वीप के नाम से जाना जाता है। इस द्वीप को दक्षिण कोरिया की तटरक्षक सेना नियंत्रित करती है। जापान बार-बार इस द्वीप पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिण कोरिया का 'अवैध रूप से कब्जा' बताता है। एक बार फिर जापान द्वारा इसे अपना बताए जाने पर दक्षिण कोरिया नाराज हो गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में क्या है?
शनिवार को जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक राष्ट्र के रूप में जापान मुक्त प्रयासों को बढ़ावा देगा। जापान की ओर से कहा गया है कि वह अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया-भारत (क्वाड) साझेदारी जैसे प्रयासों के माध्यम से समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग को और मजूबत करेगा। इसके साथ ही जापान का कहना है कि वह ऑस्ट्रेलिया, भारत, कोरिया गणराज्य, यूरोपीय देशों, आसियान देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाएगा। इसके अलावा जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान विचारधारा वाले देशों और अन्य लोगों के साथ संबंधों को भी मजबूत करने का प्रयास करेगा।

जापान ने चीन की नीतियों का किया विरोध
वहीं जापान ने चीन की नीतियों का भी विरोध किया है। कहा गया है कि जापान चीन के बढ़ते प्रयासों और बलपूर्वक यथास्थिति को एकतरफा बदलने की नीति का पुरजोर विरोध करेगा। जापान ऐसे प्रयासों का शांत और दृढ़ तरीके से जवाब भी देगा। आपको बता दें कि जापान ने शुक्रवार को 35 हजार करोड़ डॉलर के हथियार खरीदने का ऐलान किया था। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने देश के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार सेना निर्माण की घोषणा की है। जापान ने एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा योजना के तहत दोगुना से भी ज्यादा रक्षा बजट का ऐलान किया।

ताइवान के बाद जापान का नंबर!
जापान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह चीन से होने वाले खतरे को देखते हुए ये तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री किशिदा ने शुक्रवार को कहा, "हम में से हर कोई इस बात से वाकिफ है कि हम अपने देश की सुरक्षा कर रहे हैं। यह बहुत ही जरूरी है क्योंकि हमनें यूक्रेन में देखा है कि क्या हुआ है। हम अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को बदल रहे हैं। हमें आपातकाल की स्थिति में और विशिष्ट परिस्थितियों में दूसरे देश के क्षेत्र पर सीधे हमला करने की क्षमता रखनी पड़ेगी।" जापान को यह भी डर है, कि आने वाले वक्त में चीन उसके सेनकाकू द्वीप पर भी कब्जा करने की कोशिश करेगा, लिहाजा अब जापान ने अपनी सेना के निर्माण की घोषणा कर दी है।












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