Iran vs America: 'होर्मुज हमारा है, हमारा ही रहेगा', ईरान ने दी अमेरिका को खुली चुनौती, अब क्या करेंगे ट्रंप
Iran vs America: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। वरिष्ठ ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने साफ कर दिया है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण कभी नहीं छोड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देश पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी कर रहे हैं।
ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को अपनी 'राष्ट्रीय संपत्ति' और सुरक्षा कवच मानता है। अमेरिकी नाकेबंदी से नाराज तेहरान अब संसद में नया कानून लाकर इस मार्ग पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की योजना बना रहा है।

होर्मुज पर ईरान की सख्त दावेदारी
ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का अधिकार अटूट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्ग से कौन सा जहाज गुजरेगा और कौन सा नहीं, इसका फैसला केवल ईरान ही करेगा। ईरान की संसद अब इसे एक औपचारिक कानून का रूप देने जा रही है। तेहरान का मानना है कि यह उनकी समुद्री सीमा और संप्रभुता का हिस्सा है। अजीजी ने इसे दुश्मन देशों (खासकर अमेरिका) का सामना करने के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया है।
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नए कानून और सुरक्षा की तैयारी
ईरान अपने संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत एक नया विधेयक पेश कर रहा है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य समुद्री पर्यावरण, समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय रक्षा को ईरान के पूर्ण नियंत्रण में लाना है। एक बार संसद से मंजूरी मिलने के बाद, ईरान के सशस्त्र बल और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इस कानून को सख्ती से लागू करेंगे। तेहरान के विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध जैसी स्थितियों के बाद अपनी सैन्य धाक जमाने के लिए यह कदम बहुत जरूरी है।
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पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता
तनाव के बीच, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को इस्लामाबाद में बातचीत करेंगे। अमेरिकी दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप ने विशेष रूप से भेजा है। हालांकि ईरान ने अभी तक अपनी टीम के लीडर के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें बड़े कूटनीतिक चेहरे शामिल होंगे। ईरान इस बातचीत में अपने बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी पाबंदियों और आर्थिक नाकेबंदी को लेकर अपना विरोध दर्ज कराएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है या यहां सख्ती बढ़ाता है, तो पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यही वजह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है और ईरान इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।












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