ISRO प्रमुख का जन्मदिन आज, दो दिन बाद भारतीय सेना को देंगे चीन-पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा ‘हथियार’
इसरो चेयरमैन के सिवन का आज जन्मदिन है और दो दिनों के बाद इसरो ऑब्जरवेशन सैटेलाइट लॉन्च कर भारतीय सेना को बड़ा तोहफा देने जा रहा है।
नई दिल्ली, अप्रैल 14: आज इसरो चेयरमैन के सिवन यानि कैलाशवटिवू शिवन का जन्मदिन है। इसरो चेयरमैन के .सिवन का जन्म 14 अप्रैल 1957 को हुआ था। और आज से ठीक दो दिनों बाद यानि 16 अप्रैल को वो भारत की सेना को एक बड़ा तोहफा देने जा रहे हैं। एक ऐसा तोहफा जिससे भारतीय सेना को बहुत बड़ा फायदा मिलेगा। इसरो ने हमेशा से देश के विकास में बेहद महत्वपूर्ण योगदान निभाया है, और एक बार फिर से इसरो इंडियन आर्मी के साथ साथ तीनों भारतीय सेना को घातक हथियार सौंपने जा रहे हैं। अब इसरो ऐसी व्यवस्था करने जा रहा है कि भारतीय सीमा पर दुश्मन क्या साजिश करने वाले हैं, इसकी एक एक जानकारी रीयल टाइम भारतीय सेना को होती रहेगी। आईये जानते हैं इसरो के इस प्रोग्राम के बारे में।

जवानों के साथ सीमा की सुरक्षा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो 16 अप्रैल 2021 को भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है। इस सैटेलाइट के लॉन्च होने के बाद सीमा पर क्या क्या गतिविधियां हो रही हैं, उसकी रीयल टाइम जानकारी भारतीय सैनिकों को हो सकेगी। इस सैटेलाइट के जरिए भारतीय सीमा की सुरक्षा करना हमारे वीर जवानों के लिए बेहद आसान हो जाएगा। सीमा पर काफी विपरीत हालात होते हैं। कठोर मौसम की वजह से कई बार दुश्मनों की नापाक हरकत के बारे में पता नहीं चल पाता है और इसी का फायदा दुश्मन मुल्क उठाने की फिराक में रहते हैं लेकिन अब दुश्मनों को भारतीय सेना रीयल टाइम मुंहतोड़ जबाव देने में सक्षम होगी। भारतीय सैनिकों को पहले ही पता चल जाएगा कि सीमा के अंदर कहां से दुश्मन घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है।

इसरो का ऑब्जरवेशन सैटेलाइट
इसरो की इस सैटेलाइट का सबसे बड़ा फायदा भारतीय सेना को होने वाला है। आपने देखा होगा कि पिछले साल चीनी घुसपैठिए भारतीय सीमा में दाखिल हो गये थे और बाद में जाकर भारतीय सैनिकों के साथ उनका काफी संघर्ष हुआ था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। चीन और पाकिस्तानी दुश्मन हमेशा भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश में लगे रहते हैं। खासकर चीन के बारे में ऐसी रिपोर्ट है कि सर्दी का मौसम शुरू होते ही चीन फिर से घुसपैठ करने की कोशिश करेगा, ऐसे में इसरो का ये सैटेलाइट भारतीय सैनिकों के लिए वरदान साबित होगा। इसरो जिस ऑब्जरवेशन सैटेलाइट को 16 अप्रैल को लॉन्च करने जा रहा है, उससे भारत की जमीन और भारतीय सीमा पर पूरी तरह से निगरानी रखी जा सकती है। इसरो के इस सैटेलाइट का नाम है EOS-3/GISAT सैटेलाइट। यानि, अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट/जियोसिक्रनस सैटेलाइट लॉन्च वैहिकल एफ-10।

इसरो की ‘अप्रैल क्रांति’
ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट की लॉन्चिंग आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से की जाएगी। इस सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए जीएसएलवी-एमके-2 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा। रॉकेट ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। ये पृथ्वी से 36 हजार किलोमीटर की उंडडाई से धरती का चक्कर लगाता रहेगा और वहां से भारतीय सीमा की रीयल टाइम जानकारी भेजता रहेगा। जीएसएलवी-एमके-2 रॉकेट से पहली बार ओपीएलएफ यानि ओजाइव शेप्ड पेलोड फेयरिंग सैटेलाइट को लॉन्च किया जाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट ओपीएलएफ कैटेगरी में आता है यानि ये सैटेलाइट 4 मीटर व्यास के जैसा दिखाई देगा। इसरो सूत्रों के मुताबिक ये सैटेलाइट स्वदेशी है और स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से लैस रॉकेट की आठवीं लॉन्चिंग होगी।

सैटेलाइट में शक्तिशाली कैमरे
इसरो द्वारा लॉन्च होने के महज 19 मिनट बाद ही ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट की अपनी निर्धारित कक्षा में तैनाती हो जाएगी। कक्षा में स्थापित होने के साथ ही ये सैटेलाइट काम करना शुरू कर देगा। इस सैटेलाइट की सबसे खास और महत्वपूर्ण बात है, इसमें लगे कैमरे। ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में तीन बेहद उन्नत किस्म के तीन कैमरे लगे हुए हैं। पहला कैमरा मल्टी स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर इंन्फ्रारेट कैमरा है तो दूसरा कैमरा हाइपर स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर इंन्फ्रारेड कैमरा है वहीं तीसरा कैमरा हाइपर स्पेक्ट्रल शॉर्ट वेव इंन्फ्रारेड कैमरा है। बात अगर कैमरों के रिजॉल्यूशन की करें तो पहले कैमरे का रिजॉल्यूशन 42 मीटर, दूसरे कैमरे का रिजॉल्यूशन 318 मीटर और तीसरे कैमरे का रिजॉल्यूशन 191 मीटर का है। यानि, इन कैमरों में इस साइज की आकृतियां आसानी से कैद हो जाएंगी। जिससे पता चल पाएगा कि भारतीय सीमा पर क्या हलचल हो रही है।

रात में भी तस्वीरें लेने में सक्षम
इसरो के इस सैटेलाइट से सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी सामान्य तस्वीरें ली जा सकेंगी। यानि, ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में जो कैमरे लगे हैं, उसमें लगे कैमरे दिन में तो तस्वीरें खींचेगा ही, साथ ही साथ इसमें इन्फ्रारेड कैमरे लगे हैं, लिहाजा ये रात में भी तस्वीरें खींचने में सक्षम है। यानि, रात के वक्त भी अगर सरहद पर दुश्मन किसी भी गतिविधि को अंजाम देने की कोशिश करेंगे तो वो सैटेलाइट की निगाहों से नहीं बच पाएंगे। इसके साथ ही ईओएस-3/जीआईएसएटी-1 सैटेलाइट में लगे कैमरे किसी भी मौसम में तस्वीरें लेने में सक्षम है। यानि, मौसम चाहे कितना भी खराब क्यों ना हो, सैटेलाइट में लगे कैमरे तस्वीरें खींचते रहेंगे। इस सैटेलाइट की मदद से सरहदों की रक्षा के साथ साथ आपदा प्रबंधन और किसी भी घटना की निगरानी की जा सकेगी। इसके साथ ही कृषि, मनरेलॉजी, जंगल और आपदा के बारे में भी ये सैटेलाइट पहले सूचना देगा। क्लाउड प्रॉपर्टीज, बर्फ और ग्लेशियर के साथ साथ समुन्द्र के भी निगरानी करने में ये सैटेलाइट पूरी तरह से कारगर हैं। यानि, दुश्मनों की साजिश समुन्द्र में भी नहीं चल सकती है।

इसरो पर गर्व
भारत की सुरक्षा के लिए इसरो शुरू से ही काम करता आ रहा है और साल 1979 से लेकर 2020 तक इसरो 37 अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च कर चुका है। हालांकि, इनमें 2 लॉन्च फेल भी हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक पहले इसरो इस सैटेलाइट को 5 मार्च को लॉन्च करने वाला था, लेकिन कुछ तकनीकी वजहों से इसकी लॉन्चिंग टालकर 28 मार्च कर दी गई थी लेकिन अब इसरो ने इस सैटेलाइट की नई लॉन्चिंग डेट 16 अप्रैल कर दी है। अब अगर सबकुछ ठीक रहा तो सैटेलाइट 16 अप्रैल से काम करना शुरू कर देगा।












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