अमेरिका में गृहयुद्ध जैसे हालात! Trump के सबसे खास नौसेना सचिव John Phelan बर्खास्त, किस बात पर मचा इतना बवाल?
ईरान के साथ जारी तनाव के बीच वाशिंगटन से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना सचिव (Navy Secretary) जॉन फेलन (John Phelan) को उनके पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। बुधवार को हुई इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय) बल्कि अमेरिकी राजनीति में भी खलबली मचा दी है।
जॉन फेलन और रक्षा मंत्रालय की सीनियर लीडरशिप के बीच पिछले कई महीनों से चल रही खींचतान और विवाद इस इस्तीफे की मुख्य वजह मानी जा रही है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए पुष्टि की कि जॉन फेलन तत्काल प्रभाव से पेंटागन और ट्रंप प्रशासन छोड़ रहे हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ युद्ध में सीधे तौर पर शामिल है और सामरिक दृष्टि से यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए जानतें हैं जॉन फेलन की बर्खास्तगी के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है?
पेंटागन में नेतृत्व का टकराव और 'गोल्डन फ्लीट' विवाद
जॉन फेलन ने नौसेना के नेतृत्व के दौरान 'गोल्डन फ्लीट' (Golden Fleet) प्रोजेक्ट को अपनी प्राथमिकता बनाया था, जिसमें 'ट्रंप-क्लास' युद्धपोतों सहित नए जहाजों पर भारी निवेश की योजना शामिल थी। हालांकि, जहाज निर्माण कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने के तौर-तरीकों पर उनका रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और उप रक्षा सचिव स्टीफन फीनबर्ग के साथ गहरा मतभेद था।
फेलन के काम करने के तरीके से नाखुश
दि न्यू यॉर्क टाइम्स (The New York Times) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जॉन फेलन और उनके उच्चाधिकारियों के बीच प्रबंधन शैली, कार्मिक मुद्दों और नौसेना की भविष्य की दिशा को लेकर महीनों से तनाव चल रहा था। रिपोर्ट बताती है कि विशेष रूप से स्टीफन फीनबर्ग फेलन के काम करने के तरीके से नाखुश थे और उन्होंने धीरे-धीरे उनके अधिकार क्षेत्र से महत्वपूर्ण परियोजनाओं की जिम्मेदारी छीननी शुरू कर दी थी।
ईरान युद्ध पर क्या होगा असर?
भले ही नौसेना सचिव का सीधे तौर पर युद्ध क्षेत्र में तैनात सेनाओं पर कंट्रोल (Operational Control) नहीं होता, लेकिन उनकी बर्खास्तगी एक नाजुक समय पर हुई है। वर्तमान में अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
एक्सपर्ट का मानना है कि इस प्रशासनिक फेरबदल से नौसेना के उन स्टॉक को फिर से भरने में कठिनाई आ सकती है, जिनकी ईरान युद्ध में भारी खपत हो रही है। इनमें विशेष रूप से टॉमहॉक मिसाइलें और हाई-एंड एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
पेंटागन के भीतर यह विवाद सिर्फ काम करने के तरीकों तक सीमित नहीं था। फेलन का अपने ही डिप्टी, अंडर सेक्रेटरी हंग काओ के साथ भी विवाद था। काओ को रक्षा सचिव हेगसेथ का करीबी माना जाता है। साथ ही, हेगसेथ ने सेना के भीतर उन अधिकारियों की पदोन्नति को रोकने के निर्देश दिए थे जिन्हें वे 'वोक' (Woke) विचारधारा वाला मानते थे। जॉन फेलन इन कार्मिक मुद्दों पर भी अपने वरिष्ठों के साथ असहमत थे।
ट्रंप के करीबी होने के बावजूद गिरी गाज
जॉन फेलन को राष्ट्रपति ट्रंप का काफी करीबी माना जाता था। दिसंबर में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में ट्रंप ने फेलन की तारीफ करते हुए उन्हें देश के सबसे सफल व्यवसायियों में से एक बताया था। ट्रंप ने तब कहा था कि नौसेना के पुनर्निर्माण के लिए फेलन जैसे तेज दिमाग की जरूरत है। लेकिन यह प्रशंसा पेंटागन के भीतर चल रही कड़वाहट को दबा नहीं सकी।
अलग-अलग विचारधाराओं का टकराव
हडसन इंस्टीट्यूट के नौसेना विश्लेषक ब्रायन क्लार्क का कहना है कि फेलन नौसेना को उस दिशा में ले जा रहे थे जो हेगसेथ और फीनबर्ग की सोच से अलग थी। जहां फेलन युद्धपोतों पर ध्यान दे रहे थे, वहीं पेंटागन का नेतृत्व पनडुब्बी, स्टील्थ एयरक्राफ्ट और मानवरहित प्रणालियों (Unmanned Systems) को प्राथमिकता दे रहा था।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सशस्त्र सेवा समिति के टॉप डेमोक्रेट सीनेटर जैक रीड ने इस बर्खास्तगी को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने एक बयान में कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान युद्ध के बीच, जब हमारी नौसेना कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है, शीर्ष स्तर पर इस तरह का व्यवधान हमारे नाविकों, सहयोगियों और विरोधियों को गलत संकेत भेजता है।'
अमेरिका में गृहयुद्ध जैसे हालात?
जॉन फेलन ट्रंप प्रशासन के पहले ऐसे सेवा सचिव (Service Secretary) बन गए हैं जिन्हें इस तरह पद से हटाया गया है। उनसे पहले सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को भी इसी महीने बर्खास्त किया गया था, जो पेंटागन के भीतर मचे गहरे असंतोष को दर्शाता है। 'हालांकि अभी इसे सीधे तौर पर 'गृहयुद्ध' कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन ईरान युद्ध के बीच जिस तरह से सरकार और सेना के बीच तलवारें खिंची हैं, वह यह साफ इशारा है कि अमेरिका के अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है।'














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