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Israel US War: Khamenei को मारने वाली मिसाइल ने ईरानी रडार को कैसे दिया चकमा? कहां बनती है और कितनी है लागत?

Israel US War: इजरायल अमेरिका बनाम ईरान के इस युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की शनिवार को हत्या हो चुकी है। लेकिन हर कोई यही जानना चाह रहा है कि ईरान के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को उस मिसाइल के बारे में कैसे पता नहीं चला जिसने खाेमेनेई की जान ली। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मिसाइल एक फाइटर जेट से दागी गई, लेकिन इसका रास्ता ऐसा रहा जिससे यह न तो रडार की पकड़ मे आई और न ही एयर डिफेंस सिस्टम की जद में।

क्या है ब्लू स्पैरो मिसाइल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में "ब्लू स्पैरो" मिसाइल (Blue Sparrow Missile) का इस्तेमाल किया गया था। यह मिसाइल लगभग 1,240 मील (करीब 2,000 किलोमीटर) तक मार करने की क्षमता रखती है। इसकी खास बात यह है कि यह Semi-Ballistic Trajectory पर बेस्ड मिसाइल है। आम भाषा में कहें तो, यानी यह कुछ समय के लिए पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर निकल जाती है और फिर तेज गति से वापस नीचे आती है। इस तकनीक की वजह से यह एयर डिफेंस सिस्टम और रडार दोनों को चकमा देकर कम समय में टारेगट को खत्म सकती है।

Israel US War

हमला करने का तरीका और रूट

जब यह मिसाइल लॉन्च होती है तो पहले एक बूस्टर इसे बहुत तेजी से ऊपर वायुमंडल की ओर धकेलता है। इसके बाद मिसाइल एक तेज नीचे की ओर आने वाले सेमी-बैलिस्टिक पाथ से दोबारा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है। इस तरह के उड़ान मार्ग की वजह से एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।

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क्या है खासियत?

समय के साथ इन मिसाइलों को केवल परीक्षण के लिए नहीं बल्कि वास्तविक सैन्य उपयोग के लिए भी अनुकूलित किया गया। ब्लू स्पैरो मिसाइल लगभग 6.5 मीटर लंबी और करीब 1.9 टन वजनी होती है। इसे F-15 ईगल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है, जो इसे लंबी दूरी के बेहद सटीक हमलों के लिए प्रभावी बनाता है।

Israel US War

कितने रुपए में बन जाती है एक ब्लू स्पैरो मिसाइल?

ब्लू स्पैरो मिसाइल को इजरायल की डिफेंस कंपनी 'रफाएल एडवांस डिफेंस सिस्टम' बनाती है। इसकी खासियत ही कि यह रडार को चकमा देने में भरोसेमंद मानी जाती है, इसीलिए इसको मिसाइल फ्रॉम स्पेस (स्पेस से दागी गई मिसाइल) कहते हैं। एक ब्लू स्पैरो मिसाइल बनाने में 1.51 करोड़ रुपए से लेकर 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर से लेकर 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक का खर्च आता है। भारतीय रुपयों में इसे कन्वर्ट करें तो एक ब्लू स्पैरो मिसाइल की कीमत 9.16 करोड़ से 25.50 करोड़ रुपए तक हो सकती है। (ये कीमत केवल अनुमानित है)

पश्चिमी इराक से दागी गई थी मिसाइल?

इजरायली सूत्रों के मुताबिक इस मिसाइल के कुछ हिस्सों का मलबा पश्चिमी इराक में पाया गया। विश्लेषकों का मानना है कि इससे मिसाइल के मार्ग का अंदाजा लगाया गया, जो तेहरान की ओर जाता हुआ दिखाई देता है। अपनी तेज गति और अनोखी बनावट के कारण ब्लू स्पैरो मिसाइल को विशेष रूप से उन जगहों पर हमला करने के लिए प्रभावी माना जाता है जहां सुरक्षा बहुत ज्यादा मजबूत होती है।

तेहरान में ईरानी नेतृत्व के ठिकानों पर हमला

इजरायली अधिकारियों के मुताबिक यह हमला तेहरान में ईरान के टॉप लीडरशिप के ठिकानों पर किए गए एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा था। हमला पेस्टूर स्ट्रीट पर स्थित उस अत्यधिक सुरक्षित परिसर पर किया गया जहां खामेनेई रहते थे। उस समय वहां कई सीनियर मिलिट्री अधिकारी और राजनीतिक एक बैठक के लिए इकट्ठा हुए थे। अगले दिन सुबह ईरान की सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि 86 साल के खामेनेई की इस हमले में मौत हो गई।

हमले में मोसाद का रोल

यह हमला केवल उन्नत हथियारों की वजह से संभव नहीं हुआ। इसके पीछे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और उसकी साइबर-इंटेलिजेंस यूनिट यूनिट 8200 की सालों की मेहनत भी शामिल थी। अधिकारियों के अनुसार, इजरायली एजेंसियां दशकों से खामेनेई की सुरक्षा व्यवस्था और उनके मूवमेंट पर नजर रख रही थीं।

ट्रैफिक कैमरों और कम्युनिकेशन नेटवर्क की निगरानी

इस निगरानी अभियान में परिसर के आसपास लगे ट्रैफिक कैमरों और कम्युनिकेशन नेटवर्क की लगातार मॉनिटरिंग भी शामिल थी। यहां तक कि सभी मोबाइल नेटवर्क भी इजरायल ने ठप कर दिए। अंतिम हमला तब करने का फैसला लिया गया जब खुफिया जानकारी मिली कि कई टॉप ईरानी अधिकारी शनिवार सुबह सुप्रीम लीडर के साथ बैठक करने के लिए एक साथ वहां आने वाले हैं। जिसके बाद हमले को अंजाम दिया गया, जिसमें खामेनेई, टॉप आर्मी कमांडर और खामेनेई के परिवार के सदस्य मारे गए।

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रात की बजाय दिन में हमला क्यों?

खामेनेई आमतौर पर अपनी रातें अपने घर के नीचे बने एक गहरे अंडर ग्राउंड बंकर में बिताते थे। ईरानी अधिकारियों का मानना था कि यह बंकर हवाई हमलों से पूरी तरह सुरक्षित है। यही कारण था कि इजरायल ने रात में हमला करने के बजाय उस समय का इंतजार किया जब खामेनेई और अन्य वरिष्ठ कमांडर जमीन के ऊपर एक बैठक के लिए मौजूद थे।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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