Explainer: नवाज शरीफ को अदालत से क्लीन चिट, क्या अब उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है?
Nawaz Sharif News: क्या नवाज शरीफ के चौथी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है? अल अज़ीज़िया मामले में पाकिस्तान की एक अदालत ने नवाज शरीफ की सजा को रद्द कर दिया है, यानि कोर्ट से पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को क्लीन चिट मिल गई है। लिहाजा, अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या नवाज शरीफ के लिए फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है?
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के वकीलों का दावा है, कि कुछ ही दिन पहले एवेनफील्ड मामले में बरी होने के बाद, अब अल अज़ीज़िया मामले में उनकी सजा रद्द होने के बाद से नवाज शरीफ के लिए चुनाव लड़ने और फिर से सार्वजनिक पद संभालने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन उनके और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के बीच के रास्ते में अभी भी एक आखिरी बाधा खड़ी हो सकती है।

बाधा ये, कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने इस हफ्ते एक सामयिक प्रश्न उठाया और पाकिस्तानी शीर्ष अदालत ने'सादिक और अमीन' धारा की व्याख्या की है और उसे बरकरार रखा है, जिसके तहत एक राजनेता को जीवन भर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया गया है। यानि, भ्रष्टाचार के आरोपियों को इस्लामिक कानून के आधार पर जीवन पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है।
लेकिन, पाकिस्तानी संसद ने कुछ ही महीने पहले चुनावी अधिनियम में संशोधन कर दिया है और नये संशोधन के तहत, भ्रष्टाचार की सजा पाए गये नेता सिर्फ 5 साल ही चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। संसद ने ये संशोधन उस वक्त किया, जब शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री थे और ये संशोधन नवाज शरीफ को ही ध्यान में रखकर किया गया। यानि, नये संशोधन के मुताबिक, नवाज शरीफ 5 साल की उस अवधि को गुजार सकते हैं और अब चुनाव लड़ने के काबिल हो चुके हैं।
लेकिन, अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 'सादिक और अमीन' धारा की फिर से व्याख्या कर दी है और ऐसे नेताओं को जीवनभर के लिए अयोग्य माना है, तो फिर सवाल ये हैं, कि क्या नवाज शरीफ चुनाव लड़ पाएंगे?
नवाज शरीफ घोषित किए गये थे जीवन भर के लिए अयोग्य
पनामा पेपर्स मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद, नवाज शरीफ को पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 62(1)(एफ) के तहत जीवन भर सार्वजनिक पद संभालने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। और संविधान की इसी अनुच्छेद का संशोधन उनके भाई शहबाज शरीफ की सरकार के दौरान किया गया और जीवन भर की अयोग्यता को घटाकर सिर्फ 5 साल का कर दिया गया।
लेकिन, पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने 'आजीवन अयोग्यता' के मुद्दे को "एक बार और सभी के लिए" निपटाने की कसम खाई है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है, कि मामले की अदालत की समीक्षा का इस्तेमाल चुनावों में और देरी करने के बहाने के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसका मतलब यह हो सकता है कि मामले की सुनवाई 8 फरवरी (पाकिस्तान में संसदीय चुनाव की तारीख) के बाद भी जारी रह सकती है।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि संसद में चुनाव अधिनियम का जो संशोधन किया गया है, उसकी समीक्षा की जाएगी, क्या संशोधन सही या नहीं? ये समीझा चुनाव के बाद भी जारी रहेगी, यानि अगर नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बन भी जाते हैं, फिर भी सुप्रीम कोर्ट का आखिरी फैसला आने से पहले, उनकी कुर्सी खतरे में होगी।
यानि, ऐसे हालात में नवाज शरीफ सार्वजनिक पद संभालने के बाद भी अपनी कुर्सी को लेकर आश्वस्त नहीं रहेंगे और पाकिस्तान की सेना, जो सुप्रीम कोर्ट को भी कंट्रोल करती है, उसके हाथों की कठपुतली बने रहेंगे।
लिहाजा, यह देखना दिलचस्प होगा, कि नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन, इस संबंध में सबसे खराब स्थिति के लिए कैसे रणनीति बनाती है। निःसंदेह, अगर बड़े शरीफ़ की योजना के अनुसार चीज़ें नहीं हुईं, तो उम्मीद की किरण बाकी है। फिलहाल, पीएमएल-एन नवाज शरीफ के बरी होने के बाद अदालती फैसले को 'इंसाफ' बताकर जश्न मना रहा है, लेकिन अगर बाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला खिलाफ आता है, तो फिर वो फैसला 'इंसाफ' होगा या नहीं?
दूसरी तरफ, पाकिस्तान की अदालतें जहां एक पूर्व प्रधानमंत्री के रास्ते से कांटे हटा रहा है, तो एक और पूर्व प्रधानमंत्री (इमरान खान) के लिए जेल की जंजीरों को और सख्त कर रहा है। इमरान खान एक जांच एजेंसी के हाथों से दूसरे और फिर तीसरी जांच एजेंसी के हाथों में सौंपे जा रहे हैं। मौजूदा हालात ऐसे हैं, कि इमरान खान को जेल से बाहर आते हुए देखना असंभव लग रहा है और उनका चुनाव लड़ना अब शायद संभव नहीं है।












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