Israel: गाजा युद्ध से चरमराई इजराइल की अर्थव्यवस्था, GDP में जबरदस्त गिरावट, नेतन्याहू की जिद डूबो ना दे देश?
Israel Economy News: गाजा पट्टी में पिछले 11 महीनों से चल रही लड़ाई कहीं इजराइल की अर्थव्यवस्था को ही तबाह ना कर दे। ये आशंका उस रिपोर्ट से काफी प्रबल हो गई है, जब डेटा से पता चलता है, कि आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के सबसे धनी देशों में इजराइल की अर्थव्यवस्था सबसे तेज़ मंदी का सामना कर रही है।
7 अक्टूबर को हमास के नेतृत्व वाले हमलों के बाद के हफ्तों में इजराइल जीडीपी में 4.1% की भारी गिरावट दर्ज की गई है और आशंका है, इस साल के अंत तक देश में आर्थिक मंदी जारी रहेगी। पहली दो तिमाहियों में इजराइल की जीडीपी में 1.1% और 1.4% की अतिरिक्त गिरावट आई है।

गाजा युद्ध के अलावा, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भी पिछले साल एक सितंबर को भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था और राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने अर्थव्यवस्था की स्थिति को और खराब कर दिया है, जिससे आर्थिक गतिविधियां अस्थायी रूप से रुक गईं। हालांकि यह हड़ताल बहुत ही संक्षिप्त थी, लेकिन इसने युद्ध से निपटने के सरकार के तरीके के प्रति व्यापक जन आक्रोश के बीच देश की अर्थव्यवस्था को ठप्प कर दिया था।
बेशक, गाजा में अर्थव्यवस्था के पूर्ण विनाश की तुलना में इजराइल की आर्थिक चुनौतियां कम हैं। लेकिन लंबे समय से चल रहा युद्ध अभी भी इजरायल के वित्त, व्यावसायिक निवेश और उपभोक्ता विश्वास को नुकसान पहुंचा रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले इजराइल की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी, जिसका श्रेय काफी हद तक इसके टेक्नोलॉजी सेक्टर को जाता है। देश की वार्षिक प्रति व्यक्ति जीडीपी 2021 में 6.8% और 2022 में 4.8% बढ़ी, जो कि अधिकांश पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत अधिक है, लेकिन युद्ध ने स्थिति को बदलकर रख दिया है।
जुलाई 2024 के अपने पूर्वानुमान में, बैंक ऑफ इजराइल ने 2024 के लिए अपने विकास पूर्वानुमानों को संशोधित कर 1.5% कर दिया है, जो कि वर्ष की शुरुआत में लगाए गये पूर्वानुमान से 2.8% से कम है।
कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर गंभीर प्रभाव
निर्माण और कृषि क्षेत्र संघर्ष से खास तौर पर प्रभावित हुए हैं। युद्ध का असर फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर भी विनाशकारी रहा है, जिसमें कई फिलिस्तीनियों को इजराइल में अपनी नौकरी खोनी पड़ी है। इसके अलावा, फिलिस्तीनी प्राधिकरण को नकदी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

युद्ध से 2025 तक इजराइल को 67 बिलियन डॉलर का नुकसान होने की आशंका है, जिससे देश को संसाधन आवंटन के बारे में सरकार को कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप खर्च में कटौती या ऋण में वृद्धि हो सकती है। जो देश में एक और व्यापक आक्रोश को हवा दे सकता है।
वहीं, इस संघर्ष का मध्य पूर्व पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ते खतरे के कारण इस क्षेत्र में सुस्त विकास की भविष्यवाणी की है। गाजा में व्यापार ठप्प हो गया है, जिससे कई फिलिस्तीनी सहायता पर निर्भर हो गए हैं।
युद्ध के कारण इजरायल और उसके पड़ोसियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि सिर्फ स्थायी युद्धविराम ही नुकसान की भरपाई कर सकता है और सुधार के लिए मंच तैयार कर सकता है।
इजराइल की बिगड़ती वित्तीय स्थिति ने बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को देश की स्थिति को कम करने के लिए प्रेरित किया है। Fitch ने अगस्त में इजराइल के क्रेडिट स्कोर को A+ से घटाकर A कर दिया था, क्योंकि इजराइल ने अपने सैन्य खर्च मे भारी इजाफा किया है, जिसने 2024 में राजकोषीय घाटे को बढ़ाकर GDP का 7.8% कर दिया है, जो पिछले साल 4.1% था।
और ये स्थिति संभावित रूप से इजराइल की अपनी मौजूदा सैन्य रणनीति को बनाए रखने की क्षमता को भी खतरे में डाल सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि गाजा को कंट्रोल करने के लिए इजराइल को लगातार जमीन पर सैनिकों, एडवांस हथियारों और निरंतर रसद सहायता की सप्लाई करनी होगी और ऐसा करने में भारी वित्तीय लागत है और अगर इजराइल इस रास्ते पर चलता है, तो देश आर्थिक संकट में फंस सकता है।












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