Iran-US War में नया ट्विस्ट! Pakistan की अपील पर Trump के 14 दिन डेडलाइन बढ़ाने के 4 बड़े कारण क्या?
Iran-US War Pakistan PM Request Trump Extend Iran Deadline: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिए 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने से महज 1 घंटे पहले बड़ा यू-टर्न लिया। 8 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 4 बजे (भारतीय समय) ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अपील मानते हुए 14 दिन (दो सप्ताह) के लिए ईरान पर सभी बमबारी और सैन्य हमले निलंबित करने की घोषणा कर दी।
ईरान की ओर से भी सहमति आ गई है। उधर, अमेरिकी और इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल युद्धविराम के लिए सहमत हो गया है।

Pakistan Shehbaz Sharif की अपील: आखिरी घंटे का कूटनीतिक दांव
शहबाज शरीफ ने X पर पोस्ट कर ट्रंप से डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ाने की विनम्र अपील की। साथ ही ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य दो हफ्ते के लिए खोलने की गुजारिश की और इसे 'सद्भावना का प्रतीक' बताया। शरीफ ने लिखा कि 'मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास लगातार आगे बढ़ रहे हैं... कूटनीति को अपना काम करने दें, मैं राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध करता हूं कि डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ा दें।' उन्होंने सभी पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की भी अपील की। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप को प्रस्ताव की जानकारी है और जल्द जवाब आएगा।
BREAKING: A deal is "expected to be closed" between the US and Iran tonight, per CNN.
Details include:
1. A "regional source" has informed CNN that "some good news is expected from both sides soon"
2. Discussions are being steered directly by Pakistan’s army chief, Field…
— The Kobeissi Letter (@KobeissiLetter) April 7, 2026
पाकिस्तान मध्यस्थ क्यों बना?
पाकिस्तान का यह रोल कई लोगों को हैरान कर रहा है, लेकिन इसमें आश्चर्य की बात नहीं:
- ईरान से 900 किमी लंबी साझा सीमा और गहरे सांस्कृतिक-धार्मिक संबंध।
- आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ट्रंप के 'फेवरेट फील्ड मार्शल' हैं। मुनीर ने बैक-चैनल के जरिए JD वेंस और ईरानी पक्ष के बीच संपर्क बनाए रखा।
- 2025 के पाक-भारत संकट में ट्रंप को कूटनीतिक जीत दिलाने समेत पुराने संबंध।
- पाकिस्तान न इजराइल समर्थक दिखता है, न अति-अमेरिकी - यही इसे दोनों तरफ विश्वसनीय बनाता है।
पाकिस्तान के हित: तेल संकट और सुरक्षा चिंता
पाकिस्तान 90% तेल होर्मुज से आयात करता है। बंद रहने पर ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी (मार्च में ही 20% बढ़ोतरी हो चुकी है)। 4-दिन का कार्य, सप्ताह और ईंधन बचत के उपाय पहले से लागू हैं। साथ ही सऊदी डिफेंस पैक्ट, अफगानिस्तान में तनाव और भारत से विवाद के कारण पाकिस्तान नहीं चाहता कि युद्ध और बढ़े। फिर भी पाकिस्तान को वैश्विक कूटनीति में नई पहचान मिल रही है।
Trump Ceasefire Agree Reason: ट्रंप के सीजफायर की सहमति के 4 बड़े कारण
Diplomatic efforts for peaceful settlement of the ongoing war in the Middle East are progressing steadily, strongly and powerfully with the potential to lead to substantive results in near future. To allow diplomacy to run its course, I earnestly request President Trump to extend…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) April 7, 2026
1. ट्रंप की डील मेकर स्टाइल
ट्रंप हमेशा कड़ी धमकी देते हैं, लेकिन आखिरी वक्त में समझौता करना पसंद करते हैं। उन्होंने पहले भी कई बार डेडलाइन बढ़ाई है। 'आज रात सभ्यता खत्म' वाली पोस्ट के बावजूद उन्होंने पाकिस्तान के जरिए फेस-सेविंग विकल्प चुन लिया। यह उनकी क्लासिक 'आर्ट ऑफ द डील' है। दबाव बनाओ, फिर डील करो।
2. पाकिस्तान पर व्यक्तिगत भरोसा
ट्रंप आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ दोनों को पसंद करते हैं। पाकिस्तान ने बैक-चैनल चलाकर ट्रंप को 'दोनों पक्षों को बचाने' का रास्ता दिया। मुनीर के जरिए रातभर की बातचीत ने ट्रंप को आश्वस्त किया कि यह प्रस्ताव गंभीर है।
3. तेल की कीमतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था
होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व का 20% तेल गुजरता है। अगर बंद रहा तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती थीं। 14 दिन का युद्धविराम और होर्मुज खुलने की शर्त से तुरंत राहत मिलेगी। पूरी दुनिया इस पर नजर टिकाए हुए है।
4. कूटनीतिक जीत और फेस-सेविंग
ट्रंप कह सकते हैं कि उनका दबाव काम आया और पाकिस्तान के जरिए डील हुई। ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को आधार मानकर उन्होंने खुद को 'शांति का राजदूत' दिखाया। अगर समझौता होता है तो मध्य पूर्व में स्थायी शांति का श्रेय ट्रंप को मिलेगा।












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