US President Election: कमला हैरिस बनेंगी भारतीय मूल की पहली महिला US प्रेसिडेंट? ट्रंप के सामने टिकेंगीं?
Kamala Harris: क्या जो बाइडेन अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर हो रहे हैं? यह एक ऐसा सवाल है, जो दुनिया पूछ रही है और जिसने अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी को खास तौर पर विभाजित कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ बहस में उनके खराब धाराशाई होने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी में जो बाइडेन को राष्ट्रपति पद की रेस से हटाने की मांग तेज हो गई है और सात सांसदों ने सार्वजनिक तौर पर बाइडेन से चुनावी रेस से हटने का आह्वान किया है।

डेमोक्रेटिक पार्टी में राष्ट्रपति अभियान पर चर्चा करने के लिए सीनेट और हाउस डेमोक्रेट दोनों ने मंगलवार को बैठक की है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद, कई लोगों ने यह कहने से इनकार कर दिया, कि वे बाइडेन का समर्थन करते हैं या नहीं। डेमोक्रेटिक पार्टी से मिलने वाले सभी संकेत दिखा रहे हैं, कि मौजूदा राष्ट्रपति की चुनावी कैम्पेन पर आम सहमति नहीं है। फिर भी बाइडेन अड़े हुए हैं। उनका कहना है, कि सिर्फ "सर्वशक्तिमान भगवान" ही उन्हें राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर होने के लिए मना सकते हैं।
लेकिन, अगर वह अपना मन बदलते हैं, तो उनकी जगह लेने के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस सबसे बेहतर स्थिति में हैं। हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में बताते हैं, कि पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ कमला हैरिस की क्या संभावनाएं हैं?
बाइडेन के हटने पर कमला हैरिस एकमात्र उम्मीदवार?
बाइडेन अगर चुनावी रेस से अपना नाम वापस लेते हैं, तो उनका जगह लेने के लिए कई नाम चर्चा में हैं। सबसे चर्चित डेमोक्रेटिक विकल्पों में से कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम और मिशिगन के गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर हैं।
लेकिन, कमला हैरिस इन दोनों से मजबूत उम्मीदवार मानी जा रही हैं। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के मुताबिक, वह पहले से ही बाइडेन के साथ विजयी राष्ट्रपति पद के लिए टिकट पर हैं, पार्टी के मुख्य निर्वाचन क्षेत्रों के साथ उनकी कई वर्षों की सद्भावना रही है और शायद, बाइडेन ने अभी तक अपने विशाल कैम्पेन के जरिए अपने लिए जो समर्थन जुटाया है, शायद कमला हैरिस ही उसे अपने पाले में कर सकती हैं।
राष्ट्रपति जो बाइडेन अभी तक के चुनावी कैम्पेन से डेमोक्रेटिक पार्टी में जरूरी 1200 डेलिगेट्स का समर्थन हासिल कर चुके हैं, लेकिन पार्टी के नियमों के मुताबिक वो अगले महीने के डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन के दौरान जमा हुए प्रतिनिधियों को अपने डेलिगेटर ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं। लेकिन कई प्रतिनिधियों ने पहले ही सुझाव दिया है, कि वे हैरिस के प्रति वफादार रहेंगे।

इसके अलावा, अगर जो बाइडेन अपनी जगह कमला हैरिस को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाते हैं, तो डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर अराजकता के हालात नहीं बनेंगे, क्यों ज्यादातर नेता हैरिस के समर्थन में हैं और अगर ऐसा होता है तो वो ट्रंप के खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकती हैं।
डेमोक्रेटिक रणनीतिकार एंड्रयू फेल्डमैन, जो विभिन्न दलों के साथ मिलकर काम करते हैं, उन्होंने एपी को बताया, कि "कमला हैरिस, बाइडेन की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यह सवाल पूरी तरह से काल्पनिक है, क्योंकि बाइडेन जोर देकर कह रहे हैं, कि वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि बाइडेन प्रशासन का एजेंडा "उन मुद्दों के संदर्भ में काफी लोकप्रिय रहा है, जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ाया है" और राष्ट्रपति और हैरिस "एक साझेदारी में ऐसा कर रहे हैं"।
वहीं, दक्षिण कैरोलिना स्थित डेमोक्रेटिक रणनीतिकार एंटजुआन सीराइट के मुताबिक, चार साल पहले मतदाताओं ने 78 साल के जो बाइडेन को ओवल ऑफिस में यह जानते हुए रखा था, कि हैरिस अगली कतार में हैं, और बाइडेन ने इस साल 81 साल की उम्र में प्राथमिक चुनौती देने वालों को हराया है, और डेमोक्रेटिक मतदाताओं को पता है, कि हैरिस उनके दूसरे नंबर की कमान संभालेंगी। सीराइट ने कहा, "डेमोक्रेट ने कमला हैरिस के साथ जो बाइडेन को वोट दिया है।"
कमला हैरिस क्यों हैं एक मजबूत उम्मीदवार?
कमला हैरिस, उपराष्ट्रपति के रूप में काम करने वाली अमेरिका की पहली महिला हैं और दक्षिण एशियाई मूल की पहली अश्वेत महिला हैं। अफ्रीकी अमेरिकी डेमोक्रेट के समर्थकों का सबसे बड़ा और सबसे वफादार समूह हैं और उनके पिता अफ्रीकी मूल के थे, जबकि मां भारतीय, इसलिए दोनों समुदायों के बीच उनके लिए समर्थन है।
इसलिए, अगर कमला हैरिस की जगह किसी और को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो उसके लिए इतने कम समय में स्विंग स्टेट में लोकप्रियता बटोरना काफी मुश्किल होगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में एक बात जो देखी जाती है, वो ये कि नस्लीय बाधा तोड़ने वाले लोगों को स्विंग स्टेट में काफी कामयाबी मिलती है और कमला हैरिस इसमें बाजी मार रही हैं।
टेक्सास की डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि जैस्मीन क्रॉकेट ने कहा, कि यह "कम करके आंकना असंभव है" कि कमला हैरिस को राष्ट्रीय पद पर देखना अश्वेत महिलाओं के लिए क्या मायने रखता है।
इतना ही नहीं, अगर बाइडेन रेस से बाहर हो जाते हैं, तो कमला हैरिस के लिए उनके चुनाव अभियान के लिए जमा चंदे का ट्रांसफर आसान हो जाएगा, क्योंकि वो बाइडेन के बाद नंबर-2 हैं। इसलिए जो बाइडेन ने अभी तक अपने कैम्पेन के लिए 91 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, उसका इस्तेमाल कमला हैरिस बिना किसी कानूनी दिक्कतों के कर सकती हैं। वहीं, सहयोगी डेमोक्रेट्स का सहयोग अगर मिल जाता है, तो कमला हैरिस का फंड बढ़कर 240 मिलियन डॉलर हो जाएगा, लेकिन उनके जगह पर अगर किसी और उम्मीदवार की अगर तलाश की जाती है, तो वो ऐसा नहीं कर पाएगा।
और डोनाल्ड ट्रंप ने कमला हैरिस के नाम पर रिपब्लिकन्स को एकजुट करना और चंदा वसूलना भी शुरू कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को रिपब्लिकन समर्थकों को जो चंदे के लिए मेल भेजा है, उसमें उन्होंने 'बाइडेन बाहर हो रहे हैं', 'राष्ट्रपति कमला हैरिस' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है।
इसका मकसद व्हाइट वोटों का ध्रुवीकरण करना और चर्चों से और ज्यादा समर्थन हासिल करना है, हालांकि कमला हैरिस के पति ईसाई हैं।

इसके अलावा, कमला हैरिस उम्र के मामले में डोनाल्ड ट्रंप से 22 साल छोटी हैं और अभी जो बाइडेन की उम्र को लेकर जो विवाद हो रहा है, उसके खिलाफ वो आक्रामकता के साथ पलटवार कर सकती हैं। फिर वो डोनाल्ड ट्रंप (78 साल) की उम्र को लेकर विवाद खड़ा कर सकती हैं।
इसके अलावा कमला हैरिस का लीगल बैकग्राउंड भी डेमोक्रेटिक पार्टी के आदर्शों से मेल खाती रही है, जो हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर आपराधिक न्याय और कानून-व्यवस्था संदेश पर केंद्रित हो गई है।
क्या डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दे पाएंगे कमला हैरिस?
डेमोक्रेटिक फर्म बेंडिक्सन एंड अमांडी ने हाल ही में एक सर्वेक्षण किया है, जिसके मुताबिक 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में डायनामिक्स बदल गये हैं। सर्वेक्षण से पता चलता है, कि कमला हैरिस और पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के पास वर्तमान में बाइडेन की तुलना में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ रेस में बढ़त हासिल है।
सर्वेक्षण से पता चलता है कि ट्रम्प और बाइडेन के बीच कड़ी टक्कर है, जिसमें ट्रम्प एक प्रतिशत अंक (43 प्रतिशत बनाम 42 प्रतिशत) से आगे हैं। हालांकि, ट्रम्प के खिलाफ़, हैरिस और क्लिंटन थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करते हैं, हैरिस 42 प्रतिशत बनाम डोनाल्ड ट्रंप 41 प्रतिशत और क्लिंटन 43 प्रतिशत बनाम डोनाल्ड ट्रंप 41 प्रतिशत से आगे हैं।
वहीं, सीएनएन पोल में पाया गया है, कि डोनाल्ड ट्रंप, बाइडेन से छह प्रतिशत अंकों (49 प्रतिशत बनाम 43 प्रतिशत) से आगे हैं, जबकि कमला हैरिस, डोनाल्ड ट्रंप से थोड़े अंतर (47 प्रतिशत बनाम 45 प्रतिशत) से पीछे हैं।
वहीं, रॉयटर्स/इप्सोस के एक अन्य पोल में हैरिस और ट्रंप की स्थिति लगभग बराबर है, जिसमें दोनों को 42-42 प्रतिशत वोट मिले हैं।
कमला हैरिस के सामने क्या हैं चुनौतियां?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कमला हैरिस का व्हाइट हाउस कार्यकाल एक नीरस शुरुआत, स्टाफ परिवर्तन और मध्य अमेरिका से प्रवास सहित प्रारंभिक नीतिगत पोर्टफोलियो से जुड़ा रहा है, जिससे बड़ी सफलता नहीं मिली।
और व्हाइट हाउस की बोली कमला हैरिस के लिए एक बड़ा बदलाव होगी, और बाइडेन प्रशासन में कई लोग उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर मानते हैं। पिछले साल तक, व्हाइट हाउस और बाइडेन अभियान दल के कई लोग निजी तौर पर चिंतित थे, कि हैरिस बाइडेन के चुनावी अभियान के लिए एक बोझ बन गई हैं।
हालांकि डेमोक्रेटिक अधिकारियों ने कहा है, कि तब से अभी तक की स्थिति काफी बदल गई है, क्योंकि वह गर्भपात के अधिकारों पर आगे बढ़ी और युवा मतदाताओं को लुभाने में कामयाब हुई हैं। डेमोक्रेटिक रणनीतिकार और हैरिस के पूर्व संचार निदेशक जमाल सिमंस ने बीबीसी को बताया है, कि उन्हें लंबे समय से कम आंका गया है। उन्होंने कहा, कि "चाहे वह राष्ट्रपति की दावेदार हों या वो राष्ट्रपति बाइडेन की रनिंग मेंट हों, वह ऐसी व्यक्ति हैं जिन्हें रिपब्लिकन और ट्रम्प कैम्पेन को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।"












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