Japan Rice Price: जापान के कृषि मंत्री को अचानक देना पड़ा इस्तीफा, वजह बने घर में रखे चावल
Japan Rice Price: दाने-दाने को मोहताज वाला मुहावरे आपने जरूर सुना होगा, लेकिन चावल के दाने के चक्कर में किसी को सत्ता की कुर्सी का मोहताज होते शायद ही सुना हो, लेकिन ऐसा हुआ है। दरअसल जापान के कृषि मंत्री ताकू एतो ने चावल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया। हंगामा तब शुरू हुआ जब एतो ने जापान में चावल की बढ़ती कीमतों के बीच ऐसा बयान दे दिया असंवेदनशील माना गया। गिफ्ट में मिले चावल मंत्री महोदय को इतने महंगे पड़े कि उनकी मंत्रालय से ही विदाई हो गई।
जापान और महंगे चावल
जापान में चावल की मांग भारत के बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों की तरह ही काफी है। लेकिन, जापान को वर्तमान में चावल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा पैदा हो गया, चूंकि चावल की कीमत लगातार बढ़ रही है जबकि आपूर्ति सीमित बनी हुई है।

मंत्री का बेतुका बयान जिससे गई कुर्सी
रविवार को सरकारी भंडारित चावल के वितरण के बारे में एक भाषण के दौरान, एतो ने टिप्पणी की, "मैंने खुद कभी चावल नहीं खरीदा। ईमानदारी से कहूं तो, मेरे समर्थक मुझे बहुत सारा चावल गिफ्त में देते हैं। मेरे घर की पेंट्री में इतना चावल है कि मैं उसे बेच सकता हूं।" चावल की कमी के बीच मंत्री महोदय का ये बयान उनके पद हिसाब से बेहूदा माना गया। जिसके कारण पूरे जापान में उनका विरोध होने लगा। बचा-कुचा काम मीडिया ने उनके बयान को छापते हुए उनकी आलोचना के साथ कर दिया।
पीएम इशिबा ने झाड़ा पल्ला
प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने एतो के बयान से खुद को अलग कर लिया। ये ठीक वैसा ही था जैसे भारत में कोई नेता घटिया बयान दे देता है तो पार्टी के आला अधिकारी उसे 'पार्टी लाइन का बयान नहीं था' कह कर दाएं-बाएं होने लगते हैं। लोगों इसे महंगाई से जूझ रही जनता और चावल उत्पादन के लिए कड़ी मेहनत करने वाले किसानों दोनों के लिए अपमानजनक बताया। इसके बाद पीएम इशिबा ने एतो से ईमानदारी से माफ़ी मांगा लिया। एतो को ना चाहते हुए भी भी राजनीतिक शिष्टाचार निभाते हुए पद से इस्तीफा देना पड़ा।
जनता की प्रतिक्रिया और इस्तीफ़ा
एतो ने शुरू में अपने बयान के लिए माफ़ी मांगी, लेकिन आखिरकार बुधवार को मामले ने इतना तूल पकड़ा कि प्रधानमंत्री कार्यालय जाकर एतो को इस्तीफ़ा देना पड़ा। उन्होंने माना कि ऐसे समय में जब लोग चावल की बढ़ी हुई कीमतों और कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था जो जनता को ठेस पहुंचा दे। इस्तीफ़ा देते समय एतो ने कहा कि उन्हें लगता है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनके लिए अपनी भूमिका में बने रहना उचित नहीं है। उन्होंने चावल की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आगे भी वह सरकार का इस मामले में सहयोग करते रहेंगे। एतो ने अपने पिछले बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे खुद चावल खरीदते हैं और केवल गिफ्ट के भोरोसे नहीं रहते। इस बयान वापसी के बावजूद जनता ने उन्हें माफ नहीं किया और विरोध जारी रहा।
जापान में कितना महंगा हुआ चावल
कृषि मंत्रालय ने बताया कि 11 मई के सप्ताह में चावल की कीमतों में फिर से उछाल आया। देश भर में लगभग 1,000 सुपरमार्केट में चावल के 5 किलो के बैग की औसत कीमत 4,268 येन ($29.5) थी, जो पिछले सप्ताह से 54 येन हो गई, इस तरह से चावल 1.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। यह कीमत मई 2024 में रही कीमत 2,108 येन के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है। ये बताता है कि जापान में चावल मौजूदा सरकार के हाथ से खिसक रहा है और जापान में सिर्फ चावल के मुद्दे पर सरकार को घेरना काफी आसान भी है। यदि कीमतें कम नहीं हुई तो सरकार के लिए आने वाले दिन कठिन हो सकते हैं।
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