Iranian Warship IRIS Dena: श्रीलंका के तट पर डूबा ईरानी युद्धपोत, क्या है ‘आईरिस डेना’? क्यों माना जाता है इस
Iranian Warship IRIS Dena: ईरानी नौसेना का गौरव माना जाने वाला 'आईरिस डेना' श्रीलंका के गॉल (Galle) तट के पास जलसमाधि ले चुका है। यह युद्धपोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित 'मिलन 2026' (MILAN 2026) नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर वापस लौट रहा था जो बुधवार, 4 मार्च सुबह करीब 5:30 बजे डुबा गया।
IRIS Dena के डूबने की खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। यह जहाज ईरान की नौसेना के सबसे नए और रणनीतिक रूप से अहम युद्धपोतों में से एक माना जाता है।

ऐसे समय में, जब मिडिल ईस्ट पहले से ही गंभीर सैन्य तनाव से गुजर रहा है, किसी ईरानी युद्धपोत के साथ हुई यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है।
Iranian Ship Sinking Sri Lanka: कैसे हुआ हादसा? अमेरिका ने ली जिम्मेदारी
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना की किसी पनडुब्बी ने किसी दुश्मन देश के युद्धपोत को टॉरपीडो से उड़ाया है। श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने अब तक 32 नाविकों को बचाया है, जो गंभीर रूप से घायल हैं। जहाज पर सवार कुल 180 चालक दल के सदस्यों में से लगभग 148 नाविक अभी भी लापता हैं।
IRIS Dena features: क्या है आईरिस डेना? कब आया था सुर्खियों में
आईरिस डेना ईरान की नौसेना (Islamic Republic of Iran Navy - IRIN) का एक फ्रिगेट श्रेणी का युद्धपोत है। इसे ईरान ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है और इसे देश की समुद्री ताकत का प्रतीक माना जाता है। यह जहाज आधिकारिक तौर पर हाल के वर्षों में नौसेना बेड़े में शामिल किया गया था और इसे ईरान के आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता है।
आईरिस डेना उस समय सुर्खियों में आया था, जब 2023 में ईरान ने पहली बार अपने दो नौसैनिक जहाजों को लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय दौरे पर भेजा। इस मिशन में आईरिस डेना के साथ सहायक जहाज आईरिस मकरान (IRIS Makran) भी शामिल था।
इस अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान ईरानी नौसेना ने दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और अन्य रणनीतिक बंदरगाहों पर लंगर डाला था। यह दौरा ईरान की ब्लू-वॉटर नेवी क्षमता (खुले समुद्र में लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता) को दिखाने की कोशिश माना गया।
आईरिस मकरान क्या है? क्या है इसकी खासियतें
आईरिस मकरान एक तेल टैंकर है, जिसे ईरान ने सैन्य सपोर्ट शिप में बदला है। यह युद्धपोतों को ईंधन, रसद, हेलिकॉप्टर ऑपरेशन और लंबी समुद्री तैनाती में सहायता प्रदान करने में सक्षम है। आईरिस डेना और मकरान की जोड़ी को ईरान की समुद्री रणनीति का मजबूत आधार माना जाता है।
आईरिस डेना को ईरान की स्वदेशी रक्षा तकनीक का उदाहरण माना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं बताई जाती हैं आधुनिक रडार और निगरानी सिस्टम, सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की क्षमता, हेलिकॉप्टर डेक, पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) में सक्षमयह युद्धपोत ईरान को हिंद महासागर, अरब सागर और दूर-दराज के समुद्री इलाकों में सैन्य मौजूदगी दर्ज कराने में मदद करता रहा है।
श्रीलंका के तट पर डूबना क्यों अहम है?
श्रीलंका के तट के पास इस जहाज के डूबने की खबर कई वजहों से संवेदनशील मानी जा रही है। हिंद महासागर में किसी युद्धपोत की दुर्घटना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है। ईरान की स्वदेशी नौसैनिक तकनीक पर सवाल उठ सकते हैं। मौजूदा अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के बीच इस घटना को सामान्य दुर्घटना से आगे जोड़कर देखा जा रहा है।
अगर जहाज में ईंधन या सैन्य सामग्री थी, तो समुद्री प्रदूषण का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल ईरान की ओर से आईरिस डेना के डूबने को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी साफ नहीं है कि यह तकनीकी खराबी, मौसम की मार या किसी अन्य वजह से हुआ हादसा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और क्षेत्रीय नौसेनाएं घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
आईरिस डेना सिर्फ एक युद्धपोत नहीं, बल्कि ईरान की वैश्विक समुद्री मौजूदगी की महत्वाकांक्षा का प्रतीक रहा है। ऐसे में इसका डूबना या क्षतिग्रस्त होना ईरान के लिए सैन्य, राजनीतिक और रणनीतिक तीनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई गहरी वजह, लेकिन इतना तय है कि आईरिस डेना की घटना ने हिंद महासागर से लेकर मिडिल ईस्ट तक हलचल बढ़ा दी है।












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