IMF से जितना कर्ज मांग रहा है पाकिस्तान, उससे दोगुना है जम्मू-कश्मीर का बजट, शहबाज शरीफ देखिए आंकड़े

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (पीओके) के बजट में हर साल कमी की जा रही है, लिहाजा अब पीओके में पाकिस्तान विरोधी नारे लगने लगे हैं। पाकिस्तान में आटे की लाइन में लगने से अभी तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है।

Pakistan Bailout Package vs Kashmir Budget

Pakistan Bailout Package vs Kashmir Budget: दशकों से पाकिस्तान, जम्मू कश्मीर पर कब्जा करने के लिए पगलाया हुआ है और माना जाता है, कि कश्मीर पर हद से ज्यादा पागलपन ने ही पाकिस्तान को दिवालिएपन की दहलीज पर ला खड़ा किया है। लेकिन, दस्तावेजों से मिली जानकारी में एक दिलचस्प बात का खुलासा हुआ है और पता चला है, कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से जितना बेलऑउट पैकेज मांग रहा है, उससे दोगुना जम्मू-कश्मीर का बजट है। लिहाजा, अब लोग पाकिस्तान की सरकार को कह रहे हैं, कि वो किस सपने में जी रहा है।

कश्मीर का बजट बनाम पाकिस्तान का बेलऑउट पैकेज

दस्तावेजों के अनुसार, पिछले महीने घोषित भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का बजट, IMF के पाकिस्तान के बेलआउट पैकेज के आकार का दोगुना है। जम्मू-कश्मीर का बजट 1,18,500 करोड़ रुपये (14.5 अरब डॉलर) है, जबकि पाकिस्तान ने आईएमएफ से 7 अरब डॉलर की मांग रखी है, जो उसे आईएमएफ से नहीं मिल रहे हैं। पाकिस्तान, फिलहाल आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की लोन की किश्त मांग रहा है, जो उसे आईएमएफ से नहीं मिल रहा है। आईएमएफ लगातार पाकिस्तान को लोन की किश्त के लिए नचा रहा है, जबकि यहां सिर्फ जम्मू-कश्मीर का बजट ही आईएमएफ के कुल बेलऑउट पैकेज का दोगुना है।

विकास के रास्ते पर बढ़ता जम्मू-कश्मीर

भारत सरकार ने 13 मार्च को जम्मू-कश्मीर का बजट जारी किया है औऱ भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 38 मिलियन डॉलर (31.17 अरब रुपये) की लागत से 8.45 किमी काजीगुंड-बनिहाल सुरंग सहित कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को हाईलाइट किया है, जो श्रीनगर और जम्मू के बीच यात्रा के समय को कम करेगा। इस प्रोजेक्ट के फाइनल होने के बाद श्रीनगर से जम्मू जाने में सिर्फ 5 घंटे का समय लगेगा। सीतारमण ने कहा, कि "कश्मीर के इस साल अंत तक रेल नेटवर्क के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जुड़ने की संभावना है।" वहीं, दूसरी तरफ पाकिस्तान का बजट कश्मीर के मुकाबले फीका है। इस्लामाबाद सरकार ने पिछले साल जून में घोषित अपने बजट में विकास कार्यक्रमों के लिए सिर्फ 2.6 अरब डॉलर का बजट जारी किया है। यानि, 2.6 अरब डॉलर में पूरे साल पाकिस्तान में विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिसे पाकिस्तान में सार्वजनिक क्षेत्र विकास कार्यक्रम (PSDP) कहा जाता है। इसके अलावा, पीएसडीपी ने साल-दर-साल 19 फीसदी की कटौती देखी है, जिससे देश की विकास प्राथमिकताएं प्रभावित हुई हैं।

पाकिस्तान का कुल बजट कितना है?

पिछले साल जून में, पाकिस्तान के तत्कालीन वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने वित्तीय वर्ष 2022-2023 के लिए 33.4 अरब डॉलर का संघीय बजट पेश किया था। यानि, अकेले जम्मू-कश्मीर का बजट 14 अरब डॉलर से ज्यादा और पाकिस्तान का कुल बजट 33.4 अरब डॉलर। ऐसे मे सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं, कि अगर कश्मीर को पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया, तो पाकिस्तानी सरकार, कश्मीर को भी कंगाल कर देंगे। कई लोग पूछ रहे हैं, कि क्या इसीलिए पाकिस्तान कश्मीर को अपना हिस्सा बनाना चाहता है। पाकिस्तान के बजट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का बजट सिर्फ 575.9 मिलियन डॉलर (164 अरब पाकिस्तानी रुपये) आवंटित किया गया था। आपको बता दें, कि पीओके में अभी भी सही से मोबाइल टावर नहीं हैं और पीओके में मोबाइल सिम, पाकिस्तान की सेना बांटती है। वहीं, पीओके के बजट में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे स्थानीय आबादी में बेचैनी है।

महाकंगाल हो चुका है पाकिस्तान

आपको बता दें, कि पाकिस्तान महाकंगली के दौर से गुजर रहा है और देश के पास दो रोटी के लाले पड़ गये हैं। मार्च 2023 के लिए पाकिस्तान की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, देश वर्तमान में नकदी की कमी का सामना कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तानी सरकार "आईएमएफ के ईएफएफ कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए हाथ पैर मार रही है," लेकिन आईएमएफ से पाकिस्तान को कर्ज की किश्त नहीं मिल रही है। पाकिस्तान में महंगाई ने पिछले 50 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। जबकि, जम्मू और कश्मीर और पाकिस्तान के बजट के बीच का अंतर, दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक विकास और विकास में भारी अंतर को उजागर करता है। जहां भारत सरकार, जम्मू और कश्मीर में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं में अरबों का निवेश कर रही है, वहीं पाकिस्तान अपने बुनियादी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। पीओके की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है, लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

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