'ब्रिटेन का हो रहा इस्लामीकरण', एयर होस्टेस को हिजाब पहनने की मिली छूट तो भड़के लोग
ब्रिटिश एयरवेज यूके का फ्लाइंग कैरियर एयरलाइन है। इसे UK की परंपरा और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता रहा है। कर्मचारियों के पहनावे को लेकर इसके नियम बेहद सख्त रहे हैं। लेकिन अब इस बदलाव को लेकर आलोचना के सुर तेज होने लगे हैं।

Image: Twitter/ @pamannairbitch
ब्रिटिश एयरवेज ने अपने स्टाफ के लिए करीब 20 वर्षों बाद नई यूनिफॉर्म जारी किया है। इसमें हिजाब को भी जगह दी गई है। ऐसे में इसे ब्रिटेन में तेजी से हो रहे इस्लामीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि 'ब्रिटिश एयरवेज' के अध्यक्ष सीन डॉयले ने कहा कि हमारी यूनिफॉर्म हमारे ब्रांड का प्रतिनिधित्व करती है और भविष्य में भी 'आधुनिक ब्रिटेन' के लिए ये जारी रहेगा। कर्मचारी अब अपनी पुरानी यूनिफॉर्म को रिसाइकल या डोनेट कर सकेंगे।

5 साल की रिसर्च के बाद तैयार हुआ डिजायन
ब्रिटिश एयरवेज की ड्रेस फैशन डिजायनर ओजवाल्ड बोटेंग ने डिजायन की है। उन्होंने 5 साल की रिसर्च के बाद इस यूनिफॉर्म को तैयार किया है। वहीं मेल क्रू को थ्री पीस सूट पहनने का विकल्प दिया गया है। महिलाओं के पास ऑप्शन है कि वह जंप सूट की जगह स्कर्ट या ट्राउर पहन सकती हैं। ब्रिटिश एयरवेज के 30,000 कर्मचारियों मार्च 2023 से इस नए डिजायन के कपड़ों को पहन सकेंगे।

यूके का ध्वजवाहक एयरलाइन है ब्रिटिश एयरवेज
ब्रिटिश एयरवेज यूके का फ्लाइंग कैरियर एयरलाइन है। इसे ब्रिटेन की परंपरा और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता रहा है। कर्मचारियों के पहनावे को लेकर इसके नियम बेहद सख्त रहे हैं। लेकिन अब इस बदलाव को लेकर आलोचना के सुर तेज होने लगे हैं। इस बदलाव ने ब्रिटेन के इस्लामीकरण के भय को और बढ़ा दिया है। कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में तेजी से मुस्लिमों की संख्या बढ़ती जा रही है और उनके उपासना स्थल भी बढ़ते जा रहे हैं। चर्च की संख्या दिनोंदिन घटती जा रही है और मस्जिदों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है।

ब्रिटेन में तेजी से बढ़ रही मुस्लिमों की आबादी
RAIR फाउंडेशन यूएसए के आंकड़े के मुताबिक 2022 में इंग्लैंड में जन्म लेने वालों में सबसे चर्चित नाम मोहम्मद का है। यूके में हुई हाल की जनगणना के मुताबिक पहली बार ब्रिटेन और वेल्स में ईसाई आबादी दूसरे नंबर पर चली गई है। ईसाई देश में अब मुसलमान बढ़ते जा रहे हैं वहीं, क्रिश्चियन घटते जा रहे हैं। बीते 10 सालों में मुसलमानों की जनसंख्या में लगभग 44 फीसदी का इजाफा हुआ है। 7वीं शताब्दी के बाद ब्रिटेन में पहली बार, इंग्लैंड अब बहुसंख्यक-ईसाई नहीं है। ईसाई धर्म अतीत का धर्म बनता जा रहा है, इस्लाम भविष्य का धर्म बनता जा रहा है।
इन शहरों में सबसे अधिक मुस्लिम
यह स्थिति सिर्फ लंदन की नहीं बल्कि लगभग सभी शहरों की है। बर्घिंघम में 30 फीसदी मुस्लिम, ब्रैडफोर्ड में 30.5 फीसदी मुस्लिम, मैनचेस्टर में 22.3 फीसदी मुस्लिम, लीसेस्टर में 23.5 फीसदी मुस्लिम, ब्लैकबर्न और डार्वेन में 35 फीसदी मुस्लिम, ल्यूटन में 33 फीसदी मुस्लिम, वेस्टमिंट में 20 फीसदी मुस्लिम, नॉटिंघम 12.2 फीसदी मुस्लिम, ओल्डहैम में 24.3% मुस्लिम, न्यूहैम में 34.8 फीसदी मुस्लिम, रेडब्रिज में 31.3 फीसदी मुस्लिम हो चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अगले 30 सालों में इन शहरों में मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके होंगे। 2050 तक 2050 तक ब्रिटेन की मुस्लिम आबादी 13 मिलियन होने का अनुमान है।

ईरान में हिजाब के खिलाफ लड़ रही महिलाएं
ब्रिटेन के बदलते जनसांख्यिकी को देखते हुए यह अनोखी बात नहीं है कि एयरलाइन शरीयत को गले लगा रही है। लेकिन यह वहां के मूल निवासियों के बीच नाराजगी पैदा कर रही है। इस्लामिक स्कॉलर बिल वार्मर का कहना है कि बहुत से लोग सवाल करते हैं कि कथित रूप से नारी द्वेषी, अपमानजनक, पुरुष-प्रधान इस्लामिक शासन से बचने वाले मुसलमान अपने साथ उन चीजों को क्यों लाते हैं जिनसे वे भाग रहे हैं। उदाहरण के लिए, जबकि ईरानी महिलाएं अपनी स्वतंत्रता और जीवन के लिए लड़ रही हैं, लेकिन वहीं एयरलाइन मुसलमानों को इस्लामी मानदंडों और कानून (शरिया) को प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

हिजाब की पैरवी कर रहे कट्टरपंथी
उदारवादी विद्वान के रूप में चर्चित जमाल बदावी जोर देकर कहते हैं कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं के लिए अल्लाह का एक आदेश है। उनके मुताबिक ये राज्य का कर्तव्य होना चाहिए कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। उनका कहना है कि कुरान 24:31 महिलाओं को इतनी अच्छी तरह से शरीर को ढंकने का आदेश देता है। उन्होंने कुरान 33:59 का हवाला देते हुए कहा कि अगर एक महिला अपने शरीर को पूरी तरह से ढ़क नहीं करती है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाना उचित है।

ब्रिटेन का हो रहा इस्लामीकरण
बिल का कहना है कि ईरान में महिलाएं जरूरी हिजाब को उतार फेंकने के लिए आंदोलन कर रही हैं। वे हिजाब को स्वंतत्रता नहीं बल्कि उत्पीड़न का प्रतीक बताती हैं और इसे अपने जीवन से दूर करने के लिए मौत तक को गले लगा रही हैं। वहीं, पश्चिमी देश ब्रिटेन में अब इसे स्वेच्छा का विकल्प बनाया जा रहा है। मूल निवासियों को डर है कि यह नया ‘विकल्प' तब अपनाना ‘जरूरी' हो जाएगा जब ब्रिटेन में मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे। बिल का कहना है कि पश्चिम में हिजाब का मतलब फैशन नहीं है, इसे शरियत से जोड़कर देखा जाता है और यह नफरत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश एयरवेज उत्पीड़न के इन प्रतीक को मुख्यधारा के कपड़ों के रूप में चित्रित करके कट्टरपंथियों की विचारधारा को वैध बनाने में सफल होने में मदद कर रहा है।
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