इजरायल और तुर्की के बीच पूर्ण डिप्लोमेटिक संबंध बहाली की घोषणा, फिलीस्तीन को किया नजरअंदाज!

इस साल मार्च महीने में इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग और तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन के बीच तुर्की की राजधानी अंकारा में मुलाकात हुई थी, जो 14 सालों में पहला बड़ा दौरा था।

तेल अलीव/अंकारा, अगस्त 17: मुस्लिम देशों के लिए अब तक अछूत रहे इजरायल को धीरे धीरे मुस्लिम देश गले लगाते जा रहे हैं और अब मुस्लिम बाहुल्य देश तुर्की ने भी इजरायल के साथ राजनयिक रिश्ते बहाल करने की घोषणा कर दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री यैर लैपिड और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप अर्दोआन ने बुधवार को आपस में बात की है और फिर अपने-अपने राजदूतों और सामान्य वाणिज्य दूतों को बहाल करने पर सहमति व्यक्त की है और इस तरह से तुर्की और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध बहाल हो गये हैं।

तनावपूर्ण हो गये थे आपसी संबंध

तनावपूर्ण हो गये थे आपसी संबंध

इजरायली प्रधानमंत्री यैर लैपिड ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, "तुर्की के साथ संबंध बहाल करना क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है और इजरायल के नागरिकों के लिए बहुत आर्थिक महत्व रखता है''। उन्होंने कहा कि, "हम काम करना जारी रखेंगे और दुनिया में इजरायल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करेंगे।" वहीं, इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने भी तुर्की के साथ राजनयिक संबंधों के नवीनीकरण का स्वागत किया और इसे "महत्वपूर्ण विकास" कहा है। आपको बता दें कि, साल 2017 में येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर अमेरिकी मान्यता मिलने के बाद तुर्की और इजरायल के बीच संबंध खराब हो गये थे और दोनों देशों ने अपने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया था। वहीं, साल 2010 में मावी मरमारा की घटना की वजह से दोनों देशों के बीच के संबंध काफी तनावपूर्ण हो गये थे, जब गाजा ट्रिप में तुर्की का एक जहाज घुसने की कोशिश कर रहा था और इजरायली सुरक्षाबलों ने गोलीबारी की, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी।

बैक-चैनल बैठक से हल हुआ मुद्दा

बैक-चैनल बैठक से हल हुआ मुद्दा

इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालांकि दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गये थे, फिर भी दोनों देशों के राजनयिकों ने बैक चैनल बातचीत जारी रखी थी। इजरायल और तुर्की के बीच पहले के संबंध सामान्य थे और दोनों क्षेत्रीय सहयोगी भी थे, लेकिन 2010 के बाद से संबंधों में दरार आ गई थी। तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने यहूदी नेताओं से कहा था, कि इजरायल के साथ उनके देश का संबंध "स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। और "हम सभी को मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।" इसके बावजूद, उन्होंने और उनके सहयोगियों ने आलोचनात्मक (और कभी-कभी यहूदी विरोधी) टिप्पणियों को बरकरार रखा, जिसमें अर्दोआन ने इज़राइल पर "बच्चों और शिशुओं को मारने" का आरोप भी शामिल है। हालांकि, अपनी नई टिप्पणी के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा है, कि उनके प्रशासन की क्षेत्रीय कूटनीति के तहत इजरायल के साथ संबंध "फिर से पटरी पर आ गए हैं" लेकिन "हम हमारे फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों के अधिकारों की रक्षा" के लिए काम करते रहेंगे।

मार्च में हुई थी राष्ट्रपतियों की मुलाकात

मार्च में हुई थी राष्ट्रपतियों की मुलाकात

वहीं, इस साल मार्च महीने में इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग और तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन के बीच तुर्की की राजधानी अंकारा में मुलाकात हुई थी और दोनों नेताओं के बीच हुई ये मुलाकात, पिछले 14 सालों में पहली बार एक देश के बड़े नेता ने दूसरे देश की यात्रा की थी और उसके बाद से ही संबंधों में तनाव कम होने की बात सामने आने लगी थी। इजरायली राष्ट्रपति की यात्रा के बाद दोनों देशों की तरफ से संयुक्त बयान जारी किया गया था और तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने बयान में इस बैठक को ऐतिहासिक बताया और कहा था, कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में काम करेगी।" हालांकि, इजरायली नेताओं को अभी भी इस बात की चिंता है, कि फिलीस्तीन को लेकर तुर्की का बड़ बोलापन एक बार फिर से रिश्ते के टूटने की वजह बन सकता है, लिहाजा राजनयिक संबंध बहाल करने से पहले इजरायल ने साफ शर्त रखी थी, कि तुर्की हमास का ना ही समर्थन करेगा, बल्कि हमास को रोकने के लिए तुर्की सख्त कदम उठाएगा और तुर्की इसके लिए तैयार हो गया है।

सीरिया के मुद्दे पर साथ साथ

सीरिया के मुद्दे पर साथ साथ

हालांकि, जब सीरिया में हमला करने की बात आती है, तो इजरायल और तुर्की एक साथ आ जाते हैं और एक दूसरे के साथ समन्वय मजबूत कर काम करते हैं। दोनों देश सीरिया में ईरानी उपस्थिति को अपनी स्थिरता के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं, लिहाजा, दोनों देश बढ़-चढ़कर सीरिया पर हमले करते रहते हैं और दोनों ही देश सीरिया में रूस की उपस्थिति से भी निपट रहे हैं। दोनों देश इस मुद्दे पर बातचीत में सुधार करने में रुचि रखते हैं, ताकि तुर्की को इजरायली विमानों की तरफ से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। वे हाल ही में सीरिया में पैर जमाने के लिए काम कर रहे ईरानियों द्वारा आतंक को प्रतिबंधित करने के प्रयास में "क्षेत्रीय वास्तुकला" के रूप में परिभाषित किए गए सहयोग की संभावना पर भी चर्चा कर रहे हैं।

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