बाइडन की सबसे बड़ी जीत ही क्या उन्हें चकमा देने जा रही है?
सीनेट और कांग्रेस में बेहद बारीक़ बहुमत होने के बावजूद भी लिबरल नेताओं ने द्विपक्षीय इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक से तब तक अपना समर्थन वापिस लेने का ऐलान किया है.
बुधवार रात जो बाइडन कांग्रेस के बेसबॉल मुक़ाबले में पहुँचे. सालाना होने वाले इस खेल मुक़ाबले में दोनों पार्टियों के नेता राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर मैदान में बेसबॉल खेलते हैं. ये खेल अमेरिका का पसंदीदा टाइमपास भी है. व्हाइट हाउस के लोगो वाली आईस्क्रीम खिलाड़ियों को सौंपत हुए बाइडन मुस्कुरा रहे थे लेकिन इस सप्ताह उनके प्रशासन के सामने जो गंभीर चुनौतियां हैं उनके निशान हर तरफ़ थे. ये चुनौतियां बाइडन के राष्ट्रपति काल को पटरी से भी उतार सकती हैं. स्टेडियम के लाउडस्पीकर पर जब बाइडेन के आगमन की घोषणा हुई तो रिपब्लिकन प्रसंशकों ने ज़बरदस्त हूटिंग की. मैदान में मौजूद अधिकतर रिपब्लिकन खिलाड़ियों ने, वास्तव में, राष्ट्रपति चुनावों में बाइडन की जीत पर मुहर लगाने के ख़िलाफ़ मतदान किया था. स्टेडियम के एक कोने में उदारवादी कार्यकर्ताओं ने एक बैनर लहराकर सरकार से सामाजिक कार्यों पर कई ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का आह्वान किया. एक अन्य बैनर पर कुछ रंगीन भाषा में डेमोक्रेट नेताओं को इस ख़र्च में गड़बड़ी ना करने के लिए चेताया गया.
इसी बीच स्टैंड की सबसे पहली लाइन में बैठीं स्पीकर नैंसी पलोसी का फ़ोन उनके कान से चिपका था. ज़ाहिर है वो मैदान में चल रहे खेल से ज़्यादा सदन में चल रही राजनीति को लेकर चिंतित थीं और रणनीति बनाने में व्यस्त थीं. स्टेडियम में मौजूद किसी भी व्यक्ति से ज्यादा पलोसी ने माना है कि उनकी पार्टी के लिए इस बार दांव पर क्या लगा है. एक नज़र उन मुद्दों पर जिन पर सदन में संघर्ष हो रहा है, इस खेल में कौन-कौन शामिल है और सबसे ऊपर कौन रह सकता है.
इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक
अमेरिकी सीनेट ने इसी महीने एक ट्रिलियन डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर बिल पारित किया था. ये द्विपक्षीय इंफ्रास्ट्रक्चर फ्रेमवर्क है, जिस पर कांग्रेस में चर्चा होनी है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने से पहले ये इस विधेयक का अंतिम पड़ाव है. इस विधेयक के ज़रिए सड़कें और पुल बनाएं जाएंगे, ब्रॉडबैंड इंटरनेट का विस्तार किया जाएगा, पुरानी पाइपलाइनें सुधारी जाएंगी और इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे. एक तरह से आधारभूत ढांचे के निर्माण का विधेयक है.
'सुलह' विधेयक
यदि इंफ्रास्ट्रक्चर बिल द्विदलीय (जिसमें दोनों पार्टियां शामिल हों) का मौजूदा अवतार है तो 'सुलह विधेयक', जिसके लिए कांग्रेस के काम करने के तरीक़े की वजह से डेमोक्रेट पार्टी का समर्थन ज़रूरी होगा, पार्टी के लिए एक मौक़ा है, जिसके ज़रिए वो साबित कर सकती है कि कांग्रेस में अपने बहुमत की वजह से वो अपनी बड़ी नीतिगत प्राथमिकताएं लागू कर सकती है.
इस विधेयक को अभी कांग्रेस और सीनेट दोनों में तैयार किया जा रहा है. इसके दायरे में सामाजिक कार्यक्रम आएंगे जैसे कि बचपन में शिक्षा,सभी के लिए प्रीस्कूल, सरकार के खर्च पर दो साल की कॉलेज शिक्षा, सरकारी ख़र्च पर पारिवारिक और मेडिकल छु्ट्टियां और सरकार की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम का विस्तारीकरण. इसके अलावा पर्यावरण पर ख़र्च और कॉर्पोरेट और दौलत पर टैक्स लगाना भी इसी के दायरे में होगा.
क़र्ज़ की सीमा
इन दोनों ही विधायिक प्राथमिकताओं पर राष्ट्रीय क़र्ज़ सीमा का साया मंडरा रहा है. संघीय सरकार अक्टूबर मध्य तक इस सीमा को छू लेगी. यदि नए ख़र्चों और पहले से पारित ख़र्चों को पूरा करने के लिए अमेरिका कोषागार नए बॉन्ड जारी करना चाहेगा तो इसके लिए कांग्रेस को क़र्ज की सीमा को कई ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाना पड़ सकता है. यदि कांग्रेस ऐसा नहीं करती है तो अमेरिकी सरकार दीवालिया हो जाएगी, ये एक अभूतपूर्व घटनाक्रम होगा जो ना सिर्फ़ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डुबो देगा बल्कि इसका असर समूची दुनिया पर होगा.
खिलाड़ी और उनके मक़सद
प्रगतिशील
कांग्रेस में लिब्रल नेताओं के पास लंबी यादें हैं. उन्हें ओबामा काल की याद है, जब उन्हें लगा था कि उन्होंने पिछली सीट ले ली है और पार्टी में सेंट्रिस्ट (मध्यपंथी) आगे हो गए हैं, क्योंकि उनकी विधायिक प्राथमिकताओं जैसे कि- अर्थव्यवस्था के लिए राहत पैकेज, सरकार संचालित स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय सुधार और पर्यावरण संबंधित नियम, इन सभी को इतना पीछे छोड़ दिया गया कि ये निष्प्रभावी ही हो गए. लेकिन अब चीज़ें अलग होंगी. सीनेट और कांग्रेस में बेहद बारीक़ बहुमत होने के बावजूद भी लिबरल (जो अपने आप को प्रगतिशील कहलाना पसंद करते हैं) नेताओं ने द्विपक्षीय इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक से तब तक अपना समर्थन वापिस लेने का ऐलान किया है जब तक कि सुलह विधेयक कम से कम 3.5 ट्रिलियन डॉलर का नहीं होगा और पारित नहीं हो जाएगा.
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लेकिन यहाँ मसला ये है कि क्या प्रगतिशील अपनी बात पर कायम रह पाएंगे क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक में कई ऐसी चीज़ें हैं, जैसे कि, हरित ऊर्जा में निवेश, जिसे प्रगतिशील पसंद करते हैं. प्रगतिशील कैंप के प्रमुख नेताओं में वर्मोंट के बर्नी सेंडर्स और वॉशिंगटन की प्रमिला जयपाल हैं. प्रमिला कई बार कह चुकी हैं उनके साथ कई वोट हैं. इनमें एलेक्सांड्रिया ओकासियो कोर्टेज और इल्हान उमर शामिल हैं. प्रमिला जयपाल को भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर वो इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक को गिरवा सकती हैं. फ़िलहाल तो उनकी धमकी में वज़न लग रहा है. यही वजह है कि स्पीकर नैंसी पलोसी ने विधेयक पर गुरुवार को होने वाला मतदान टाल दिया है ताकि रास्ता निकालने के लिए अधिक समय मिल जाए.
मध्यपंथी (सेंट्रिस्ट)
कांग्रेस के दोनों सदनों में मौजूद मध्यपंथी डेमोक्रेट नेताओं की सुलह विधेयक को लेकर मिश्रित राय है. वेस्ट वर्जीनिया से सीनेटर जोए मंचिन कह चुके हैं कि 3.5 ट्रिलियन डॉलर बहुत ज़्यादा हैं. वो कह चुके हैं कि वो अधिकतम 1.5 ट्रिलियन डॉलर का समर्थन कर सकते हैं, जिनमें पर्यावरण से जुड़े सीमित नियम हों और समाज सुधार के वही कार्यक्रम हो जिन्हें परखा जा चुका है. ट्रंप के शासनकाल में जो टैक्स कटौती की गई थी मंचिन उसे वापस लेने के पक्ष में हैं. उनका ये भी कहना है कि संघीय बजट घाटे को कम करने के लिए कुछ नया राजस्व खत्म करना होगा.
मध्यपंथियों का ध्यान इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक को अंतिम पड़ाव तक ले जाने पर है. वो इस विधेयक को ज़रूरी निवेश की तरह ही नहीं देखते हैं बल्कि वो ये भी साबित करना चाहते हैं कि उनकी समझौता करने और द्विपक्षीय राजनीति की क्षमता काम करती है.
सदन में मध्यपंथियों ने ही शुरुआत में पलोसी को इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक पर मतदान को गुरुवार को कराने के लिए मजबूर किया था ताकि वो इस सामाजिक खर्च विधेयक पर अपनी छाप छोड़ सकें. मंचिन ने गुरुवार दोपहर को फिर से अपनी स्थिति और अपने मध्यपंथी विचारों को दोहराया और कहा कि यदि डेमोक्रेट चाहते हैं कि ये उदारवादी विधेयक पारित हो तो उन्हें अधिक संख्या में उदारवादियों का चुनाव कराने पर काम करना होगा. लेकिन 50-50 के अनुपात वाली सीनेट में मंचिन और एरिज़ोना से सीनेटर और प्रमुख डेमोक्रेट मध्यपंथी क्रिस्टेन सिनेमा का पलड़ा थोड़ा भारी है.
बाइडन और पलौसी
मध्यपंथियों और प्रगतिशील धड़ों के बीच चल रही रस्साक़शी में पार्टी के दो शीर्ष नेता हैं- स्पीकर नैंसी पलोसी और राष्ट्रपति बाइडन. पलोसी, जिनके रणनीतिक कौशल के लिए पार्टी का वामपंथी धड़ा उनकी मुरीद है, सदन में डेमोक्रेट पार्टी के बहुमत को बनाए रखने के लिए ख़ूब मेहनत कर रही हैं. वो कह चुकी हैं कि सुलह विधेयक निश्चित तौर पर पारित होगा. पलोसी इसे 1980 के दशक में शुरू हुए अपने राजनीतिक करियर के अंजाम के रूप में भी देखती हैं.
दूसरी तरफ़ उन्होंने प्रगतिशील धड़े से इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक पर मतदान कराने का वादा भी किया है, जितना समय इस मतदान को होने में लगेगा, उतना ही मुश्किल पलोसी के लिए इस धड़े के ग़ुस्से को शांत करना होगा.
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बाइडन- या कम से कम उनके प्रशासन के अधिकारी- प्रगतिशील धड़े के मध्यपंथियों पर सुलह विधेयक का समर्थन कराने का दबाव बनाने के प्रयासों को लेकर सहज हैं. वो लिबरल नेताओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक का समर्थन करने का दबाव नहीं बना रहे हैं. हालांकि जब यह विधेयक सीनेट में पारित हुआ था तो बाइडन ने मध्यपंथियों के साथ जश्न मनाया था. बुधवार को जब राष्ट्रपति की प्रेस सचिव जेन साकी से पूछा गया था कि दोनों विधेयक कब पास होंगे तो उन्होंने कहा था कि जानकारी का इंतज़ार कीजिए. पत्रकारों के सवाल पर साकी ने कहा, "हमारा मक़सद तो वोट हासिल करना है, इन दोनों विधेयकों को अंतिम पड़ाव पर पहुँचाना है." जब उनसे इसकी समयसीमा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'हम देखेंगे.'
रिपब्लिकन
कांग्रेस के रिपब्लिकन नेता डेमोक्रेट नेताओं को एक दूसरे से उलझते हुए देखकर शांत बैठने और पॉपकार्न खाने के मूड में नहीं है. जब ट्रंप के शासनकाल में रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस का बहुमत था, तब रिपब्लिकन नेता भी ऐसे ही उलझते थे. रिपब्लिकन नेता सक्रिय रूप से डेमोक्रेट्स के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर क़र्ज़ की सीमा को बढ़ाने के रास्ते में वो रोड़ा अटका रहे हैं. ये अलग बात है कि वो समझते हैं कि अगर अमेरिकी सरकार दीवालिया हुई तो ना सिर्फ ये अभूतपूर्व होगा बल्कि इसके भीषण परिणाम भी होंगे.
रिपब्लिकन नेता इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि अभी सत्ता में डेमोक्रेट हैं और उन्हीं को क़र्ज़ सीमा बढ़ाने पर उसी तरह से वोट कराना चाहिए जैसे कि वो अपने बड़े सामाजिक सुधार प्रस्तावों को लागू कराने के लिए सुलह प्रक्रिया अपना रहे हैं. इससे डेमोक्रेट पार्टी के पहले से ही व्यस्त विधायिक कलैंडर में जटिलता की नई परत चढ़ जाएगी और पार्टी के दोनों सदनों में कई मतदान कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इन मतदानों के दौरान चीज़ों के पटरी से उतरने की आशंका भी रहेगी. ज़ाहिर है रिपब्लिकन पार्टी इसमें मदद करना चाहेगी. द्विपक्षीय इंफ्रास्ट्रक्चर विधेयक पर कई रिपब्लिकन नेताओं ने वोट दिया है, और वो और रूढ़िवादी बिज़नेस ग्रुप, अभी भी चाहते हैं कि ये विधेयक पारित हो.
लेकिन अगर वो डेमोक्रेटिक गठबंधन में दरार डालते हुए इस विधेयक को पारित करा लेते हैं तो ऐसा करके वो नई उदारवादी नीतियों में हज़ारों करोड़ डॉलर की संभावनाओं को आग लगा देंगे और 2022 में होने वाले मध्यावधि चुनावों के अभियानों के लिए इससे ख़ूब मसाला भी मिलेगा.
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