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कांगो गणराज्य में चरमपंथियों ने फिर की 38 लोगों की हत्या, इस्लाम या मौत चुनने की शर्त के बीच कैसे जी रहे लोग?

DR Congo attack: अफ्रीकी देशों में इस्लामिक आतंकवादियों का कहर रूकने का नाम नहीं ले रहा है और अब डॉ. कांगो में ISIS समर्थित आतंकवादियों ने एक गांव में घुसकर 38 लोगों की हत्या कर दी है। ऐसी रिपोर्ट है, जिस गांव पर हमला किया गया, वो ईसाइयों का गांव है और मारे गये सभी लोग ईसाई हैं।

स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, आतंकवादी संगठन ISIS से जुड़े ISIL के आतंकवादियों ने पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के एक गांव पर रात में हमला कर कम से कम 38 लोगों की हत्या कर दी है। स्थानीय अधिकारी फैबियन काकुले ने बताया, कि हथियारबंद लोगों ने शुक्रवार रात को उत्तरी किवु प्रांत के बेनी क्षेत्र के गांवों के निवासियों पर हमला कर दिया और बेरहमी से लोगों की हत्या करनी शुरू कर दी।

DR Congo attack

वहीं, जिला अधिकारी लियोन काकुले सिविवे ने कहा है, कि पिछले कुछ दिनों में भीषण हमले हो रहे हैं, लिहाजा अलग अलग गांवों में लोगों की रक्षा करने में काफी परेशानी हो रही है। जिलाधिकारी के मुताबिक, इस बार भी कम सुरक्षा मौजूदगी का फायदा उठाकर इस्लामिक आतंकवादी गांव में घुसे थे और उन्होंने लोगों की हत्याएं करनी शुरू कर दी।

इस्लामिक आतंकवाद से त्रस्त है पूरा क्षेत्र

स्थानीय नागरिक समाज के नेता जस्टिन कवलामी ने हमले के लिए एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) के लोगों को दोषी ठहराया है।

इस हफ्ते की शुरूआत में भी ADF ने एक और गांव पर हमला कर 16 लोगों की हत्या कर दी थी। हालांकि, वो गांव पड़ोसी देश युगांडा में है, लेकिन अभी जिस गांव पर हमला हुआ है, उस गांव के पास ही है।

आपको बता दें, कि एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF), इस पूरे इलाके में सशस्त्र जिहाद चला रहा है और उसने साल 2018 में इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी और उसके बाद से ये आतंकवादी संगठन सैकड़ों लोगों की हत्याएं कर चुका है। इस पूरे क्षेत्र में ADF का विस्तार भी हुआ है, जिसे पूरा क्षेत्र अस्थिर हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि ADF के साथ साथ कई और सशस्त्र संगठन भी इस क्षेत्र में पनप रहे हैं।

स्थानीय अधिकारियों ने कहा है, कि ADF ने इस हफ्ते DRC के युद्धग्रस्त क्षेत्र में 50 से ज्यादा लोगों की हत्याएं कर दी हैं। 2021 के अंत से, कांगो और युगांडा की सेनाओं ने उत्तरी किवु और पड़ोसी इतुरी में एडीएफ के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था, लेकिन अब तक नागरिकों पर घातक हमलों को रोकने में ये टीमें नाकाम रही हैं। बताया जाता है, कि जिहाद के नाम पर ADF को क्षेत्र में काफी समर्थन भी मिलता है, जिससे इनके लिए गांवों पर हमला करना और भाग निकलना काफी आसान हो जाता है।

पूर्वी डीआरसी दशकों से हिंसा का शिकार रहा है और इस क्षेत्र में इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ सरकार की नाकामी को देखते हुए उनका मुकाबला करने के लिए कई स्थानीय संगठन बनने लगे हैं, जिससे हिंसा में और इजाफा हुआ है। इस्लामिक आतंकवादियों को कई देशों से हथियार मुहैया करवाए जाते हैं। स्थिति भीषण होने के बाद कई विदेशी संगठनों ने भी अपना अभियान शुरू किया है। रवांडा समर्थित एम23 (मार्च 23 मूवमेंट) ने 2021 के अंत में इस क्षेत्र में अपना सशस्त्र अभियान फिर से शुरू किया था और उत्तरी किवु में बड़े पैमाने पर कब्जा कर लिया था। वहीं, तीव्र लड़ाई के कारण हजारों लोग विस्थापित हो रहे हैं।

पिछले साल के अंत तक डीआरसी में लगभग 69 लाख लोग विस्थापित हुए थे, जिनमें से ज्यादातर पूर्वी प्रांतों के रहने वाले थे। मार्च 2022 में शत्रुता बढ़ने के बाद से, देश के पूर्वी हिस्से में उत्तरी किवु में 16 लाख से ज्यादा लोगों को उनके घरों से निकाल दिया गया है।

DR Congo attack

हिंसा की मुख्य वजह क्या है?

वेटिकन के अखबार एल'ओसेर्वेटोर रोमानो ने पिचले हफ्ते अपनी रिपोर्ट में कहा था, जिसमें 14 ईसाइयों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें से कई बहुत कम उम्र के थे, उन्हें "इस्लाम अपनाने से इनकार करने पर हत्या कर दी गई।"

वेटिकन सिटी के अखबार ने कहा, कि "हिंसा एरिंगेटी शहर में पंगास नाम के जगह पर की गई, जहां ADF के आतंकवादियों ने कलाश्निकोव राइफल से लोगों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, पिछले महीने की 25 तारीख को पोप फ्रांसिस ने ईसाइयों की होने वाली हत्याओं की निंदा की थी और कहा था, कि "धर्म परिवर्तन करने की जगह ईसाइयों ने मौत को चुना, जो उनकी शहादत की गवाही है।"

यह कोई एक बार का हमला नहीं है, बल्कि इस्लामवादी आतंकवादी लगातार ईसाई धर्म मानने वाले लोगों पर हमले कर रहे हैं और नरसंहार कर रहे हैं। 13 मई को, इतुरी प्रांत के एनडिम्बो गांव में कम से कम 11 ईसाइयों को मार डाला गया था, वहीं कई महिलाओं को अगवा कर लिया गया था और दर्जनों घरों में आग लगा दी गई थी।

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न के साथ एक इंटरव्यू में एक जीवित बचे व्यक्ति ने कहा, कि "इस भयानक हमले ने तबाही और निराशा का एक निशान छोड़ दिया है, जिसमें जान-माल का नुकसान भयावह अनुपात तक पहुंच गया है।"

पूर्वी कांगों पिछले 30 सालों से ज्यादा वक्त से संघर्षग्रस्त है और अब करीब 100 से ज्यादा सशस्त्र समूह और विदेशी सेनाएं क्षेत्र के विशाल खनिज भंडारों पर नियंत्रण के लिए लड़ रही हैं।

यह संख्या चौंका देने वाली है। 1996 में संघर्ष के फिर से बढ़ने के बाद से लगभग 60 लाख लोग मारे गए हैं। लगभग 61 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, और लगभग दस लाख कांगोवासी शरणार्थी बनकर अंगोला, बुरुंडी, कांगो गणराज्य, युगांडा, तंजानिया संयुक्त गणराज्य और जाम्बिया जैसे देशों पहुंचे हैं।

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य को समझिए

इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न का कहना है, कि एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF), एक इस्लामी चरमपंथी विद्रोही समूह है, जिसने "क्रूर और बर्बर कार्य" काम किए हैं। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में 95 प्रतिशत से ज्यादा ईसाई और 2 प्रतिशत से भी कम मुस्लिम हैं, लेकिन पूर्व हिस्से में सरकार का नियंत्रण काफी कम हो गया है और इस्लामी आतंकवादी समूहों के खिलाफ बहुत कम प्रतिरोध है।

बुटेम्बो-बेनी के कैथोलिक सूबा के बिशप मेलचिसेडेक सिकुली पलुकु ने कहा, कि "इन चरमपंथियों को इंसानी जीवन के सम्मान से कोई मतलब नहीं है और वो बेशर्मी और बर्बरता से हत्याएं करते हैं। निर्दोष लोगों का कत्लेआम करते हैं और बेगुनाहों को बचाने के लिए तत्काल आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की जरूरत है।"

चैरिटी ओपन डोर्स के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ मार्च के महीने में, डीआरसी में एडीएफ ने कम से कम 50 ईसाइयों की हत्या कर दी थी।

बिशप मेलचिसेडेक सिकुली पलुकु ने कहा, कि "जिन लोगों का अपहरण किया जाता है, उन्हें मौत या इस्लाम के बीच एक चुनने के लिए कहा जाता है।" उन्होंने कहा, कि "कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता है, जब हत्याएं नहीं होती हैं और यहां के मूल निवासी को बंदूक के दम पर इस्लाम अपनाने के लिए खतरनाक अभियान चलाया जा रहा है।

पलुकु का दावा है, कि इस्लामवादी समूहों का उदय पूर्व लीबियाई ताकतवर व्यक्ति कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के प्रभाव में हुआ, जिन्होंने "हमारे देश में कई मस्जिदों को वित्तपोषित किया, तब से, अन्य संगठनों ने कब्जा कर लिया है।"

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