इजराइल को मान्यता देगा सऊदी अरब, प्रिंस सलमान ने फिलीस्तीन से पल्ला झाड़ा? अब्राहम सौदे के साथ लौटे नेतन्याहू
Israel-Saudi Arabia Abraham Accords: डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी और गाजा पट्टी में युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद के साथ, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अरब दुनिया के साथ इजराइल के रिश्ते को जोड़ने के लिए फिर से अभियान शुरू कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इजराइल और चार अरब देशों, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान के बीच रिश्तों के तार जोड़ दिए थे। और इस समझौते को 'अब्राहम समझौते' के रूप में जाना जाता है। इस समझौते के तहत इन चारों देशों ने इजराइल को मान्यता दे दी थी।

अब्राहम समझौते को लेकर क्या बोले बेंजामिन नेतन्याहू? (Israel-Saudi Abraham accords)
सोमवार (23 दिसंबर) को इजराइल की संसद नेसेट में दिए भाषण में नेतन्याहू ने कहा, कि और भी सामान्यीकरण समझौते होने वाले हैं।
इन चार देशों के साथ संबंधों को सामान्य करने के बाद, इजराइल के सामान्यीकरण अभियान में अगला कदम सऊदी अरब के साथ समझौता होना था। और बिडेन प्रशासन इजराइल और सऊदी के रिश्तों को जोड़ने का काम तेजी से कर रहा था, लेकिन अचानक 7 अक्टूबर को हुए हमले ने इस समझौता अभियान को पटरी से उतार दिया।
गाजा में युद्ध को देखते हुए अरब जगत में जनमत, इजराइल के खिलाफ हो गया और सऊदी अरब ने भी फिलहाल कह रखा है, कि गाजा में युद्ध की समाप्ति और फिलिस्तीनी राज्य बनाने की दिशा में जब तक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तब तक इजराइल के साथ रिश्ते नहीं जोड़े जाएंगे। लेकिन, हाल में ही आई एक खबर ने चौंका दिया है।
खबर ये है, कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, दो सऊदी अरब के वास्तविक शासक हैं, इजराइल के साथ रिश्ते को जोड़ने को लेकर उनका रूख काफी ढीला है। उन्हें इजराइल के साथ रिश्तों के सामान्यीकरण को लेकर एतराज नहीं है।
और अब जबकि बेंजामिन नेतन्याहू ने संसद में अब्राहम समझौते को लेकर बयान दिया है, तो इसे प्रिंस सलमान की सोच के बैकग्राउंड में ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया है, कि इजराइल-सऊदी सामान्यीकरण समझौता, फिलिस्तीनी राज्य के सवाल को दरकिनार कर सकता है।
बेंजामिन नेतन्याहू अब्राहम समझौतो लेकर इतना आश्वस्त कैसे हैं? (Israel Saudi Normalisation)
सोमवार को इजराइली संसद में बेंजामिन नेतन्याहू ने अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने की बात करते हुए और भी समझौते होने की बात कही है। द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा, "हमने अब्राहम समझौते के साथ चार ऐतिहासिक शांति समझौते किए और अब मैं आपको बता रहा हूं, कि और भी समझौते होंगे।"
सऊदी अरब का नाम लिए बिना नेतन्याहू ने कहा, कि ऐसे मामलों में फिलिस्तीन का सवाल अभी भी एक मुद्दा बना हुआ है, लेकिन अरब देशों के रवैये में बदलाव आया है।
नेतन्याहू ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं, कि फिलिस्तीनी मुद्दा हमारे लिए मुश्किल नहीं है" लेकिन "एक बदलाव है"।
नेतन्याहू ने आगे कहा, "अगर आपको लगता है, कि हमारे अरब पड़ोसी उस वास्तविकता को नहीं देख पा रहे हैं, जिसे आप में से कई लोग, कम से कम आप में से कुछ लोग, नकारने की कोशिश कर रहे हैं, तो यहां जो भूगर्भीय परिवर्तन हो रहे हैं, वे अपने आप नहीं हो रहे हैं।"
उन्होंने कहा, कि "हमास, हिज्बुल्लाह और उनके प्रायोजक ईरान के साथ युद्ध में इजराइल की सफलता ने "शांति के दायरे को बढ़ाने के अवसर पैदा किए हैं और उदारवादी अरब देश, इजराइल को एक क्षेत्रीय शक्ति और अपनी सुरक्षा, स्थिरता और पूरे क्षेत्र की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए एक संभावित सहयोगी के रूप में देखते हैं"।
इसके अलावा, अमेरिका में अगले महीने राष्ट्रपति बनने वाले डोनाल्ड ट्रंप का हवाला देते हुए नेतन्याहू ने कहा, कि "मैं अपने अमेरिकी मित्रों के साथ मिलकर इस अवसर का पूरा फायदा उठाने का इरादा रखता हूं।"
क्या सऊदी अरब ने फिलिस्तीन पर अपना रुख नरम कर दिया है? (Saudi Arabia Gaza War)
गाजा को तबाह करने वाले इजरायल-हमास युद्ध के शुरू होने के बाद से, सऊदी अरब ने अपना रूख दुनिया को यही दिखाया है, कि इजराइल के साथ संबंधों के किसी भी सामान्यीकरण के लिए, फिलिस्तीनी राज्य का निर्माण उसका सबसे पहला शर्त है।
जनवरी में, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने CNN को बताया था, कि "फिलिस्तीनी राज्य के लिए विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय मार्ग" ही "एकमात्र तरीका है जिससे हमें लाभ मिलेगा" और यह सामान्यीकरण समझौते के लिए एक आवश्यक पूर्व शर्त है।
फैसल ने आगे कहा, "अगर हम ऐसा कोई रास्ता खोजने में कामयाब रहते हैं, तो फिर इसता मतलब ये हुआ, कि अगले एक या दो सालों में हम यहां नहीं रहेंगे, रिश्तों के सामान्यीकरण के लिए आगे बढ़ जाएंगे, लेकिन अगर हम 7 अक्टूबर से पहले की यथास्थिति को इस तरह से फिर से स्थापित कर रहे हैं, कि हम फिर से एक युद्ध में फंसे, जैसा कि हमने अतीत में देखा है, तो हम उस बातचीत में दिलचस्पी नहीं रखते हैं।"
लेकिन, इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियों के बावजूद, ऐसे संकेत मिले हैं, कि सऊदी अरब ने अपनी स्थिति में ढील दी है।
इस महीने की शुरुआत में, हारेत्ज़ ने चल रही वार्ता से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया, कि फिलिस्तीनी राज्य के लिए स्पष्ट इजराइली प्रतिबद्धता के बजाय, सऊदी अरब को "फिलिस्तीनी राज्य की ओर मार्ग" के लिए एक अस्पष्ट, सांकेतिक प्रतिबद्धता के साथ राजी किया जाएगा, जो सऊदी अरब को यह दिखाने की अनुमति देगा, कि उन्होंने फिलिस्तीनियों को नहीं छोड़ा है।
अखबार के मुताबिक, इसके अलावा बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी सूत्रों का मानना है, कि मोहम्मद बिन-सलमान को फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता में कोई व्यक्तिगत दिलचस्पी नहीं है और उन्हें सिर्फ "समझौते के लिए घरेलू राजनीतिक और धार्मिक समर्थन हासिल करने के लिए इस मुद्दे पर प्रगति" की जरूरत है। यानि, वो अपनी जनता को बस ये दिखाना चाहते हैं, कि इजराइल, फिलीस्तीन को एक देश के तौर पर मान्यता देता हुआ दिख रहा है।
यानि, अब इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के साथ अगले साल, सऊदी अरब और इजराइल के बीच रिश्ते सामान्य हो सकते हैं।












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