Iran Vs America: अब अमेरिका की हार पक्की! NATO के साथी ने ट्रंप की पीठ में घोंपा छुरा, कहा- हम नहीं उलझेंगे
Iran Vs America War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी है। स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन ईरान के खिलाफ किसी भी सीधी जंग में अपनी सेना नहीं भेजेगा। इसे अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नाटो के सबसे मजबूत सहयोगी ने ऐन वक्त पर हाथ पीछे खींच लिए हैं।
हालांकि ब्रिटेन रक्षात्मक कार्रवाई और लॉजिस्टिक मदद जारी रखेगा, लेकिन 'ग्राउंड वॉर' से दूरी बनाकर उसने ट्रंप की युद्ध नीति को कमजोर कर दिया है। जानकारों का मानना है कि ब्रिटेन के इस रुख से अमेरिका सैन्य मोर्चे पर अकेला पड़ सकता है, जिससे इस संघर्ष में उसकी जीत की संभावनाएं धुंधली होती दिख रही हैं।

ब्रिटेन का बड़ा फैसला: हम नहीं लड़ेंगे युद्ध
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह ब्रिटेन की लड़ाई नहीं है और वे इसमें नहीं उलझेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य केवल ब्रिटिश नागरिकों और अपने सहयोगियों की रक्षा करना है। ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि वे केवल 'रक्षात्मक' कार्रवाई करेंगे। इसका मतलब यह है कि अगर ईरान की मिसाइलें आती हैं तो वे उन्हें गिराएंगे, लेकिन ईरान के अंदर घुसकर हमला करने के लिए अपनी सेना नहीं भेजेंगे।
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Iran-US conflict Update: ट्रंप के लिए इसे 'धोखा' क्यों माना जा रहा है?
अमेरिका, खास तौर पर ट्रंप प्रशासन, ईरान के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट सैन्य मोर्चे की उम्मीद कर रहा था। नाटो के सबसे भरोसेमंद साथी ब्रिटेन का इस तरह 'पीछे हटना' अमेरिका की रणनीतियों को कमजोर कर सकता है। आलोचकों का मानना है कि ब्रिटेन ने ऐन मौके पर साथ छोड़कर अमेरिका को ईरान के सामने अकेला खड़ा कर दिया है, जिससे मध्य पूर्व में पश्चिमी देशों की पकड़ ढीली पड़ सकती है।
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मदद भी और दूरी भी: ब्रिटेन की दोहरी नीति
दिलचस्प बात यह है कि सेना न भेजने के बावजूद ब्रिटेन पूरी तरह गायब नहीं हुआ है। स्टार्मर ने अमेरिका को ईरानी ठिकानों पर हमला करने के लिए अपने सैन्य ठिकानों (Bases) के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। साथ ही, ब्रिटिश लड़ाकू विमान मिसाइलें रोकने के लिए तैनात रहेंगे। यानी ब्रिटेन हथियार और जगह तो दे रहा है, लेकिन अपने सैनिकों की जान जोखिम में डालने को तैयार नहीं है।
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Hormuz Strait tension Hindi: आर्थिक हितों की चिंता
ब्रिटेन के लिए यह लड़ाई सैन्य से ज्यादा आर्थिक है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का सबसे जरूरी रास्ता है। स्टार्मर ने कहा है कि उनका जोर इस समुद्री रास्ते को खुला रखने पर रहेगा ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान न हो। ब्रिटेन चाहता है कि वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने में मदद करे, लेकिन किसी ऐसी लंबी जंग का हिस्सा न बने जिसका कोई अंत नजर न आता हो।
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