J-10C: पाकिस्तानी एयरफोर्स में इजराइली फाइटर जेट? क्या दोस्त की एक डील का खामियाजा भुगतेगा भारत?
Israeli Fighter In Pakistan Air Force: हाल ही में, चीनी लड़ाकू चेंगदू जे -10 'वाइगरस ड्रैगन' विमान, ऑस्ट्रेलियाई सैन्य हेलीकॉप्टर एमएच -60 के पास फायरिंग फ्लेयर्स के साथ आक्रामक युद्धाभ्यास के बाद चर्चा में आ गया है।
भारत के पड़ोसी देश, चीन और पाकिस्तान, J-10 लड़ाकू विमानों का संचालन करते हैं। भारत ने जब फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू जेट को अपने बेड़े में शामिल करने का फैसला किया, तब पाकिस्तान ने इस विमान को अपने लड़ाकू बेड़े में शामिल किया।

पाकिस्तानी एयरफोर्स में इजराइली विमान?
साल 2019 में चीनी एक्सपर्ट्स ने दावा किया था, कि J-10C ने सितंबर 2019 के संयुक्त फाल्कन स्ट्राइक अभ्यास में थाई JAS-39 ग्रिपेन जेट से बेहतर प्रदर्शन किया था। चेंगदू J-10C एक मध्यम वजन वाला, सिंगल इंजन, मल्टीपर्पस लड़ाकू विमान है। J-10C में फ्लाई-बाय-वायर उड़ान नियंत्रण के साथ डेल्टा विंग और कैनार्ड डिज़ाइन की सुविधा है।
इसके अलावा, चीन के स्वदेशी एईएसए (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे) फायर-कंट्रोल रडार से लैस है। यह विमान हर मौसम में ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसकी प्राथमिक भूमिका हवा से हवा में युद्ध करना है, लेकिन यह स्ट्राइक मिशन को भी अंजाम दे सकता है।
1988 में, इजराइल और चीन ने एक साथ मिलकर एक लड़ाकू विमान विकसित करने पर सहमति जताई थी। इस लड़ाकू विमान को इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के बनाए सिंगल इंजन वाली चौथी पीढ़ी के बहुउद्देश्यीय लड़ाकू जेट IAI Lavi पर आधारित माना जाता है।
रूस के साइबेरियन एयरोनॉटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (SibNIA) के वैज्ञानिकों का मानना है, कि जे-10 "कमोबेश IAI Lavi का ही एक वेरिएंट है।"
J-10 में इजराइली लाइट जेट फाइटर प्रोटोटाइप के एलिमेंट्स शामिल हैं, जिसमें इसके अंडरबेली इनटेक, डिस्टिंक्टिव कैनार्ड (अतिरिक्त लिफ्ट और गतिशीलता के लिए नाक के पास छोटे अतिरिक्त पंख), जबकि इसमें होरिजेंटल टेल स्टेबलाइजर्स की कमी है।
हालांकि आकार और पंखों के मामले में J-10, इजराइली IAI Lavi के डिज़ाइन से अलग है। दूसरे शब्दों में, J-10 को विदेशी टेक्नोलॉजी और अधिग्रहीत डिज़ाइन विधियों के मिश्रण के रूप में देखा जाता है।
वहीं, चीन के इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले रूसी वैज्ञानिकों का दावा है, कि "इस विमान में और इसकी टेक्नोलॉजी में कई ऐसे भाग हैं, जो उस कॉन्फिगरेशन का हिस्सा हैं, जो चीन ने अलग अलग स्रोतों से हासिल किए हैं।"
J-10 के डिजाइन की प्रक्रिया से परिचित डिजाइनर इस बात पर जोर देते हैं, कि चीन ने न केवल विमान के लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स हासिल किए हैं, बल्कि सभी तत्वों को एक सामंजस्यपूर्ण डिजाइन में संयोजित करने के लिए भी चीन को किसी और देश से मदद मिली है।
हालांकि, चीनियों ने इन आरोपों का खंडन किया है और दावा किया है, कि IAI लवी से उसने जो एलिमेंट्स लिए थे, वो उसके प्रोजेक्ट J-9 के लिए था, और उस प्रोजेक्ट को उसने रद्द कर दिया था।

1980 के दशक का प्रोजेक्ट है J-10 लड़ाकू विमान
1981 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) ने तीसरी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास का प्रस्ताव रखा था। और चीनी कंपनी, चेंगदू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन इंस्टीट्यूट (CADI) ने अपने साब 37 विगेन जैसी डिज़ाइन के साथ तीसरी पीढ़ी के फाइटर जेट के निर्माण के लिए कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था।
J-10C को औपचारिक रूप से 1980 के दशक के मध्य में विकास और निर्माण के लिए निर्देशित किया गया था। J-10C को पावर देने के लिए शेनयांग WS-10 इंजन को चुना गया था।
पहला J-10 विमान 2003 में चीनी एयरफोर्स को सौंपा गया था।
J-10C, J-10B का एडवांस वेरिएंट है। इसमें स्वदेशी AESA रडार, इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर (IIR) PL-10, WS-10B इंजन और PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं।
J-10 C की तुलना अक्सर अमेरिकी F-16 फाइटिंग फाल्कन के एडवांस वेरिएंट से की जाती है। F-16 की तरह, J-10 में अत्यधिक चुस्त, वायुगतिकीय रूप से अस्थिर एयरफ्रेम है, जिसे इसके फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम में एक कंप्यूटर से कंट्रोल किया जाता है। इस फाइटर जेट में हवा से जमीन पर सटीक हमला करने की क्षमता, डिजिटल ग्लास कॉकपिट उपकरण, उड़ान के दौरान ईंधन भरना और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध करने की क्षमता शामिल है।
लेकिन, J-10 में कई गड़बड़ियां रिपोर्ट की गई हैं और साल 2014 से 2018 के बीच कम से कम आठ बार इस फाइटर जेट को हादसों का सामना करना पड़ा है। एक हादसे में चीन की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक की भी मौत हो गई थी।
J-10C पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स (PLAAF), पाकिस्तान एयर फ़ोर्स (PAF), और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवल एयर फ़ोर्स (PLANAF) के बेड़े में शामिल है।
पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर 2022 में J-10C को अपनी वायु सेना में शामिल किया था। यह चीन-पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित हल्के लड़ाकू जेट, JF-17 के साथ एक मध्यम वजन वाले लड़ाकू विमान के रूप में काम करता है। उन्हें पीएएफ के नंबर 15 स्क्वाड्रन 'कोबरा' में शामिल किया गया है और वे मिन्हास एयर बेस पर आधारित हैं।

J-10 का पहला खरीददार है पाकिस्तान
पाकिस्तान, J-10 का पहला खरीदार था, जिसे JF-17 से ज्यादा एडवांस माना जाता है। पाकिस्तान ने जनवरी 2024 में ईरान के अंदर हवाई और तोपखाने हमलों के लिए JF-17C और विंग लूंग II ड्रोन को एस्कॉर्ट करने के लिए J-10 को तैनात किया था।
ऐसी भी खबरें थीं, कि सऊदी अरब जे-10सी लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रहा है। मिस्र ने भी इस फाइटर जेट को लेकर दिलचस्पी दिखआई थी। 2019 में चाइना मिलिट्री ऑनलाइन ने लाओस और बांग्लादेश से एक या दो दर्जन ऑर्डर की उम्मीद जताते हुए एक लेख प्रकाशित किया था। बांग्लादेश वायु सेना एक दर्जन चीनी जे-7 लड़ाकू विमानों, रूसी मिग-29 और एसयू-30 फ़्लैंकर्स का संचालन करती है।
2018 में, बांग्लादेश वायु सेना का एक प्रतिनिधिमंडल J-10 का निरीक्षण करने के लिए चीन में था। चीनी वेबसाइट के लेख में दावा किया गया है, कि बांग्लादेश को भारत के राफेल का मुकाबला करने के लिए जे-10 की जरूरत है। दिलचस्प बात यह है, कि बांग्लादेश भी यूरोफाइटर टाइफून की खोज कर रहा था और फ्रांसीसी राफेल के लिए उत्सुक नहीं है, क्योंकि पड़ोसी भारत पहले से ही उनका संचालन कर रहा है।












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