ISKCON Bangladesh: बांग्लादेश में इस्कॉन ऐसा क्या कर रहा है, कि उसपर प्रतिबंध लगाने की कोशिश हो रही है?
ISKCON Bangladesh: बांग्लादेश की इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (Iskcon) चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद से चर्चा में है और बांग्लादेश में पूरी कोशिश की जा रही है, कि इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाया जाए।
इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशों के बीच इस दक्षिण एशियाई देश में अन्य हिंदू पुजारियों की गिरफ्तारी की खबरेंभी सामने आई हैं। दास की गिरफ्तारी ने बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शनों को हवा दी है और पिछले हफ्ते अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं।

कोलकाता में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने कथित तौर पर कहा, कि पड़ोसी देश में 100 दिनों के बाद भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार "नहीं रुक रहे हैं"। बांग्लादेश में इस साल 5 अगस्त को शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद हिंदुओं को निशाना बनाकर 200 से ज्यादा हिंसक हमले हो चुके हैं।
लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि बांग्लादेश में क्या हो रहा है और इस्कॉन निशाने पर क्यों है?
इस्कॉन को निशाना बनाने की वजह समझिए
इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने रविवार (1 दिसंबर) को दावा किया, कि बांग्लादेश में 63 भिक्षुओं को भारत में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
उन्होंने लिखा, कि "उनके पास सभी वैध भारतीय वीजा और अन्य दस्तावेज थे। लेकिन बांग्लादेशी सीमा पुलिस ने कहा, कि बांग्लादेशी खुफिया विभाग ने उन्हें भारत में प्रवेश न करने देने के लिए कहा है। उन्होंने पहले ही हमारे चार ब्रह्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब अन्य ब्रह्मचारियों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। कृपया प्रार्थना करें।"
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्कॉन ने कहा है कि शनिवार-रविवार को 54 भिक्षु बांग्लादेश के बेनापोल लैंड पोर्ट पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भारत में प्रवेश करने से रोक दिया गया। बांग्लादेश के डेली स्टार के अनुसार, बेनापोल इमिग्रेशन चेकपोस्ट के प्रभारी अधिकारी (ओसी) इम्तियाज अहसानुल कादर भुइया ने कहा, "हमने पुलिस की विशेष शाखा से परामर्श किया और उच्च अधिकारियों से उन्हें अनुमति न देने के निर्देश प्राप्त किए थे।"
उन्होंने कथित तौर पर कहा, कि 54 इस्कॉन भक्तों को "उनके यात्रा के मकसद के बारे में संदेह" के कारण भारत जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इस्कॉन सदस्यों का कहना है, कि वे धार्मिक उद्देश्यों के लिए भारत आ रहे थे।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस्कॉन के एक सदस्य सौरभ तपंदर चेली ने कहा, "हम भारत में एक धार्मिक समारोह में भाग लेने जा रहे थे, लेकिन आव्रजन अधिकारियों ने सरकारी अनुमति न होने का हवाला देते हुए हमें रोक दिया।"
राधारमण ने दावा किया है कि बांग्लादेश में दो और हिंदू पुजारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पीटीआई से कहा, "मुझे जानकारी मिली है कि बांग्लादेश में पुलिस ने दो और इस्कॉन भिक्षुओं को गिरफ्तार किया है।"
उन्होंने एक्स पर लिखा, "चिन्मय कृष्ण दास के बाद, दो और हिंदू संत रंगनाथ श्यामसुंदर दास ब्रह्मचारी और रुद्रपति केशव दास ब्रह्मचारी को बांग्लादेश पुलिस ने पुंडरीक धाम से गिरफ्तार किया है।"
वहीं, इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि ये दोनों पुजारी जेल में दास को खाना, दवा और पैसे देने गए थे। एक बांग्लादेशी पुलिस अधिकारी ने कहा, कि चल रही जांच में दोनों को संदिग्ध के तौर पर देखा जा रहा है।
श्याम दास प्रभु नाम के एक अन्य हिंदू पुजारी को पिछले हफ्ते चटगाव से हिरासत में लिया गया था। द प्रिंट के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि वह भी जेल में दास से मिलने गये थे।
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी
बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने बांग्लादेश के हिंदुओं में खलबली मचा दी है। चटगांव में मजिस्ट्रेट अदालत ने दास को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पिछले हफ्ते हिंदू प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों से झड़प हुई थी।
दास, जिन्हें चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें पिछले सोमवार (25 नवंबर) को चटगांव जाते समय ढाका के मुख्य हवाई अड्डे पर देशद्रोह सहित कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
दास पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा झंडा फहराने के आरोप में उनके और 18 अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।
एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में शेख हसीना के भाग जाने के बाद से दास ने हिंदुओं की सुरक्षा की मांग करते हुए कई बड़ी रैलियों का नेतृत्व किया है।
पिछले गुरुवार को इस्कॉन बांग्लादेश ने दास से खुद को अलग करते हुए कहा, कि उनके कार्य धार्मिक संस्था के "प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।"
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्कॉन ने कहा कि दास को इस साल अक्टूबर में अनुशासन तोड़ने ने के कारण संगठन से निकाल दिया गया था।
हालांकि बाद में, इस्कॉन ने दास से खुद को अलग करने के दावों का खंडन किया।
धार्मिक संगठन ने एक बयान में कहा, "इस्कॉन ने हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों की रक्षा के लिए शांतिपूर्वक आह्वान करने वाले चिन्मय कृष्ण दास के अधिकारों और स्वतंत्रता का समर्थन करने से खुद को अलग नहीं किया है और न ही करेगा।"
आगे कहा गया, "हमने सिर्फ पिछले कई महीनों में उनके बांग्लादेश में इस्कॉन का आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करने के बारे में कुछ स्पष्ट किया है।"
देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार दास को आज (2 दिसंबर) बांग्लादेश की शीर्ष अदालत में पेश किया जाएगा।
इस घटनाक्रम पर भारत की गहरी नजर रहेगी।
दास चटगांव के पुंडरीक धाम के प्रमुख हैं, जो बांग्लादेश में इस्कॉन का एक प्रमुख हिस्सा है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, वह बांग्लादेश सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता भी हैं।
इस्कॉन को कैसे बनाया जा रहा निशाना?
बांग्लादेश में इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। हालांकि, पिछले सप्ताह बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्वत: संज्ञान आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।
यह बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां की तरफ से अदालत के सामने इस्कॉन को "धार्मिक कट्टरपंथी संगठन" कहे जाने के बाद आया है।
एनडीटीवी के अनुसार, बांग्लादेश के भैरव क्षेत्र में गुस्साई भीड़ ने इस्कॉन केंद्र में तोड़फोड़ की।
इसके अलावा, रिपोर्टों में कहा गया है, कि बांग्लादेश में अधिकारियों ने चिन्मय कृष्ण दास सहित इस्कॉन से जुड़े 17 लोगों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है।
भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं पर "गहरी चिंता" जताई है, साथ ही दास की गिरफ्तारी को "दुर्भाग्यपूर्ण" कहा है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को कहा, "भारत ने बांग्लादेश सरकार के सामने हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर धमकियों और लक्षित हमलों के बारे में लगातार और दृढ़ता से बात की है। हम चरमपंथी बयानबाजी में वृद्धि से चिंतित हैं। हम बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का आह्वान करते हैं।"
विदेश मंत्रालय ने कहा, कि उसने दास के लिए "निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई" की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश ने कहा कि उसने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है और यह दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों के "विपरीत" है।
वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इस्कॉन की वैश्विक मौजूदगी और मजबूती ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को परेशान कर दिया है और यही वजह है, कि मोहम्मद यूनुस चाहते हैं, कि 'इस्कॉन मुंह पर ताला लगाए रखें'।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार के लिए इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाना आसान नहीं है, लेकिन अगर सरकार ऐसा करती है, तो ये फैसला बैकफायर भी कर सकता है।












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