IMF शर्तें बदल रहा है या झूठ बोल रही शहबाज सरकार? जनता को कैसे गुमराह करते हैं पाकिस्तानी नेता, जानिए

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा, कि "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास बेलआउट पैकेज में देरी करने का कोई बहाना नहीं बचा है, क्योंकि पाकिस्तान ने वैश्विक ऋणदाता की सभी शर्तों को पूरा कर दिया है"।

IMF Pakistan Deal

IMF Pakistan Deal: शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ घोषणा करते हैं, कि पाकिस्तान ने आईएमएफ की सभी शर्तों को पूरा कर दिया है, लिहाजा अब देश को आईएमएफ से लोन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

शुक्रवार को पाकिस्तान के वित्तमंत्री इशाक डार ट्वीट करते हुए कहते हैं, कि संयुक्त अरब अमीरात ने आईएमएफ को आश्वासन दे दिया है, कि वो पाकिस्तान को एक अरब डॉलर की वित्तीय मदद देगा। लिहाजा, अब पाकिस्तान को आईएमएफ से लोन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

लेकिन, शनिवार आईएमएफ के पाकिस्तान मिशन के प्रमुख नाथन पोर्टर ने कहा, कि 'पाकिस्तान के साथ 9 वीं ईएफएफ (विस्तारित निधि सुविधा) को कामयाब बनाने के लिए पाकिस्तान को जल्द से जल्द जरूरी वित्तीय मदद हासिल करनी होगी और उसके बाद आईएमएफ लोन देने की बात पर समीक्षा करेगा।'

उन्होंने कहा, कि 'पाकिस्तान ने आईएमएफ से लोन हासिल करने का आधा रास्ता ही तय किया है।'

यानि, पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ के बयान अलग अलग हैं और पाकिस्तान में कई लोग सवाल उठा रहे हैं, कि सोची समझी साजिश के तहत, आईएमएफ पाकिस्तान के लिए शर्तें बदल रहा है, ताकि वो पाकिस्तान को लोन ना दे।

लेकिन, पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि आईएमएफ कोई गोलपोस्ट नहीं बदल रहा है, बल्कि ये पाकिस्तानी नेता हैं, जो आईएमएफ की शर्तों को लेकर गलत व्याख्या कर रहे हैं। यानि, जनता को बर्गलाने का काम कर रहे हैं।

IMF Pakistan Deal

झूठ बोलते पाकिस्तानी नेता

जियो न्यूज के मुताबिक, एक दीर्घकालिक शर्त के तहत पाकिस्तान को आईएमएफ से कम से कम 6 अरब डॉलर की वित्तीय मदद मिलने वाली थी।

लेकिन, इमरान खान सरकार ने आईएमएफ की शर्तों को तोड़ दिया, लिहाजा आईएमएफ ने पाकिस्तान को लोन की किश्त जारी करने पर रोक लगा दी।

पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान में बनी शहबाद शरीफ की सरकार ने आईएमएफ से लोन कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए अर्जी लगाई। लेकिन, इस बार आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने कई कठिन शर्तें रख दीं।

आईएमएफ की तरफ से साफ शब्दों में कहा गया, कि पाकिस्तान की सरकारें बार बार प्रोग्राम का उल्लंघन करती हैं, लिहाजा जब तक पाकिस्तान सरकार सभी शर्तों को पूरा नहीं करती है, तब तक उसे लोन नहीं मिलेगा।

आईएमएफ की एक शर्त के मुताबिक, पाकिस्तान को अपने सहयोगी देशों से 6 अरब डॉलर की वित्तीय मदद हासिल करनी थी। शर्त में कहा गया था, कि जो भी सहयोगी देश होंगे, उन्हें आईएमएफ को लिखित में देना होगा, कि वो पाकिस्तान की मदद करने के लिए तैयार हैं।

लिहाजा, पाकिस्तान की फंडिंग काफी हद तक सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन से मिलने वाले आश्वासन, पुराने कर्ज को चुकाने में राहत और नये कर्ज के भुगतान पर निर्भर थी।

इन देशों ने आईएमएफ को लिखित में आश्वासन दिया, कि ये देश पाकिस्तान को एक-एक अरब डॉलर की वित्तीय मदद देंगे। लेकिन, जियो न्यूज का कहना है, कि ये वित्तीय आश्वासन, आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। और इसीलिए आईएमएफ के अधिकारी कह रहे हैं, कि पाकिस्तान ने अभी आधा रास्ता ही तय किया है।

जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार आईएमएफ प्रोग्राम शुरू होने के बाद आईएमएफ वाणिज्यिक उधारदाताओं को आवश्यक सुविधा प्रदान कर सकता है, और पाकिस्तान के संप्रभु ऋण का पुनर्मूल्यांकन भी कर सकता है और शायद अतिरिक्त धन का विस्तार कर सकता है, जिसे पहले वापस ले लिया गया था।

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पाकिस्तान मुश्किल हालातों में क्यों फंसा है?

द्विपक्षीय संबंधों के मुकाबले, कॉमर्शियल संस्थानों से वित्तीय मदद हासिल करना काफी मुश्किल होता है और इसमें सामान्य अवस्था के मुकाबले ज्यादा समय लगता है।

लिहाजा, पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में समय लग रहा है। वहीं, 30 जून को आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच वर्तमान में जारी डील की समय सीमा भी खत्म हो रही है, लिहाजा अब पाकिस्तान को जून के बाद के लोन को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी है। यानि, जून के बाद भी पाकिस्तान को कर्ज चाहिए और वो कर्ज पाकिस्तान कहां से लेगा, पाकिस्तानी नेता इस बारे में जनता को कुछ नहीं बता रहे हैं।

इसके साथ ही, अगले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान में बजट पेश किया जाना है और जिस तरह से चीजें चल रही हैं, उसे देखकर ये तय है, कि ये बजट महंगाई को बढ़ाने वाला होगा।

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लिहाजा, इस बात की पूरी संभावना है, कि इस बजट में भी पाकिस्तान सरकार, आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने में चूक जाएगी, जिसका मतलब ये होगा, कि आईएमएफ प्रोग्राम में और देरी होगी।

लिहाजा, अर्थव्यवस्था को विकास पथ पर वापस लाने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि तरलता संकट को इस तरह टाला जाए, कि आपूर्ति श्रृंखला को ठीक किया जा सके और उत्पादन को कम से कम निर्यात आधारित किया जा सके। लेकिन, क्या ये रातों रात, या कुछ सालों में संभव है... उत्तर है नहीं।

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    वहीं, अगर पाकिस्तान को किसी तरह से आईएमएफ का 1.1 अरब डॉलर का लोन मिल भी जाता है, तो ये रिजर्व संकट को कुछ समय के लिए ही रोकेगा। लिहाजा, व्यापक आर्थिक संकट को स्थिर करने के लिए देश को एक और आईएमएफ कार्यक्रम की आवश्यकता होगी और अगली कुछ तिमाहियों में संकट से निपटने के लिए और भी कड़े उपायों की आवश्यकता होगी।

    तरलता संकट के मामले में देश अभी संकट से बाहर नहीं निकला है, लेकिन सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए पाकिस्तानी नेताओं को आपसी दुश्मनी को किनारे रख कदम उठाने होंगे। लेकिन, देश में राजनीतिक स्थिति है, और जिस तरह से नेताओं के बीच लड़ाई चल रही है, उससे यही लगता है, कि देश प्रमुख मैक्रोइकॉनॉमिक लक्ष्यों को खो देगा और आईएमएफ कार्यक्रम में और देरी होगा, जिससे अर्थव्यवस्था और भी खतरनाक हालातों में चली जाएगी।

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