ब्रिटिश कोर्ट में फिर हारी ISIS की 'जिहादी दुल्हन', नागरिकता हासिल करने की एक और कोशिश फेल, जानें कौन है?
Shamima Begum: बांग्लादेशी मूल की लंदन में जन्मी महिला शमीमा बेगम, जो इस्लामिक स्टेट (ISIS) आतंकवादी समूह में शामिल होने के लिए यूनाइटेड किंगडम से भाग गई थी, वो अपनी ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने और यूके लौटने के लिए एक और कानूनी लड़ाई हार गई है।
ब्रिटेन की अपील अदालत ने पिछले साल फरवरी में स्पेशल इमिग्रेशन अपील्स कमीशन (SIAC) के फैसले से सहमत होकर उसकी अपील खारिज कर दी है, जो शमीमा बेगम के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि वो फिर से ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

ISIS की 'जिहादी दुल्हन' हारी अपील
यूके अपील कोर्ट के न्यायाधीश डेम सू कैर ने लंदन में फैसला सुनाते हुए कहा, "शमीमा बेगम भले ही दूसरों से प्रभावित होकर सीरिया का दौरा किया और ISIS के साथ जुड़ने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने ये फैसला सोच-समझकर लिया था।"
आपको बता दें, कि इससे पहले साल 2022 में भी यूके सुप्रीम कोर्ट ने 24 साल के एक शख्स को यूके आने से रोक के अपने फैसले को बरकरार रखा था। और शमीमा बेगम भी पिछले साल विशेष न्यायाधिकरण में चुनौती हार गईं।
शमीमा बेगम, जो इस समय उत्तरी सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में रहती है, उसकी अपील पर बैरिस्टर सामंथा नाइट्स ने प्रतिनिधित्व किया था, जिन्होंने तर्क दिया था, कि सरकार तस्करी के संभावित शिकार के कानूनी कर्तव्यों पर विचार करने में नाकाम रही है। यूके गृह कार्यालय ने जोर देकर कहा, कि मामले का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द है।
बीबीसी न्यूज के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने कहा है, कि यह तर्क दिया जा सकता है, कि बेगम के मामले में फैसला "कठोर" है और यह तर्क दिया जा सकता है, कि बेगम ने "अपना भाग्य खुद लिखा है" है। उन्होंने कहा, कि "हमारा एकमात्र काम यह आकलन करना है, कि यूके आने से रोकने का फैसला गैरकानूनी था या नहीं और हमने निष्कर्ष निकाला है, कि यह गैरकानूनी फैसला नहीं था और अपील खारिज कर दी गई है।"
क्या करती है ISIS की जिहादी दुल्हन?
शमीमा बेगम को ISIS की जिहादी दुल्हन कहा जाता है, क्योंकि वो लंदन से भागकर वो सीरिया पहुंची थी और ISIS के डेनमार्क के रहने वाले एक आतंकी से शादी कर ली थी, जिसके बाद उसे ISIS की दुल्हन के नाम से जाना जाने लगा। शमीमा बेगम ने तीन बच्चों को जन्मं दिया, लेकिन बाद में उन सभी बच्चों को मौत हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, शमीमा बेगम साल 2015 में बेथनल ग्रीन एकेडमी की दो छात्राओं के साथ भागकर पूर्वी लंदन से सीरिया चली गई थी और उस वक्त वो सिर्फ 15 साल की थी। सीरिया भागने के पीछे उसका मकसद ISIS के लिए काम करना था, ताकि पूरी दुनिया में ISIS का शासन स्थापित हो सके।
शमीमा बेगम के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया, कि उसे "यौन शोषण' के मकसद से भर्ती किया गया, सीरिया ले जाया गया और फिर एक पुरूष के साथ उसकी शादी करवा दी गई।"
लेकिन, सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने फरवरी 2023 में फैसला निकाला, कि ब्रिटिश गृह सचिव को उसकी नागरिकता छीनते वक्त इस बात पर विचार करने की कोई जरूरत नहीं थी, शमीमा बेगम तस्करी की शिकार थी या नहीं। जबकि, शमीमा बेगम का दावा है, कि उसने भले ही ब्रिटेन के कानून का उल्लंघन किया, लेकिन उसने ISIS के किसी भी अत्याचार में भाग नहीं लिया।
ब्रिटिश सरकार का कहना है, कि शमीमा बेगम अपनी विरासत को देखते हुए बांग्लादेशी पासपोर्ट की मांग कर सकती हैं, लेकिन उनके परिवार ने तर्क दिया है, कि वह ब्रिटिश हैं और उनके पास कभी भी बांग्लादेशी नागरिकता नहीं रही है। अपील न्यायालय के फैसले में कहा गया है, कि गृह सचिव को इस फैसले पर पहुंचने का अधिकार था, कि वह खतरनाक थी - भले ही तस्करी के सबूत हों।
पिछले साल, विशेषज्ञ न्यायाधिकरण ने तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद के निष्कर्ष को स्वीकार कर लिया था, कि शमीमा बेगम की ब्रिटिश नागरिकता रद्द करना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी था और इसलिए यह अदालत के लिए कोई मामला नहीं है।












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