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Israel Iran War: Khamenei की मौत के बाद आपस में भिड़े राष्ट्रपति और IRGC फौज! ईरान में पड़ रही फूट?

Israel Iran War: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच एक अजीब स्थिति सामने आई है। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए दोबारा हमला न करने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर America और Israel को हमला करने के लिए किसी पड़ोसी देश की जमीन इस्तेमाल करने दी गई, तो ईरान उन जगहों पर हमले जारी रखेगा।

ये हालात पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बाद और नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद बन गए है। अब ईरान में ही अंदरखाने क्लेश होता दिख रहा है जिसमें एक किरदार मोज्तबा खामेनेई और और दूसरे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान हैं।

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पड़ोसियों से पेजेशकियान की माफी

शनिवार को जारी एक रिकॉर्डेड संदेश में राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने उन देशों से माफी मांगी जिनके क्षेत्रों में ईरानी हमलों की खबरें आई थीं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होगा, तो ईरान भी पड़ोसी देशों के खिलाफ कोई हमला नहीं करेगा। उन्होंने अपने बयान में कहा-
"मैं व्यक्तिगत रूप से उन पड़ोसी देशों से माफी मांगता हूं जिन पर ईरान ने हमला किया। हमारे कमांडर और प्रियजन इस आक्रामकता में मारे गए, लेकिन हमारी सेनाओं ने क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी।"

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का किसी पड़ोसी देश में हमला करने का कोई इरादा नहीं था। उनके मुताबिक, क्षेत्र के देश हमारे भाई हैं और ईरान उनके साथ अच्छे संबंध चाहता है। लेकिन IRGC की हरकतें इसके पूरी तरह उलट हैं।

हमला जारी रहेगा- IRGC

राष्ट्रपति के इस बयान के तुरंत बाद Islamic Revolutionary Guard Corps ने बिल्कुल अलग रुख अपनाया। IRGC ने कहा कि ईरान की सेना अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करती है, लेकिन अगर अमेरिका और इजरायल के हमले होते हैं तो उनके सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाया जाएगा, फिर वो चाहे किसी भी देश की जमीन पर हों। मतलब साफ है कि IRGC हमले का जवाब हमले से ही देगी।

IRGC ने बयान में कहा- "यदि हमले जारी रहते हैं, तो अमेरिका और फर्जी यहूदीवादी शासन के सभी सैन्य ठिकाने हमारे टॉप टारगेट्स होंगे।" यह बयान साफ दिखाता है कि ईरान की आर्मी लीडरशिप और पॉलिटिकल लीडरशिप फिलहाल एक राय नहीं रख रहे हैं।

एक मत हुए IRGC और अली लारीजानी

बाद में राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने सफाई देते हुए कहा कि ईरान ने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं किया बल्कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया था।इसके बाद ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Ali Larijani ने भी IRGC के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा- "जब दुश्मन क्षेत्र के ठिकानों से हम पर हमला करता है, तो हम जवाब देते हैं और देते रहेंगे।" लारिजानी के मुताबिक यह ईरान का अधिकार और स्थायी नीति है।

खाड़ी देशों पर लारीजानी सख्त

Ali Larijani ने खाड़ी देशों को सीधी धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि या तो ये देश अमेरिका को अपनी जमीन ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने से रोकें या फिर ईरान खुद कार्रवाई करेगा। इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में चिंता और भी बढ़ा दी है।

क्या फूट पड़ सकती है?

फिलहाल फूट पड़ने की बात कहना गलत होगा लेकिन मतभेद चरम पर हैं इससे इनकार नहीं किया जा सकता। IRGC, मोज्तबा खामेनेई और अली लारीजानी एक भाषा बोल रहे हैं जो किसी को भी बख्शने की नहीं है। वहीं IRGC वो है जो इस जंग में ईरान की तरफ से हमलों को अंजाम दे रही है, जिसकी भाषा आक्रामक है। जबकि मसूद पेजेशेकियान, जो राष्ट्रपति भी हैं और अमेरिका से बातचीत की कोशिश करते रहे हैं उनकी इस जंग में नहीं चल रही। फिलहाल फूट तो नहीं लेकिन दोनों खेमे एक पेज पर नहीं कहे जा सकते।

स खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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