क्या ईरान दिवालिया होने की कगार पर है?

ईरान
Getty Images
ईरान

अक्टूबर के पहले हफ़्ते के आख़िर में ईरान के विदेशी मुद्रा और सोना बाज़ार में भारी ख़ामोशी छाई रही.

"इस समय डॉलर का क्या भाव है?" इस साधारण से सवाल का जवाब नामुमकिन की हद तक मुश्किल हो गया है.

डॉलर और रियाल की क़ीमत पता करने की बीबीसी फ़ारसी की कोशिश कुछ इस तरह के सवालों और जवाबों के साथ समाप्त हो गई, जैसे "आप कितना डॉलर ख़रीदना चाहते हैं" या "माफ़ कीजिए हम ये कारोबार नहीं करते हैं."

वे वेबसाइट्स जो आम तौर पर क़ीमतों में उतार-चढ़ाव दिखाते हैं, पहूंच से बाहर हैं.

सोना और करेंसी मार्केट से जुड़ी जानकारियां देने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पूरी तरह से बंद करा दिए गए हैं.

इनकी जानकारियों के आधार पर सोने के भाव और डॉलर-रियाल की क़ीमतों के अंतर का अंदाज़ा लगाया जा सकता था.

ईरान
Getty Images
ईरान

करेंसी मार्केट

ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख सादिक़ लारीजानी के पिछले दिनों इंटरनेट और सोशल साइट्स पर अर्थव्यवस्था को लेकर कयास लगाने वालों के ख़़िलाफ़ सख़्त कदम उठाने की बात कही थी.

कुछ वेबसाइट्स का ये कहना है कि इंटरनेट पर इस नाकेबंदी की वजह सादिक़ लारीजानी का यही बयान है.

ये पहली बार नहीं है कि ईरान करेंसी मार्केट में 'क़ीमत' से जुड़ी ख़बर को फैलने से रोकने के लिए संबंधित वेबसाइट्स, करेंसी बाज़ार और ऐसी दूसरी संस्थाओं पर दबाव डालते हैं या बंद कर देते हैं.

लेकिन सवाल ये है कि ईरान की हुकूमत ऐसा क्यों करती है और इससे पहले ऐसे कदमों के क्या नतीजे निकले.

अक्टूबर की शुरुआत में डॉलर की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई. एक बार तो कुछ घंटों के लिए डॉलर की क़ीमत बीस हज़ार तुमान से भी अधिक हो गई थी.

एक तुमान 10 रियाल के बराबर होता है.

ईरान
Getty Images
ईरान

सेंट्रल बैंक की ज़िम्मेदारी

लेकिन शनिवार को ऐसी ख़बरें सुनने को मिलीं कि बढ़ती क़ीमतों को रोकने के लिए सख़्त क़दम उठाए जाएंगे.

फिर ख़बर आई कि एक्सचेंज मार्केट के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सेंट्रल बैंक को सौंप दी गई और रविवार को क़ीमतें एक बार फिर गिर गईं.

क़ीमत में गिरावट की खबर के साथ-साथ तेहरान के केंद्रीय मुद्रा बाज़ार में भी छाई मंदी की तस्वीर देखने को मिली.

ख़ासकर छोटे निवेशक और कारोबारी परेशान थे और इधर-उधर हाथ पैर मार रहे थे कि किसी तरह से ज़्यादा से ज़्यादा क़ीमत चुका कर अपने डॉलर को रियाल में बदल लें.

हालांकि ईरान में ऐसे लोग भी मिल जाते हैं जो इस क़िस्म की तस्वीरों को एक पाज़िटिव ट्रेंड बताते हैं और इसे 'सूद ख़ोरों और दलालों' की हार करार देते हैं.

ईरान
Getty Images
ईरान

ईरानी इकोनॉमी का हाल

दूसरे देशों की मुद्राएं ईरान के करेंसी बाज़ार में किस रेट पर बिक रही हैं यानी ईरान में इनका एक्सचेंज रेट क्या है?

इस सवाल के जवाब से ईरान की अर्थव्यवस्था की सेहत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

करेंसी मार्केट को प्रभावित करने वाले कारणों में अमरीकी डॉलर, महंगाई दर, इंटरेस्ट रेट, मुल्क का चालू खाता, राजनीतिक स्थिरता और व्यापार की शर्तें अहम हैं.

हालात का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अप्रैल, 2008 के बाद से ईरानी रियाल की क़ीमतों में 70 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है.

अर्थव्यवस्था के कई जानकारों का ये मानना है कि ईरान की इकोनॉमी एक भंवरजाल में फंस गई है जहां वो डूबने के कगार पर खड़ी है.

ईरान की हुकूमत भले ही ये दावा कर रही हो कि आर्थिक संकट को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और वे बदनियती से बनाई गई अमरीकी नीतियों का शिकार हो गए हैं.

वे ये भी कह रहे हैं कि ईरान पर अमरीकी पाबंदियां भी इसी कड़ी में हैं.

ईरान
Getty Images
ईरान

आर्थिक नाकाबंदी

तेहरान मुद्रा बाज़ार में काम कर रहे लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि सेंट्रल बैंक ने अक्टूबर की शुरुआत में डॉलर की आपूर्ति बढा दी.

डॉलर की आपूर्ति बढ़ाना एक मात्र असरदार हथियार बचता है सरकार के पास डॉलर की बढ़ती क़ीमत को नीचे लाने के लिए.

दूसरी चीज़ों की तरह करेंसी मार्केट भी डिमांड और सप्लाई के फ़ॉर्मूले पर चलता है, अगर सप्लाई बढ़ती है तो क़ीमत गिरती है जैसा कि बीते हफ़्ते हुआ था.

और दूसरा रास्ता क़ीमत को कंट्रोल करने ये है कि रियाल का मूल्य बढ़े, लेकिन ईरान में महंगाई की जो दर है और वहां के बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की कमजोर हालत को देखते हुए ऐसा संभव नहीं लगता.

लेकिन ईरान की सरकार डॉलर की क़ीमत को खुले बाज़ार में भी गिराने के लिए डॉलर की सप्लाई बढ़ा देती है.

ऐसा ही कुछ 2012-13 की आर्थिक नाकाबंदी के दौरान भी कई बार किया गया था.

ईरान
Getty Images
ईरान

आर्थिक कोर्ट का रुख

इसी बीच ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रहीमी ने सादिक़ लारिजानी से सहमति जताते हुए कुछ वेबसाइट्स को करेंसी मार्केट के उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार ठहराया.

क़ानून व्यवस्था के अध्यक्ष सादिक़ लारिजानी की धमकी भी रंग लाती हुई दिखने लगी है.

जिस दिन उनके विभाग की तरफ़ से चेतावनी जारी की गई, उसी दिन आर्थिक मामलों की अदालत ने 35 लोगों को सज़ा दिए जाने की भी घोषणा की.

इनमें तीन को मौत की सज़ा और बाक़ी 32 को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई.

तेहरान के पुलिस प्रमुख हुसैन रहीमी ने भी कहा है कि 15 वेबसाइट्स की पहचान कर ली गई है जो दिन-रात करेंसी मार्केट में डॉलर की क़ीमत के बारे झूठी ख़बर फैलाते रहते हैं.

"उनमें से कुछ को बुलाया गया है और कुछ को बुलाया जाना बाक़ी है."

ईरान
Getty Images
ईरान

डॉलर का भविष्य क्या होगा?

डॉलर की क़ीमत यहां तक इस लिए भी पहूंची कि हसन रूहानी की हुकूमत मुल्क के इतिहास में पहली बार महंगाई दर को लंबे समय के लिए एक डिजिट में रखने में सफल रही.

और इस दौरान डॉलर की क़ीमत भी महंगाई दर के अनुपात में बढ़ी.

इसी बीच अमरीका का ईरान के साथ वार्ताओं से बाहर आया, पहले दौर की आर्थिक नाकेबंदी हुई और इन नाकेबंदियों का असर तेल और बैंक के सेक्टर पर पड़ा.

इन तमाम घटनाओं ने मिलकर ईरान के मुद्रा बाज़ार और उसकी आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है.

इस आर्थिक स्थिति से निकलने के लिए, जैसे ईरान ने इससे पहले की आर्थिक पाबंदी के दौरान किया था, केवल एक ही रास्ता है कि अपने अमन के ज़माने की विदेश नीति की पैरवी करे और तेल के बदले मिले डॉलर उनके मुल्क में आए.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने ईरान के विदेशी मुद्रा भंडार का आंकलन 100 अरब का लगाया है.

मगर ईरान इसको बड़ी एहतियात से खर्च कर रहा है और इसको इससे भी खराब दिन के लिए बचाकर रखना चाहता है.

इसके साथ ही जैसा कि पिछली आर्थिक नाकेबंदियों में देखा गया है कि ईरान सरकार बाज़ार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करती आई है, ऐसा लगता है डॉलर की सप्लाई बढ़ा कर क़ीमत को कंट्रोल करने की कोशिश की जाएगी.

मगर इसके बावजूद डॉलर की बढ़ती क़ीमत को ज़्यादा रोका नहीं जा सकता है और न ही अर्थव्यवस्था की बिगड़ी हुई तस्वीर को.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+